अजीत शाही-
दिल्ली के चुनाव भूल जाइए. चुनाव वग़ैरह का अब कोई मायने नहीं रह गया है. असली ख़बर इन दो तस्वीरों में है.


शेयर बाज़ार खुले अभी दो घंटा नहीं हुआ है और बीएसई — बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज — का सूचकांक 750 प्वाइंट गिर चुका है.
कल ये 1100 प्वाइंट गिरा था.
पिछले छह दिनों में ये सूचकांक तीन हज़ार प्वाइंट गिरा है.
इन छह दिनों में बाज़ार से ढाई सौ बिलियन अमेरिकी डॉलर हवा हो गए हैं.
दूसरी तस्वीर देखिए.
कल भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले करीब 88 रुपये पहुँच गया था. आज 86.61 पर है.
कैसे?
अमेरिकी समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ भारतीय रिज़र्व बैंक ने सिर्फ़ एक दिन में, सोमवार को, 4 बिलियन डॉलर बेच कर भारतीय रुपया ख़रीदा है जिससे कि उसकी क़ीमत और न गिरे.
एक दिन में चार बिलियन डॉलर बेच डाले!
ये चार बिलियन डॉलर पानी में फेंकने के बराबर है क्योंकि रुपये जिस दाम पर ख़रीदें हैं ज़ाहिर है उनकी असल वैल्यू उससे बहुत कम है.
और फिर कब तक डॉलर बेच कर रुपया ख़रीदेंगे?
एक महीना? छह महीने?
जिस दिन डॉलर बेचना बंद उस दिन रुपया सौ पहुँच जाएगा.
नौकरी है नहीं. उद्योग ठप है. दुकानदार त्राहि त्राहि कर रहा है. किसान आत्महत्या कर रहा है. शेयर बाज़ार ध्वस्त हो रहा है. रुपया फ़ेल हो चुका है.
और मोदी अडानी की गर्दन बचाने अमेरिका गए हैं.

रवीश कुमार-
पांच दिन के भीतर बाज़ार में निवेशकों के 16 लाख करोड़ से अधिक डूब गए। 12 फ़रवरी को भी बाज़ार में निवेशकों के पैसे का डूबना जारी रहा हालाँकि इसमें मामूली सुधार हुआ है। सवाल है कि क्या मिडिल क्लास का सपना अब भी इस बाज़ार में सुरक्षित है? क्या आपको लगता है कि इस बाज़ार से जो उम्मीद आपने की थी, वह पूरी हो पाएगी या फिर यहां भी आपका इंतज़ार लंबा हो जाएगा? एक और सवाल भी है। क्या विदेशी निवेशक इतना पैसा इसलिए निकाल रहे हैं क्योंकि दुनिया में भारत की ग्रोथ स्टोरी ख़तरे में पड़ गई है? जानने के लिए देखिए हमारा एपिसोड।
हिंदी में कम लोग हैं जो बाज़ार को गहराई से समझते हैं। उत्पल के वीडियो से काफ़ी कुछ पता चल जाता है। अभी तो हम जैसे दर्शकों के लिए बुनियादी जानकारी ही काफ़ी है। एक बार सिरा पकड़ में आने लग जाए तो उसके आधार पर बाज़ार समझ में आने लगेगा।


