Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

उत्तर प्रदेश

भारत समाचार के रिपोर्टर को उन्नाव पुलिस ने भेजा नोटिस, हत्या के खुलासे का वीडियो भी देखिए!

A scanned Hindi form filled with blue ink: names, dates, and a signature on the bottom line.

आज के दौर में निष्पक्ष और खोजी पत्रकारिता करना लगातार कठिन होता जा रहा है। खुलासे करने वाले पत्रकारों के खिलाफ अब अपराधियों से ज्यादा सरकारी तंत्र सक्रिय दिखाई देता है। सवाल उठाने वालों को संरक्षण देने के बजाय उन्हें ही नोटिस भेजकर परेशान किया जा रहा है। मामला उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का है, जहां एक पत्रकार ने जिस घटना को पुलिस सड़क हादसा बताकर बंद करना चाह रही थी, उसका सच सामने लाकर हत्या का खुलासा कर दिया।

बात हो रही है भारत समाचार के संवाददाता संकल्प दीक्षित की, जिन्होंने एक किसान की संदिग्ध मौत के मामले में गहराई से पड़ताल की। पुलिस जहां इसे सामान्य सड़क दुर्घटना मान रही थी, वहीं पत्रकार की पड़ताल ने कहानी का दूसरा चेहरा उजागर कर दिया। वीडियो साक्ष्यों और स्थानीय लोगों से जुटाई गई जानकारी के आधार पर यह मामला हत्या की ओर इशारा कर रहा था। आखिरकार पुलिस को हत्या की धाराएं बढ़ानी पड़ीं और आरोपी को जेल भेजना पड़ा।

लेकिन अब वही पुलिस खुलासा करने वाले पत्रकार को नोटिस भेजकर यह जानना चाह रही है कि वीडियो आखिर मिला कहां से। सवाल यह है कि क्या अब पुलिस की जांच, मुखबिर तंत्र और सर्विलांस व्यवस्था भी पत्रकारों के भरोसे चलने लगी है?

क्या है पूरा मामला?

घटना अप्रैल महीने की है। फतेहपुर चौरासी थाना क्षेत्र के मलतापुर सुखाखेड़ा निवासी मुन्नू सिंह 25 अप्रैल की शाम अपने खेत की ओर पैदल जा रहे थे। आरोप है कि तभी उनके सगे भतीजे जितेंद्र सिंह ने ट्रैक्टर से टक्कर मारकर उन्हें घायल कर दिया। घायल अवस्था में उन्हें पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सफीपुर और फिर जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना जैसे ही मीडिया तक पहुंची, भारत समाचार के संवाददाता संकल्प दीक्षित ने मामले की तह तक जाने का प्रयास शुरू किया।

स्थानीय लोगों से बातचीत और घटनास्थल की पड़ताल के दौरान उन्हें एक वीडियो भी मिला, जिसने पूरे मामले का रुख बदल दिया। जांच में यह आशंका मजबूत हुई कि यह कोई साधारण सड़क हादसा नहीं, बल्कि संपत्ति विवाद में की गई सुनियोजित हत्या हो सकती है। इसके बाद खबर प्रसारित की गई कि भतीजे ने कथित रूप से पहले ट्रैक्टर से टक्कर मारी और फिर मारपीट कर अपने चाचा की हत्या कर दी। खबर और वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई। मामले की दोबारा जांच हुई, धाराएं बढ़ाई गईं और आरोपी जितेंद्र सिंह को हत्या के आरोप में जेल भेजा गया।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर खड़ा हो रहा है। जिस घटना को गांव के लोग शुरू से संदिग्ध मान रहे थे, जिसका वीडियो भी कुछ ग्रामीणों के पास मौजूद था, उसे पुलिस ने बिना गंभीर जांच के सड़क हादसा मान लिया। आखिर क्यों?

गांव के लोगों ने पुलिस पर भरोसा करने के बजाय एक पत्रकार को वीडियो देना ज्यादा उचित समझा। यह अपने आप में स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। अब जबकि पत्रकार के खुलासे के बाद मामला हत्या में तब्दील हो चुका है, तो पुलिस का ध्यान असली चूक पर आत्ममंथन करने के बजाय उस पत्रकार पर केंद्रित दिखाई दे रहा है जिसने सच सामने लाने का काम किया। सवाल यह भी है कि क्या अब खोजी पत्रकारों को अपने स्रोतों का खुलासा करने के लिए मजबूर किया जाएगा?

क्या सच उजागर करने वालों को ही सरकारी नोटिसों के जरिए दबाव में लाया जाएगा? अगर एक पत्रकार की पड़ताल से हत्या का सच सामने आ सकता है, तो फिर सरकारी संसाधनों, मुखबिर तंत्र और सर्विलांस सिस्टम के बावजूद पुलिस शुरुआत में सच्चाई तक क्यों नहीं पहुंच सकी?


https://twitter.com/i/status/2058489451752681677

Hindi newspaper front page reporting that a nephew killed his uncle by driving a tractor; page includes a tractor photo and several columns of text.

मामले में उन्नाव पुलिस द्वारा पहले दर्ज की गई एफआईआर…

Federal Indian FIR document screenshot: a First Information Report form with case details—FIR No. 0139, district/PS listed, date/time of FIR 26/04/2026 07:10, sections 106(1) and 281, and occurrence details noting 25/04/2026 around 17:00 with related diary entry 012.
NCRB form page in Hindi with fields for complainant details and address sections.
Official document page with Hindi 'First Information contents' and English 'Action taken' sections describing a case, investigation start, and officer names.
Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन