
अमित कर्ण-
गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले का इंटरव्यू.
SRINIVASAN : आप पर ढेर सारे क्रिमिनल केस हैं, मर्डर और अपहरण के. विपक्ष कह रहा है आपके कारण JDU में भी जंगल राज है.
ANANT SINGH : कउनो जंगलराज ना बा. सब केस फालतू है.
CHAMCHA : हे तुम चुनाव का मुद्दा पूछो
SRINIVASAN : एक सेकंड.. आराम से भैया लोकतंत्र है.
ANANT SINGH : तू काहें बिचवा में आ जावत है रे..
SRINIVASAN : बिहार जैसे गरीब राज्य में आपके पास 100 करोड़ की संपत्ति कहां से आयी.
CHAMCHA GANG : जिंदाबाद जिंदाबाद अनंत सिंह जिंदाबाद… (इसके बाद अनंत सिंह इंटरव्यू छोड़कर भाग लिए)
नितिन ठाकुर-
ध्यान से देखिए। मीम और रील मैटेरियल के तौर पर अनंत सिंह को प्रोजेक्ट करनेवाले कंटेंट क्रिएटर्स ने क्या किया है? माफ कीजिए, बस एक अपराधी का भला किया है। उसकी हरकतों को नॉर्मलाइज़ किया है। उसके नृशंस कारनामों को चुटकुलाइज़ किया है।
प्रधानमंत्रियों मुख्यमंत्रियों को नथुने फुलाकर ललकारने वाले इंटरव्यू बहादुर उसके सामने बैठ सिर्फ खिसिया रहे थे। सवाल ऐसे पूछ रहे थे जैसे फूल बरसा रहे हों। इंतज़ार कर रहे थे कि उनके “छोटे सरकार” बस कुछ वायरल सामान उपलब्ध करा दें। कोई सख्त सवाल नहीं, किसी हिम्मत का प्रदर्शन नहीं। कमरा भरे चमचों की उपस्थिति का खौफ इन सबके चेहरे पर साफ दिखता है। ये लाज़िमी है। हम- आप होते तो गुंडई भरे माहौल में असहज ही होते लेकिन इसी सबके बीच एक श्रीनिवासन भी हैं। मुश्किल सवाल, बीच में टोकते चमचे को हिदायत और फ्रंटफुट पर फोकस्ड सवालिया तेवरों के साथ अनंत सिंह को उखाड़ डाला। व्यू, कमेंट, इंगेज़मेंट, मीम की शब्दावलियों के बोझ तले जब कोई लाग लपेट बिना वो करे जो करने की हसरत सब रखते हैं पर हिम्मत नहीं तब ताली बजती रहनी चाहिए दोस्तो।
गुंडे अनंत सिंह को बाहुबली और छोटे सरकार कहकर विभूषित करने वाली चारण जमात के लिए आइना यह वीडियो है, इसे पत्रकारिता कहते हैं जिसे चाटुकारिता के दौर ने निगल लिया है.
-शीतल पी सिंह
बिहार में दुलारचंद यादव हत्याकांड में बाहुबली और मोकामा से जनता दल (यू) यानी एनडीए के उम्मीदवार अनंत सिंह की गिरफ्तारी बाजारू टीवी चैनलों के लिए किसी हादसे कम नहीं है।
तमाम चैनल अपनी टीआरपी की खातिर दुर्दांत बाहुबली को सेलिब्रिटी की तरह पेश कर रहे थे। उसके इंटरव्यू लिए जा रहे थे और बेशर्मी भरे उसके हर जवाब पर इंटरव्यू लेने वाले रिपोर्टर खींसे निपोर रहे थे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपनी करीबी के चलते अनंत सिंह बेफिक्र था कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। चूंकि एनडीए का उम्मीदवार है, इसलिए चुनाव आयोग को तो खामोश रहना ही था।
लेकिन सोशल मीडिया के दबाव में आखिरकार अनंत सिंह को गिरफ्तार करना पड़ा, क्योंकि भाजपा को अपने यादव समर्थकों के छिटकने का डर सताने लगा था।
संलग्न वीडियो में न्यूज लांड्री वेबसाइट के चर्चित पत्रकार श्रीनिवासन जैन उसका इंटरव्यू कर रहे हैं। चूंकि श्रीनिवासन के चूभते हुए सवाल अनंत सिंह को असहज करने वाले हैं, इसलिए वहां उसके आसपास बैठे उसके चमचे किस तरह बेचैन हो रहे हैं और जय जय श्रीराम की तर्ज़ पर इंक़लाब ज़िंदाबाद के नारे लगा रहे हैं, वीडियो में साफ देखा जा सकता है।
-अनिल जैन



