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जस्टिस वर्मा को कुर्सी छोड़नी चाहिए: अभिषेक मनु सिंघवी ने उठाई आवाज

नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने आज एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक The Times of India में प्रकाशित अपने लेख में जस्टिस यशवंत वर्मा से उच्च न्यायालय की न्यायिक पीठ से स्वेच्छा से इस्तीफा देने की पुरज़ोर अपील की है। उन्होंने लिखा कि इस प्रकार का पहला ऐतिहासिक घटनाक्रम—किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को संसद द्वारा हटाया जाना—भारत की न्यायिक व्यवस्था की गरिमा को ठेस पहुंचा सकता है।

सिंघवी ने लिखा:

“His fate is in Parliament’s hands now, and the odds are stacked against him… stepping down would be a dignified act, sparing Parliament the vote, debate, and political crossfire.”

लेख में उन्होंने कहा कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ गंभीर आरोपों की पृष्ठभूमि में अगर वे स्वयं पद से त्यागपत्र दे दें, तो यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता, गरिमा और संस्थागत सम्मान को बचाने वाला कदम होगा। सिंघवी ने स्पष्ट किया कि यदि संसद को उन्हें हटाना पड़ा, तो यह संविधान और न्यायपालिका दोनों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण बन जाएगा।

लेख की प्रमुख बातें:

  • जस्टिस वर्मा पर अनियमित वित्तीय मामलों और आचरण से जुड़े गंभीर आरोप लगे हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की, और न्यायपालिका के भीतर विश्वास की रक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।
  • सिंघवी ने लिखा कि अगर न्यायपालिका पर विश्वास बचाना है, तो “स्वेच्छा से पद त्याग” न्याय का सबसे श्रेष्ठ रूप है।

लेख में यह भी कहा गया है कि इस पूरे विवाद को राजनीतिक बनाना, संसदीय बहस और वोटिंग तक ले जाना न्यायपालिका को सार्वजनिक बहस का मंच बना दे।

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