जी ग्रुप का डूबना सिर्फ शुरुआत समझिए…

Girish Malviya : सुभाष चंद्रा के जी समूह पर संकट के बादल मंडरा रहे है. एक दिन पहले जी का शेयर 26.43 प्रतिशत टूट गया. बताया जा रहा है कि जी के शेयरों में यह गिरावट उस मीडिया रिपोर्ट के बाद आई जिसमें दावा किया गया है कि सरकारी संस्था सीरीयस फ्रॉड इनवेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) नित्यांक इंफ्रापावर कंपनी की जांच कर रही है, जिसने 8 नवंबर 2016 को की गई नोटबंदी के तुरंत बाद 3,000 करोड़ रुपये जमा कराए थे. रिपोर्ट में दावा किया गया कि नित्यांक इंफ्रापावर और एक कथित सेल कंपनी ने वित्तीय लेन-देन किए, जिसमें सुभाष चंद्रा की अगुवाई वाले एस्सेल समूह से 2015 से 2017 के बीच जुड़ी कुछ कंपनियां भी शामिल थीं.

लेकिन यह दावा गले नहीं उतर रहा! जिस तरह के संपर्क ओर जुगलबंदी सुभाष चंद्रा की मोदी सरकार से है, उससे वह इस तरह के मामले वह चुटकियां बजाते हुए सुलझा सकते हैं. सिर्फ आरोप के कारण शेयर्स इस हद तक गिर जाएं, यह संभव नहीं है. कम्पनी के शेयर तब नहीं गिरे जब यह लोग जिन्दल के साथ मुकदमेबाजी में फंसे हुए थे. कम्पनी के शेयर्स तब नहीं गिरे जब कैग ने मिजोरम सरकार की लॉटरी स्कीम में हुई धांधली में जी समूह की कम्पनी का हाथ पाया जिसमें कैग ने लगभग 12 हजार करोड़ की अनुमानित हानि का अनुमान लगाया था.

तो फिर यह अब क्यों हुआ? इसके असली संकेत सुभाष चंद्रा ने खुले पत्र में दिए हैं. वह लिखते कि IL&FS संकट के बाद से मुश्किलें बढ़ गईं हैं. उन्होंने अपनी कुछ गलतियों को स्वीकार करते हुए कहा कि इसके कारण सिर्फ एस्सेल इंफ्रा को ही 4000 से 5000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

एस्सेल इंफ्रा देश के आधारभूत परियोजनाओ में काम करने वाली कम्पनी है. रोड, एयरपोर्ट, मेट्रो आदि. बहुत संभव है कि IL&FS के माध्यम से यह इन परियोजनाओं के ठेके लेती रही हो और जब IL&FS ही डूब रही हो तो उसका दबाव इस पर भी आया हो. यकीन मानिए असली खेल IL&FS का ही है. अभी बहुत सी ऐसी कम्पनियां भी डूबेंगी जिनके बारे में आप आश्चर्य करेंगे. सुभाष चंद्रा अपने खुले पत्र में लिखते हैं कि अब तक किसी भी प्रवर्तक ने अपनी सबसे शानदार कंपनी (क्राऊन) को बेचने की पहल नहीं की है, लेकिन वह कर रहे हैं.

लेकिन चंद्रा यह पहल इस संकट के सामने आने के बहुत पहले से ही कर चुके हैं. लगभग तीन महीने पहले ही यह खबर सामने आ गयी थी कि एस्सेल ग्रुप अपनी सबसे मजबूत कम्पनी माने जाने वाली ‘जी ऐंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) में अपनी आधी हिस्सेदारी किसी स्ट्रेटजिक पार्टनर को बेचने की तैयारी कर रहा है. इस बिजनेस का अधिकतम मूल्य प्राप्त करने के लिए स्ट्रेटजिक रिव्यू करने की जिम्मेदारी ‘Goldman Sachs Securities (India) Ltd’ को दी गयी है. सुभाष चंद्रा के बेटे और जी एंटरटेनमेंट के एमडी पुनीत गोयनका ने तो यहाँ तक कह दिया था कि अच्छी कीमत मिली तो परिवार अपनी पूरी 42 परसेंट हिस्सेदारी बेच सकता है.

जिस दिन यह खबर आई थी उस दिन बाजार में यही चर्चा रही कि आखिर सुभाष चंद्रा अपने ग्रुप की सबसे कीमती कंपनी में आधी हिस्सेदारी क्यों बेच रहे हैं? दो दिनों में कम्पनी का मार्केट कैप बुरी तरह गिरा है लेकिन आपको यह मालूम होना चाहिए कि पिछले एक साल में मार्केट कैप 55,879 करोड़ रुपए से 13 हजार करोड़ रुपए घटकर 42,078 करोड़ रुपए ही रह गया है. अब यह और नीचे पुहंच गया है. इसलिए चंद्रा का अब यह कहना कि शेयर्स गिराने के पीछे कोई नकरात्मक शक्ति काम कर रही है बिल्कुल फालतू बात है.

जी समूह की कंपनियों पर म्यूचुअल फंड और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का करीब 12,000 करोड़ रुपये का कर्ज है. इसमें 7,000 करोड़ रुपये एमएफ कर्ज और 5,000 करोड़ रुपये NBFC का कर्ज है. आधारभूत क्षेत्र से जुड़ी देश की बड़ी बड़ी परियोजनाए IL&FS सन्कट के कारण बन्द होने की कगार पर हैं. इससे जुड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर कम्पनियां देर सवेर इसकी चपेट में आएंगी ही. जी ग्रुप का डूबना सिर्फ शुरुआत समझिए.

इंदौर के निवासी और आर्थिक मामलों के जानकार गिरीश मालवीय की एफबी वॉल से.


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