अखबार के कुछ ऐसे शीर्षक जिनमें वर्तनी और व्याकरण की दृष्टि से अनेक ग़लतियां…

LN Shital : मित्रो, निम्नलिखित शीर्षक एक ही अखबार के कुछ ऐसे शीर्षक हैं, जिनमें वर्तनी और व्याकरण की दृष्टि से अनेक ग़लतियाँ हैं। यदि मेरे हिन्दी-प्रेमी मित्रों की इच्छा हो तो, मैं उन ग़लतियों को उजागर करने का प्रयास करूँ।

‘नकली नोट के सौदागरों पर देशद्रोह का केस’
‘डेढ़ माह में पुलिस ने नकली करेंसी के साथ दो गिरोह के सात सदस्यों को किया था गिरफ्तार’
नकली ‘नोट’ की जगह नकली ‘नोटों’ होना चाहिए, क्योंकि नोट एक नहीं, अनेक हैं। इसी तरह ‘दो गिरोह’ की जगह ‘दो गिरोहों’ होना चाहिए, ‘गिरोह’ एक नहीं, दो हैं।

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‘दुनियाभर में ईंधन की कीमतें घटी, लेकिन…’
कीमतें ‘घटी’ नहीं, कीमतें ‘घटीं’ होना चाहिए, क्योंकि यहाँ संज्ञा (कीमत) बहुवचन में है, और बहुवचन संज्ञा के साथ क्रिया भी बहुवचन में ही होनी चाहिए।

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‘सिर्फ वह ही नकारात्मक खबर, जो आपको जानना जरूरी है’
‘वह ही’ की जगह ‘वही’ और ‘जो’ की जगह ‘जिसे’ होना चाहिए। वैसे, ज़्यादा सही वाक्य है – सिर्फ़ वही नकारात्मक ख़बर, जिसे जानना आपके लिए ज़रूरी है

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‘कारोबारी की हत्या कर फरार है आरोपी’
इस शीर्षक में बेहद गम्भीर ग़लती है। यहाँ, शीर्षक देने वाले ने घोषित कर दिया है कि फरार होने वाले ने ही हत्या की है; और जब फरार होने वाले ने ही हत्या की है तो वह हत्यारा कहलायेगा न कि ‘आरोपी’। शीर्षक देने वाले उप सम्पादक को मालूम होना चाहिए कि, जिस व्यक्ति पर आरोप होता है, वह ‘आरोपित’ कहलाता है’ न कि ‘आरोपी’। जब पुलिस आरोपित के ख़िलाफ़ अदालत में अभियोग-पत्र या चार्जशीट दाखिल कर देती है, तो उसे अभियुक्त कहा जाता है; और जब अदालत उस अभियुक्त को दोषी करार दे देती है, तो उसे अपराधी कहा जाता है। उस उपसम्पादक को यह भी मालूम होना चाहिए कि अभी अख़बारों को यह न्यायिक अधिकार नहीं मिला है कि वे किसी न्यायिक फैसले के बगैर किसी को भी हत्यारा बता सकें।

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‘ईंट ढोई, चौकीदारी की, अब मैं हूँ आईटी इंस्पेक्टर…थैंक्यू अखबार’
‘ईंट ढोई’ नहीं’ ‘ईंटें ढोयीं’ होना चाहिए। मेरे भाई उप सम्पादकजी, वह केवल एक ईंट ढोकर आईटी इंस्पेक्टर नहीं बन गया। अँगरेज़ी में दो शब्द हैं – ‘Thank you’. इन्हें देवनागरी में लिखा जाना चाहिए – ‘थैंक यू’। इस लिए ‘थैंक्यू’ लिखना पूर्णतः ग़लत है बाबू।

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‘एजेंसियां जैसे दलों की सरकारें’
ऐसा कौन माई का लाल है, जो इस शीर्षक का मतलब समझा सके? और, जिस शीर्षक का मतलब समझाने के लिए ‘माई के लाल’ की खोज होने लगे, तो उस शीर्षक देने वाले ‘विद्वान्’ को आप क्या कहेंगे?

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‘एलपीजी नंबर लिंक कराने की डेडलाइन कल ख़त्म’
इस शीर्षक से लगता है कि शीर्षक देने वाला हमें बता रहा है कि डेडलाइन ‘बीते हुए कल’ (yesterday) ख़त्म हो चुकी है, जबकि ऐसा है नहीं। डेडलाइन तो आने वाले कल (tomorrow) को ख़त्म होनी है।
इसी पेज पर एक अन्य ख़बर है – बिजली के नए इंफ्रास्ट्रक्चर का काम कल होगा ख़त्म
मेरे भाई उप सम्पादक जी! क्यों ऐसी बेवकूफ़ाना अराजकता फैला रहे हैं?

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‘पेंशनर्स को बैंक में जमा कराना होगा पैन नंबर’
शीर्षक-दाता को मालूम हो कि full form of ‘PAN’ is – ‘Permanent Account Number’. इस लिए यहाँ ‘पैन’ के साथ ‘नंबर’ लिखने के ज़रूरत नहीं है।

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पीडब्ल्यूडी और नगर निगम तालमेल से करे काम
यहाँ ‘करे’ की जगह ‘करें’ होना चाहिए। क्योंकि संज्ञाएँ(पीडब्ल्यूडी और नगर निगम) दो हैं, इस लिए क्रिया भी बहुवचन में होनी चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार एलएन शीतल के फेसबुक वॉल से.



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