रायबरेली। यूपी के रायबरेली से एक ऑडियो वायरल हुआ है। गालीगलौज से भरा यह ऑडियो जनपद के एक पत्रकार का बताया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद विवादों में घिरता दिख रहा है।
दावा किया जा रहा है कि यह वायरल ऑडियो रायबरेली में PTI (प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया) के पत्रकार अखिल श्रीवास्तव से जुड़ा है। ऑडियो में पत्रकार खुद को “राजा भैया” बताते हुए न सिर्फ अधिकारियों के तबादले को लेकर दावे करते सुने जा रहे हैं, बल्कि प्रदेश के वरिष्ठ मंत्रियों और डिप्टी तक को अपशब्द कह रहे हैं।
वायरल ऑडियो में कथित तौर पर मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, मयंकेश्वर शरण सिंह और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की कार्यशैली पर न केवल सवाल उठाए गये हैं, बल्कि सीएमएस प्रदीप अग्रवाल को हटाने की ‘औकात’ तक न होने की बात सुनाई दे रही है।
ऑडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई कि क्या बड़े मीडिया संस्थानों की माइक आईडी होने से कोई भी पत्रकार सत्ता से ऊपर हो जाता है? आम लोग पूछ रहे हैं कि क्या पत्रकारों को नेताओं को गाली देने का खुला लाइसेंस मिल गया है? और यदि नहीं, तो अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
हालांकि इस प्रकरण पर भड़ास की तरफ से पीटीआई के पत्रकार अखिल श्रीवास्तव का पक्ष भी लिया गया है।
मामला तूल पकड़ता देख पत्रकार अखिल श्रीवास्तव सामने आए और उन्होंने खुद को इस ऑडियो से पूरी तरह अलग बताया। उन्होंने कहा-
“इस वायरल ऑडियो से मेरा कोई नाता नहीं है। मेरे लिए हर समाज—चाहे वह क्षत्रिय हो, ब्राह्मण हो या कायस्थ—सम्मानित है। मैं हमेशा सबका सम्मान करता आया हूं। आज के AI युग में किसी की छवि को धूमिल करना बहुत आसान हो गया है। यह ऑडियो षड्यंत्र के तहत AI तकनीक से जनरेट कर वायरल किया गया है ताकि मेरी स्वच्छ और कर्मठ पत्रकार की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।”
उन्होंने आगे कहा कि इस मामले में उन्होंने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस जांच कर रही है। इसके बावजूद यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से क्षमा भी मांगी है।
बहरहाल, इस घटना ने पत्रकारिता की भूमिका, उसकी सीमाएं और नैतिकता को लेकर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है। अब देखना यह होगा कि पुलिस जांच क्या निष्कर्ष निकालती है और क्या भाजपा नेतृत्व इस मामले में चुप्पी तोड़ता है या नहीं।
देखें पत्रकार द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर, उसके बाद ऑडियो सुनें…





