वाराणसी | एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने वाराणसी के रानीघाट (रानी कोठी के पास) में गंगा नदी के तट पर अवैध तरीके से बनाए जा रहे अवैध होटल निर्माण को फौरन रोकने और ध्वस्त कर देने का आदेश जारी किया है. मामले में एनजीटी ने पर्यावरणीय सुरक्षा और कानूनों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई की है.
बता दें कि इस मामले को सबसे पहले भड़ास ने ही ब्रेक किया था- जिसमें बताया गया था कि यह होटल दैनिक जागरण के हल्द्वानी संस्करण के संपादक राघवेंद्र चड्ढा द्वारा बनाया जा रहा था.
मामले में सीनियर एडवोकेट आशीष कुमार पाठक द्वारा याचिका लगाई गई थी. जिसमें बताया गया था कि यह निर्माण मरम्मत के नाम पर एक नया होटल बनाया जा रहा है, जो गंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र में है और पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन करता है.
एनजीटी की प्रधान पीठ में इसकी सुनवाई की गई, जिनमें माननीय न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (चेयरपर्सन), न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल, न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेष सदस्य डॉ अफरोज अहमद शामिल थे.
संपादक राघवेंद्र चड्ढा पर आरोप है कि उन्होंने गंगा के तट पर स्थित इस स्थान पर मरम्मत के नाम पर नए होटल का निर्माण शुरू किया था. वहीं, याचिका में दावा किया गया कि यह कार्य गंगा तट की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचा सकता है और बाढ़ क्षेत्र के संरक्षण नियमों का उल्लंघन करता है.
NGT ने अपने आदेश में कहा है कि गंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र में किसी भी तरह का नया निर्माण गैर-कानूनी है और यह क्षेत्र पूरी तरह से संरक्षित होना चाहिए. ट्रिब्यूनल ने वाराणसी विकास प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि गंगा तट की पारिस्थितिकी को बनाए रखने के लिए तत्काल कार्रवाई करें और इस अवैध निर्माण को ध्वस्त करें.
ट्रिब्यूनल ने आवेदक आशीष पाठक की सराहना करते हुए कहा कि इस मुद्दे को उठाकर उन्होंने एक महत्वपूर्ण कार्य किया है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गंगा की तलहटी में किसी भी तरह का निर्माण कार्य पर्यावरण और समाज के लिए नुकसानदायक है.
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