शीतल पी सिंह-
दिल्ली विधानसभा चुनावों के परिणामों के अनुसार कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं के घमंड भरे व्यवहार और अफलातूनी बयानों के कारण अलग अलग-अलग लड़ने के नतीजे में दिल्ली बीजेपी के हाथ चली गई । यदि ये दोनों आपसी समझौते में चुनाव लड़ते तो निम्न तेरह सीटें इनके खाते में होतीं और चुनाव का टेंपो ही अलग होता!
दोनों पार्टियों को क़रीब पचास प्रतिशत वोट मिले हैं और बीजेपी को 46 प्रतिशत!
- राजेंद्र नगर: कांग्रेस को 4015 वोट मिले, जबकि आम आदमी पार्टी के दुर्गेश पाठक 1231 वोटों से हार गए।
- जंगपुरा: मनीष सिसोदिया 675 वोटों से हार गए, जबकि कांग्रेस को 7350 वोट मिले।
- कस्तूरबा नगर: भाजपा को 38067 वोट मिले, कांग्रेस को 27019 वोट मिले और आम आदमी पार्टी को 18617 वोट मिले।
- संगम विहार: भाजपा ने 344 वोटों से जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को 15863 वोट मिले।
- *छतरपुर *: भाजपा ने 6239 वोटों से जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को 6601 वोट मिले।
- तिमारपुर: भाजपा ने 1024 वोटों से जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को 8313 वोट मिले।
- *बादली *: आम आदमी पार्टी 15163 वोटों से हार गई, जबकि कांग्रेस को 41071 वोट मिले।
- मादीपुर: राखी बिड़लान 10899 वोटों से हार गईं, जबकि कांग्रेस को 17958 वोट मिले।
- मालवीय नगर: आम आदमी पार्टी 2131 वोटों से हार गई, जबकि कांग्रेस को 6770 वोट मिले।
- त्रिलोकपुरी: भाजपा ने 392 वोटों से जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को 6147 वोट मिले।
- ग्रेटर कैलाश: आम आदमी पार्टी 3188 वोटों से हार गई, जबकि कांग्रेस को 6711 वोट मिले।
- महरौली: भाजपा ने 1782 वोटों से जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को 9338 वोट मिले।
- नई दिल्ली सीट: अरविंद केजरीवाल 4089 वोटों से हार गए, जबकि संदीप दीक्षित को 4568 वोट मिले।
मिलिंद खांडेकर-
12 सीटों पर आप की हार का कारण बनीं कांग्रेस. बीजेपी की जीत का अंतर कांग्रेस के वोटों से कम है.

नरेंद्र नाथ मिश्रा-
आप और बीजेपी के बीच वोट का अंतर मात्र 2 परसेंट। कांग्रेस को लगभग 7 फीसदी वोट।
डेढ़ दर्जन से अधिक आप उम्मीदवार के हार का अंतर कांग्रेस को मिले वोट से कम।
दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और आप ने सबसे पहले कांग्रेस से गठबंधन तोड़ने का एलान किया था

यही साइकिल है ।
महज़ 13 साल पहले अरविंद केजरीवाल ने राजनीतिक दल बनाकर भारतीय राजनीति में एकदम नायक की तरह एंटर हुए । किसी फिल्मी कहानी सा सफ़र रहा । राष्ट्रीय दल तक का सफ़र महज मिनटों में तय कर लिया । राष्ट्रीय विकल्प बन गए ।
और आज ख़ुद अपने तमाम लोगों के साथ अपना भी चुनाव हार गए ।
यही फलसफा है-जो चढ़ता है वह गिरता भी है । जो गिरता है वह चढ़ता भी है । इनके बीच जब आप शीर्ष पर होते हैं और जब गर्त में जाते हैं तब आप ख़ुद को किस तरह बांध कर संयम बनाकर रखते हैं यही किसी की वापसी,पतन या उदय को तय करती है
जिस आम आदमी पार्टी ने आज तक विपक्ष में रहना नहीं सीखा/देखा हो, पार्टी बनने के बाद शुरू से सत्ता में ही रही हो,उनके लिए यहाँ से आगे किस तरह राजनीति जाएगी वह बहुत ही दिलचस्प होगा । कितने वर्कर/नेता टिकेंगे? विपक्ष की राह बहुत कठिन होती है । संघर्ष का रास्ता होता है । देश की तमाम राजनीतिक दल इस कठिन दौर से निकली है ।
अब केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को इस रास्ते से निकलना होगा। और केजरीवाल को ख़ुद में भी बहुत बदलाव लाना होगा ।
लेखराज गुर्जर-
कांग्रेस जिन 15 सीटों पर 15% वोट ला रही है, वहां AAP हार रही है कुछ सीटों पर कांग्रेस 20% से ज्यादा वोट ला रही है!
हरियाणा और गुजरात में AAP ने कांग्रेस के साथ जो किया वही दिल्ली में कांग्रेस ने AAP के साथ कर दिया!
नंदलाल शर्मा-
दिल्ली चुनाव से पहले ही कहा था कांग्रेस जीते या ना जीते, कई सीटों पर AAP की हार का कारण बनेगी…
संगम विहार – BJP 344 वोट से जीती – कांग्रेस को 15863 वोट मिले
राजिंदरनगर- BJP 1231 वोट से जीती- 4015 वोट CONG पाई
त्रिलोकपुरी – BJP 392 वोट से जीती – कांग्रेस को 6147 वोट मिले
बादली – BJP 6589 वोट से जीती – कांग्रेस को 26359 वोट मिले
मालवीयनगर – BJP 2031 वोट से आगे – कांग्रेस को 6770 वोट मिले
जंगपुरा – BJP 675 वोट से जीती – कांग्रेस को 7350 वोट मिले
नई दिल्ली – BJP 4049 वोट से जीती – कांग्रेस को 4541 वोट मिले
उख- BJP 3039 वोट से जीती- कांग्रेस को 6677 वोट मिले
तिमारपुर – BJP 316 वोट से आगे – कांग्रेस को 5754 वोट मिले
नांगलोई- BJP 26251 वोट से आगे- कांग्रेस को 32028 वोट
कांग्रेस ने AAP को जमीन पर ला पटका, दिल्ली कांग्रेस चार कदम आगे बढ़ चुकी है। 70 सीटों पर उसे कुछ न कुछ वोट मिला है – यहां से पार्टी को आगे बढ़ना होगा। विपक्ष की राजनीति का पूरा मैदान खुला है।
निसार सिद्दीकी-
केजरीवाल को उनका अहंकार ले डूबा। अगर केजरीवाल INDIA गठबंधन के तहत कांग्रेस के साथ लड़े होते तो 10–12 सीटों पर नतीजे कुछ और हो सकते थे। तिमारपुर, राजेंद्र नगर, नई दिल्ली, जंगपुरा, मालवीय नगर, महरौली, संगम बिहार, ग्रेटर कैलाश और त्रिलोकपुर जैसी सीटों पर आम आदमी पार्टी जितने वोटों से हारी है, यहां कांग्रेस को उससे ज़्यादा वोट मिले हैं।
केजरीवाल और इंडिया गठबंधन के दूसरे दलों को ये सोचना होगा कि कांग्रेस खत्म पार्टी नहीं है। गिरी से गिरी हालत में भी हर विधानसभा में कांग्रेस के 5 हजार से ज्यादा वोट होते ही हैं। दिल्ली के नतीजों से सीख अखिलेश यादव को भी लेनी होगी, क्योंकि कांग्रेस को दरकिनार कर यूपी में उनकी जीत आसान नहीं है।


