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आज के अखबार : तीसरे विश्वयुद्ध के बादल मंडराये, प्रधानमंत्री को मां के चूरमे की याद आई!

संजय कुमार सिंह

आज के अखबारों की खबरों में बताया गया है कि इस्राइल का ईरान पर जवाबी हमला किसी भी वक्त हो वक्त हो सकता है और यह तीसरे विश्वयुद्ध जैसा होगा। अमर उजाला ने शीर्षक में बताया है, इसमें तेल व गैस उत्पादन केंद्र निशाने पर होंगे। टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया है कि लेबनान में आठ सैनिकों की मौत हुई है और क्षेत्रीय युद्ध के खतरे बढ़ रहे हैं। फिर ही हिन्दी के मेरे दोनों अखबारों में पहले पन्ने की एक प्रमुख खबर है, …. चूरमा खाकर मां की याद आई। अमर उजाला में यह खबर चार कॉलम का बॉटम है पर नवोदय टाइम्स ने इसे लीड के साथ सिंगल कॉलम में छापा है। माजरा यह है कि ओलंपियन नीरज चोपड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी मां के हाथों से बना स्थानीय व्यंजन चूरमा खिलाया है तो प्रधानमंत्री ने नीरज की मां को धन्यवाद देते हुए एक लम्बा-चौड़ा भावुक पत्र भी लिखा है। आप चाहें तो मत मानिये कि इसका संबंध हरियाणा के चुनाव से हो सकता है।

अखबारों में तो नहीं है लेकिन सोशल मीडिया पर चर्चा है कि जलेबी फैक्ट्री में बनती है या नहीं। राहुल गांधी ने कहा है कि उन्होंने हरियाणा की जलेबी चखी उन्हें अच्छी लगी इसलिए इसे हिन्दुस्तान समेत पूरी दुनिया में जाना चाहिये। उनका मानना है कि अगर ये जलेबी देश और विदेश में जाएगी तो शायद इनकी दुकान फैक्ट्री में बदल जाए और हजारों लोगों को काम मिल जाए। मगर नरेंद्र मोदी ने छोटे दुकानदारों को चक्रव्यूह में फंसा रखा है, क्योंकि बैंक इन्हें लोन नहीं देगा, लेकिन अडानी और अंबानी को लोन दे देगा। हालात ऐसे है कि : आज हरियाणा में व्यापारियों, कारोबारियों से विदेशों से फोन कर फिरौती मांगी जा रही है और उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है। इसपर भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने लिखा है, आलू से सोना बनाने के बाद अब तेरा भाई फैक्ट्री में जलेबी बनाएगा। आपको बता दूं कि आईटी सेल ने इसे राहुल गांधी के सिर मढ़ दिया है जबकि राहुल गांधी के ऐतिहासिक संघर्ष से संबंधित दया शंकर मिश्र की किताब के अनुसार, राहुल गांधी बता रहे थे कि नरेन्द्र मोदी ने ऐसा कहा है। वीडियो को संपादित कर ऐसा बना दिया गया जैसे राहुल गांधी ही कह रहे हों। और उसे प्रचारित किया गया।

अब जब कारखाने में जलेबी बनाने की बात कही जा रही है तो जाहिर है, बड़े पैमाने पर जलेबी बनाकर देश भर में बेचने और निर्यात करने की बात होगी। लेकिन प्रचार किया जा रहा है कि जलेबी गर्म ही खाई जाती है डिब्बाबंद बिक ही नहीं सकती है आदि आदि। दूसरी ओर, कुछ लोग डिब्बाबंद जलेबी और इमरती के फोटो-वीडियो साझा कर रहे हैं। चुनाव प्रचार को इस स्तर पर लाने का श्रेय आप जिसे देना चाहें दीजिये पर खुशी मना सकते हैं कि अभी अखबारों में यह नहीं पहुंचा है। आपको बता दूं कि यह सब तब है जब प्रधानमंत्री झारखंड में थे और इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार वहां उन्होंने कहा है, झारखंड में हिन्दू, आदिवासी की संख्या कम हो रही है जबकि बांग्लादेशी घुसपैठियों की बढ़ रही है। आप जानते हैं कि केंद्र में पिछले 10 साल से ज्यादा से नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री हैं और शुरू में रघुवर दास के नेतृत्व में भाजपा की ही सरकार थी। रघुवर दास चुनाव हार गये तो उनको उड़ीशा का राज्यपाल बना दिया गया है और अब झारखंड में चुनाव की घोषणा होनी है तो प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या बढ़ी है। 

कहने की जरूरत नहीं है कि सीमा से अवैध घुसपैठ नहीं होनी चाहिये और अगर होती है तो रोकी जानी चाहिये। इसमें हिन्दू-मुसलमान का भेद भी नहीं होना चाहिये और मुख्य रूप से यह काम केंद्र सरकार का ही है। अगर घुसपैठ हो रही है तो कोई कारण नहीं है कि हिन्दुओं की नहीं होगी और मुसलमानों की होगी। खासकर तब जब प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि आग लगाने वालों की पहचान कपड़ों से हो जाती है। दूसरी ओर नए बने कानून के बाद हिन्दुओं को घुसपैठ करने की जरूरत ही नहीं है। ऐसे में अगर घुसपैठ हो रही है तो जिम्मेदार केंद्र सरकार है। फिर भी प्रधानमंत्री ने आदिवासी आबादी को कम करके अल्पसंख्य बनाने की कोशिश का आरोप लगाया है और कहा है कि संघर्ष राज्य की रोटी, बेटी, माटी की रक्षा का है। देश के बाकी हिस्सों में बेटियों की रक्षा के लिए भाजपा सरकार जो कर रही है वह सबको पता है उसके बावजूद उनका यह दावा है।

इंडियन एक्सप्रेस में आज चार कॉलम में छपी खबर के अनुसार, कोलकाता के आरजी कर अस्पताल के मामले ने मुधमक्खियों  के छत्ते को छेड़ दिया है और बंगाल के कई प्रमुख मेडिकल कॉलेजों से शिकायतें आ रही हैं। आप जानते हैं कि मामला अस्पताल में रात की ड्यूटी पर तैनात के महिला डॉक्टर से बलात्कार और हत्या का था। कोलकाता पुलिस ने इस मामले में पहले ही दिन आवश्यक सबूत जुटाकर अपराधी को पकड़ लिया था बाद की जांच से सबूतों का मिलान भी हो गय़ा था और आरोपी कोलकाता पुलिस से संबद्ध स्वयंसेवी था। फिर भी मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई और वह अस्पताल में भ्रष्टाचार के मामले की भी जांच कर रही है। आज की खबर बलात्कार और हत्या की जांच के क्रम में है। आपको इसका संबंध उससे नजर आये या नहीं। आप जानते हैं कि नरेन्द्र मोदी भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर ही सत्ता में आये थे और इलेक्टोरल बांड जैसा भ्रष्टाचार ले आये और किया। उसी का नतीजा है कि आज दिल्ली में 562 किलो कोकीन या 5620 करोड़ रुपये की नशीली चीजें पकड़ी गई हैं। इससे पहले भी बड़ी मात्रा में नशीली चीजें पकड़ी गई हैं लेकिन हंगामा व्यक्ति विशेष के पास थोड़ी मात्रा में नशा पकड़े जाने पर ज्यादा हुआ है।

उदाहरण के लिए 16 सितंबर 2021 को डीआरआई और सीमा शुल्क के एक संयुक्त अभियान में अफगानिस्तान से आए दो कंटेनरों से भारी मात्रा में प्रतिबंधित हेरोइन पकड़ी गई थी। सरकार ने क्या कार्रवाई की या क्यों नहीं की ये तो पता नहीं चला पर अदाणी समूह ने जरूर अपनी सफाई पेश की। पांच दिन बाद जारी बयान में कहा गया था। हम अवैध ड्रग्स को जब्त करने और आरोपियों को पकड़ने के लिए डीआरआई तथा सीमा शुल्क विभाग की टीमों को धन्यवाद देते हैं और बधाई देते हैं। कानून भारत सरकार के सीमा शुल्क और डीआरआई के सक्षम अधिकारियों को गैरकानूनी कार्गो को खोलने, जांच करने और जब्त करने का अधिकार देता है। देश भर में कोई भी पोर्ट ऑपरेटर कंटेनर की जांच नहीं कर सकता है। उसकी भूमिका बंदरगाह चलाने तक सीमित है। मुझे लगता है कि यह बताने वाली बात नहीं है और सबको इतनी समझ है लेकिन जो चीज समझ में नहीं आ रही है वह यह कि निजी उपयोग के लिए कुछ ग्राम नशा बरामद होने के आरोप या बिना पर किसी को कई दिन जेल में रखने वाला सिस्टम इस मामले में क्या करता है। आपको फिल्म अभिनेता शाहरुख खान का बेटा और अभिनेत्री रिया चटर्जी का मामला और मीडिया में उसकी चर्चा याद होगी। लाक टके का सवाल है कि भ्रष्टाचार मुक्त देश में नशे की इतनी बड़ी खेप दिल्ली तक पहुंच कैसे गई?

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