शीतल पी सिंह-
मिडल ईस्ट, एशिया और अफ़्रीका के मध्यपूर्व का हिस्सा, लीबिया ईराक सीरिया के बाद अब ईरान ही यहां ऐसा इकलौता देश बचा था जहां अमरीकी सैनिकों का अड्डा न था । ट्रंप ने आज इस पर भी हमला करके ख़ुद्दारी और ख़ुदमुख़्तारी की इंसानी सोच को मसल डालने की कोशिश शुरू की है!
अमरीकी लड़ाकू विमानों ने बीती रात ईरान के तीन परमाणु ठिकानों फोरदो, नतान्ज और इस्फाहान पर हवाई हमला किया । राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्वीट किया कि हमला करके उसके विमान सुरक्षित अपने घोंसलों में लौट आए ।
ईरानी टेलीविजन पर जो प्रतिक्रिया आई है उसमें साफ़ है कि अब अमरीका के मध्य पूर्व स्थित सारे ज़मीनी ठिकाने और अमरीकी नौसेना के जहाज़ ईरानी मिसाइल्स की जद में होंगे ।
देखना है कि दुनिया की महाशक्ति (जिसे देर सबेर युरोपियन देशों का साथ भी मिल ही जाएगा) के सामने ईरानी सेना और ईरानी समाज कब तक और क्या क्या करते हैं?
पश्चिम दूसरे विश्वयुद्ध के बाद ख़ुद के बनाए नियम कायदों को खुद ही ख़त्म कर चुका है । आज नहीं तो कल तीसरा विश्वयुद्ध समीप लग रहा है ।


नितिन त्रिपाठी-
That’s how America works. बीस साल से ईरान ने पहाड़ के नीचे एटॉमिक प्लांट बनाया. यूरोप, यूनाइटेड नेशंस, इजरायल – ढेर सारी बातें, बहस, नेगोशिएशन. सारे मजहबी एक साथ. वन फाइन डे ट्रम्प ने बोला इनफ इस इनफ. B2 बॉम्बर भेजे दो घंटे में ईरान की तीनो न्यूक्लियर फैसिलिटी स्वाहा. अब टीवी पर आकर बोल रहा है, job is done.
ट्रम्प चिचा अभी टीवी पर आए चार मिनट का भाषण था. बोला दस साल से ईरान ने नाक में दम कर रखा था. आज अमेरिका ने दो घंटे में ईरान की सारी म्यूक्लियर कैपेबिलिटी समाप्त कर दी. अब सब शांति है.
होप सो अब ईरान शांत रहेगा हमें शांति चाहिए. आज जो किया मिलिट्री ने मानवता के इतिहास में कभी नहीं हुआ. इतना सफल ऑपरेशन सदैव याद रखा जाएगा. अब उम्मीद है उड़ान शांत रहेगा. नही रहेगा तो इससे छोटे मोटे ढेरों और टारगेट निशाने पर हैं. इसे घंटों में मिटाया वो सब मिनटों में मिट जायेंगे. इसी लिए अब ईरान चुप चाप बैठे शांति के साथ.
गॉड ब्लेस मिडल ईस्ट. थैंक यू.
विश्व दीपक-
अगर वश चलता तो मैं ईरान के आसमान पर आयरन डोम बनकर छा जाता. अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो स्वभाव से लुच्चा और नीयत से लुटेरा है, उसने वह गल्ती कर ही दी जिसका अंदेशा था.
ईरान पर हमला करके इस सनकी ने तीसरे विश्व युद्ध का दरवाजा खोल दिया. रूस,चीन को वह लॉजिक थमा दिया जिसका इस्तेमाल दुनिया को और बर्बाद करने के लिए किया जाएगा.
अब अगला नंबर ताइवान का होगा. तब अमरीका क्या करेगा? आज नहीं कल तो शी जिनपिंग ताइवान पर हमला करेगा ही. उसे चीन के इतिहास में माओ से बड़ा और महान बनना है. इसलिए वह ताइवान को जीते जी हड़पना चाहेगा.
यूक्रेन में रूस का थोपा युद्ध चल ही रहा है. हाल फिलहाल पुतिन फिर बोला है कि पूरा का पूरा यूक्रेन रूस का है.
इस पूरे खेल में चीन के क्लाइंट स्टेट पाकिस्तान और अरब के सुन्नी स्टेट्स की भूमिका को नजरंदाज़ नहीं किया जा सकता. अब इस्लामिक कट्टरपंथ को अमरीकी साम्राज्यवाद के विरोध के नाम पर दुनिया भर में जस्टीफाई किया जाएगा. ऐसी ताकतों को अमरीका विरोधी शक्तियों का भरपूर समर्थन मिलेगा. ईरान या अन्य जगहों पर भी खामनेई 2.0 का प्रादुर्भाव होगा. तब अमरीका क्या करेगा?

प्रकाश के रे-
पहले से ही ईरान की ओर से कहा जाता रहा है कि तीन परमाणु ठिकानों से ज़रूरी चीज़ें निकाली जा चुकी हैं. इंफ़्रास्ट्रक्चर के नुक़सान को ठीक किया जा सकता है. फ़ॉर्दो ठिकाने को बर्बाद करना बेहद मुश्किल है.
ट्रम्प जो धमकी दे रहे थे, उसे ईरान ने अनसुना कर दिया था. और ज़्यादा बेइज़्ज़त होने से बचने तथा ज़ायोनिस्ट लॉबी के नमक का क़र्ज़ चुकाने के लिए उन्होंने यह हमला किया है.
ईरान आम तौर पर बहुत संयम के साथ जवाबी कार्रवाई करता रहा है. इस हमले पर उसका यही रुख़ होगा. आगे हमले होंगे, तभी वह अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर सकता है. अभी उसका फ़ोकस इज़रायल के हमलों के जवाब देते रहने पर रहेगा.
ट्रम्प का एक और झूठ दुनिया के सामने आया है. दो सप्ताह की बात कहकर दो दिन में बमबारी करने से परमाणु मसले पर बातचीत की संभावना फ़िलहाल ख़त्म हो गई है.
रवीश शुक्ला-
अमरीका ने कल रात को ईरान पर दो मिसाइलों से हमला किया…ये दो मिसाइलें इजरायल के पास भी नहीं थी…दरअसल ईरान के परमाणु अड्डे जमीन से कई फिट नीचे बने हैं इन अड्डों को भेदने की क्षमता इजरायल के पास नहीं थी…यही वजह है कि बार बार वो अमरीका को उकसा रहा था…अब ईरान-इज़रायल जंग में अमरीका भी कूद पड़ा है…आईए समझते से हैं ये दो मिसाइल क्या है और क्या खासियत है…सबसे पहली मिसाइल है Tomahawk missile और दूसरी GBU-57 Bunker buster शामिल है..
सबसे पहले बात GBU-57 की ये मैसिव ऑर्डनेंस पेनिट्रेटर (एमओपी) भी कहा जाता है, एक ३०,००० पाउंड का सटीक-निर्देशित बंकर बस्टर बम है जिसे अमेरिकी वायु सेना (यूएसएएफ) द्वारा विकसित किया गया है।
इसका वजन लगभग ३०,००० पाउंड (१३,६०० किलोग्राम) विस्फोट से पहले ६० मीटर (२०० फीट) मिट्टी या १८ मीटर (५९ फीट) कंक्रीट में प्रवेश करने के लिए डिज़ाइन किया गया है..फिर से अंदर फटता है जिससे नुकसान घातक होता है..इस मिसाइल को को B-2 बमवर्षक के जरिए छोडा जाता है…इस तरह 12 मिसाइलें ईरान पर दागने की खबर आ रही है..
जीबीयू-५७ का उपयोग कथित तौर पर अमेरिकी हमलों में ईरानी परमाणु स्थलों पर किया गया था, जिनमें फोर्डो, नतांज़ और इस्फ़हान शामिल हैं! इसका विकास बोइंग ने नवंबर २०१५ से करना शुरु किया.जब ईरान के परमाणु स्थल ८० मीटर से अधिक भूमिगत माने जाते हैं ऐसे में देखना होगा कि इसने कितना नुक़सान पहुंचाया!


दूसरी मिसाइल Tomahawk टोमहॉक मिसाइल एक लंबी दूरी की, सभी मौसम में काम करने वाली, जेट-संचालित, सबसोनिक क्रूज मिसाइल है जिसका उपयोग अमेरिकी नौसेना और रॉयल नेवी द्वारा जमीन और समुद्र के लक्ष्यों पर सटीक हमले करने के लिए किया जाता है। 2,500 किलोमीटर तक मार करती है लगभग 885 किमी/घंटे के हिसाब से गति है..


