कपिल सिब्बल को तीन तलाक की वकालत करने की क्या जरूरत थी?

Nitin Thakur : कपिल सिब्बल ने तीन तलाक की पैरवी करते हुए कोर्ट में कहा कि ये चौदह सौ साल पुरानी परंपरा है इसलिए खत्म मत कीजिए.. इससे मुसलमानों की आस्था जुड़ी है. कसम से.. सिब्बल साहब ने कहीं सती प्रथा के मामले में जिरह की होती तो आस्था के नाम पर औरतें आज भी चिता में धकेली जा रही होतीं.

Satyendra PS : ये कांग्रेसी बहुत बड़े कुक्कुर हैं। तीन तलाक मसले पर कपिल सिब्बल को वकालत करने की क्या जरूरत थी? अगर पैसे कमाने के लिए ही कर रहा है तो उसे कांग्रेस में रहने की क्या जरूरत है? इससे पब्लिक में यह संदेश जा रहा है कि कांग्रेस 3 तलाक के समर्थन में खड़ी है! और अगर जान बूझकर मुस्लिमो को संतुष्ट करने के लिए कांग्रेसियों ने कपिल सिब्बल को खड़ा किया है तो इससे बड़ी बेहूदगी क्या हो सकती है? मुस्लिम महिलाएं तो कांग्रेस की इस हरकत से चिढेंगी ही, उदार मुस्लिम पुरुष और हिंदुओं को भी यह बुरा लगेगा। कट्टर हिन्दू तो इसे और मुद्दा बनाएंगे और मोदी घूम घूमकर कहेगा कि देखो भांई बन्हंनो, मेरी मुस्लिम बहनों के उत्पीड़न का कांग्रेसियों ने समर्थन किया। जो लोग राजनीति में हैं उनके सार्वजनिक जीवन की हरकतों पर भी नजर रखी जाती है।

पत्रकार द्वय नितिन ठाकुर और सत्येंद्र प्रताप सिंह की एफबी वॉल से.



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Comments on “कपिल सिब्बल को तीन तलाक की वकालत करने की क्या जरूरत थी?

  • शाजिया says:

    भारतीय कानून के अनुसार .पैरवी करने वाले वकील की कोर्ट में दी गयी दलील मुकदमे के पक्षधर का तर्क होता है लेकिन घटिया पत्रकार घटिया पोस्ट और पब्लिश करने वाला घटिया पोर्टल.वैसे जैन धर्म में नंगे धर्मगुरु के लिंग की पूजा करवाना क्या है ?

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