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उत्तर प्रदेश

जी न्यूज संवाददाता अरुण परिहार के खिलाफ एक्शन की मांग, फर्जी खबरों का है मामला, देखें सूचना निदेशक का पत्र

लखनऊ/फर्रुखाबाद। कथित भ्रामक और तथ्यहीन खबरों के प्रसारण से परेशान फर्रुखाबाद जिला प्रशासन ने मामला शासन तक पहुंचा दिया है। शासन स्तर पर की गई शिकायत के बाद उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने जी मीडिया प्रबंधन को पत्र भेजकर उसके संवाददाता अरुण परिहार के खिलाफ मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

20 मई 2026 को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक विशाल सिंह द्वारा जारी पत्र में जी न्यूज मीडिया के प्रबंधक को संबोधित करते हुए कहा गया है कि फर्रुखाबाद के जिलाधिकारी और जिला सूचना अधिकारी की ओर से भेजे गए पत्रों का संज्ञान लिया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जी न्यूज के संवाददाता अरुण परिहार ने 17 अप्रैल 2026 को “नारी शक्ति वंदन अभियान” के अंतर्गत कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता की तथ्यहीन और भ्रामक कवरेज प्रसारित की।

शिकायत के अनुसार संबंधित खबर से अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई, सामाजिक वातावरण प्रभावित हुआ तथा कानून-व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बनी। जिला प्रशासन ने इसे गंभीर मामला बताते हुए संवाददाता के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की थी।

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने अपने पत्र में जी मीडिया प्रबंधन से कहा है कि मामले की आवश्यक जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और की गई कार्रवाई से विभागीय मुख्यालय को भी अवगत कराया जाए।

पत्र की प्रति मंडलायुक्त कानपुर मंडल तथा फर्रुखाबाद के जिलाधिकारी को भी आवश्यक कार्रवाई और सूचना के लिए भेजी गई है।

अब निगाहें जी मीडिया प्रबंधन पर टिकी हैं कि वह अपने संवाददाता के खिलाफ लगे आरोपों की जांच कर क्या कदम उठाता है। यह मामला एक बार फिर पत्रकारिता में तथ्यपरकता, जवाबदेही और मीडिया संस्थानों की आंतरिक अनुशासन व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।

Official Hindi government letter on white paper with header, dated 20 May 2026, including recipient and signatory sections, about regulatory/compliance matter; contains paragraphs in Devanagari and a signature at the bottom.
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1 Comment

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  1. अरुण परिहार

    June 1, 2026 at 2:10 pm

    सेवा मे
    निदेशक,
    सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग,
    उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
    विषय – अति० जिला सूचना अधिकारी, फर्रुखाबाद द्वारा पत्रांक 17/नि०सू०का०-2026 दिनांक 17.04.2026 के माध्यम से लगाए गए निराधार एवं तथ्यहीन आरोपों के संदर्भ में।
    महोदय,
    उपरोक्त विषयक पत्र, जिसमें मेरे विरुद्ध यह आरोप लगाया गया है कि मैंने श्रीमती बबली पत्नी श्री अवधेश कुमार, निवासी तिवारी बघिया, फर्रुखाबाद को जानबूझकर कलेक्ट्रेट सभागार में व्यवधान उत्पन्न करने हेतु उकसाया — के संदर्भ में मैं सविनय निम्नलिखित तथ्य आपके समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक समझता हूं।
    1. घटना का वास्तविक क्रम
    दिनांक 17.04.2026 को मैं जी न्यूज के आमंत्रित संवाददाता के रूप में “नारी शक्ति वंदन अभियान” के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम की कवरेज हेतु कलेक्ट्रेट परिसर में उपस्थित था। इसी दौरान मैंने देखा कि एक महिला को कलेक्ट्रेट परिसर में ही एक महिला पुलिसकर्मी द्वारा पकड़कर रोका जा रहा था। वह महिला अधिकारियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही थी, किंतु उसे रोका जा रहा था।
    2. मेरी भूमिका – उकसाना नहीं, पत्रकारिता धर्म का पालन
    पत्रकार का प्राथमिक दायित्व है कि वह ऐसी स्थिति में तथ्य जाने। मैं महिला की स्थिति समझने के लिए उसकी ओर बढ़ा। जैसे ही पत्रकारों को आते देखा, महिला पुलिसकर्मी ने स्वयं पीड़िता का हाथ छोड़ दिया। इसके बाद पीड़िता ने मुझसे पूछा कि अधिकारी कहां मिलेंगे। मैंने केवल इतना बताया कि सामने सभागार में अधिकारी बैठे हैं।
    इसे “उकसाना” कहना न केवल तथ्यहीन है, बल्कि एक पत्रकार के विरुद्ध दुर्भावनापूर्ण आरोप है।
    3. पीड़िता की पृष्ठभूमि
    श्रीमती बबली मेरे लिए एक पीड़िता थीं, जो अपनी कॉलोनी में एक अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्ति की अवैध गतिविधियों के विरुद्ध कई बार आवाज उठा चुकी थीं। उन्होंने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी, किंतु कोई कार्यवाही नहीं हुई।
    वह महिला न्याय की मांग लेकर आई थीं, न कि किसी के उकसावे पर। न ही वह मुझे पहले से जानती थीं, और न ही मैं उनसे परिचित था।
    4. विरोधाभास जो स्वयं बोलता है
    जिस दिन “नारी शक्ति वंदन अभियान” के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण पर बैठक हो रही थी, उसी दिन एक पीड़ित महिला को कलेक्ट्रेट परिसर में महिला पुलिसकर्मी द्वारा शारीरिक रूप से रोका जा रहा था।
    यह घटना प्रशासनिक विफलता की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। इसे छुपाने के लिए एक पत्रकार को निशाना बनाना प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
    5. वीडियो साक्ष्य
    स्वयं अति० जिला सूचना अधिकारी ने अपने पत्र में वीडियो का उल्लेख किया है। मैं निवेदन करता हूं कि उस वीडियो को निष्पक्ष रूप से देखा जाए।
    वीडियो में स्पष्ट है कि मैंने महिला को किसी प्रकार से उकसाया नहीं, बल्कि एक सामान्य नागरिक की भांति उसे रास्ता बताया।
    6. प्रेस की स्वतंत्रता
    भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत प्रेस की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार है। एक पत्रकार का अपनी कवरेज के दौरान किसी पीड़ित को अधिकारियों तक रास्ता बताना न तो अपराध है और न ही उकसावा।
    इस प्रकार का निराधार एवं दुर्भावनापूर्ण आरोप पत्रकारिता पर दबाव बनाने का प्रयास है, जो अत्यंत गंभीर एवं आपत्तिजनक है।
    अनुरोध
    अतः महोदय से सविनय अनुरोध है कि —
    उक्त पत्र में लगाए गए आरोपों को तथ्यहीन मानते हुए निरस्त किया जाए।
    वीडियो साक्ष्य के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
    एक पत्रकार के विरुद्ध इस प्रकार के दुर्भावनापूर्ण आचरण के संबंध में संबंधित अधिकारी के विरुद्ध उचित कार्यवाही की जाए।
    यदि इस प्रकरण में न्याय नहीं मिलता है तो मैं प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया एवं अन्य सक्षम मंचों पर जाने के लिए बाध्य होऊंगा।
    भवदीय,
    अरुण प्रताप सिंह
    संवाददाता, जी न्यूज
    फर्रुखाबाद
    दिनांक: 18.04.2026

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