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सुख-दुख

जाने-माने कवि और पत्रकार वीरेन डंगवाल का बरेली में निधन

पिछले कई वर्षों से कैंसर से जूझ रहे हिंदी के जाने माने कवि और पत्रकार वीरेन डंगवाल ने आज सुबह चार बजे बरेली में अंतिम सांस ली. पिछले दिनों उन्हें बरेली प्रवास के दौरान गले की नस से ब्लीडिंग होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अमर उजाला बरेली के संपादक दिनेश जुयाल ने आज सुबह पांच बजे फेसबुक पर स्टेटस अपडेट कर वीरेन डंगवाल के न रहने के बारे में जानकारी दी. दिनेश जुयाल लिखते हैं: ”वीरेन दा नहीं रहे. सुबह 4 बजे एस आरएमएस में सांसे बंद हो गयीं. पिछले रविवार को ही अपने घर बरेली आये थे और सोमवार से इसी अस्पताल के आईसीयू में थे. अंत्येष्टि आज शाम चार बजे सिटी श्मशान में.”

 

 

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1 Comment

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  1. अरुण श्रीवास्तव

    September 28, 2015 at 11:56 am

    वीरेन दा के निधन की खबर ने स्तब्ध कर दिया। पूरा विश्वास था कि वे इसबार भी अपनी बीमारी (कैंसर) पर विजय पाकर अस्पताल से वापस आएंगे अफसोस कि ऐसा नहीं हुआ ।
    वीरेन दा को तो एक कवि के रूप नहीं जानता । एक पत्रकार के रूप में पहली बार अमर उजाला बरेली में नौकरी के लिए मिला । उनके मित्र और मेरे अग्रज चितरंजन सिंह का पत्र लेकर मैं उनके पास गया था। पहली मुलाकात में भी उन्होंने एहसास नहीं होने दिया अजनबी होने का । उन्होंने अतुल महेश्वरी को पत्र लिखा और नौकरी मिल गई हालांकि मैं टिक नहीं पाया दूसरी बार वे अपनी सीट से उठकर राजुल जी के चैंबर तक गए। दूसरी बार बरेली में नौकरी मिल गई। यही पर पलास जी से परिचित हुआ। सहारा में नौकरी करने के दौरान भी हर महीने उनसे मिलने भटनागर कालोनी जाया करता था। यह सिलसिला तब टूटा जब उन्होंने अमर उजाला कानपुर में संपादक की जिम्मेदारी संभाली।
    वीरेन दा के सानिध्य में काम करने की पूरी नहीं हो सकी। अफसोस इस बात का भी रहेगा कि उनके अंतिम दर्शन नहीं कर पर पाया ।
    उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

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