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उत्तर प्रदेश

पत्रकार घनश्याम पाठक ने फर्जी मुकदमों की वायरल सूची का किया खंडन

विनय मौर्या-

वाराणसी/लखनऊ: वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक परफेक्ट मिशन के कार्यकारी संपादक घनश्याम पाठक ने सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ वायरल हो रही फर्जी मुकदमों की सूची को सिरे से खारिज किया है। पाठक का कहना है कि यह एक सोची-समझी साजिश है, जिसके ज़रिए उन्हें पेशेवर अपराधी की छवि देकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

पाठक पत्रकार प्रेस क्लब उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं और लंबे समय से सत्ता, प्रशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। उनके अनुसार, यह पूरा षड्यंत्र एक विवादित पत्रकार से जुड़ी खबर को दबाने और करोड़ों रुपये की संपत्ति को हड़पने की मंशा से रचा गया है।

फर्जी नाम से जोड़े गए मुकदमे

पाठक ने स्पष्ट किया कि जिन मुकदमों का हवाला देकर उन्हें बदनाम किया जा रहा है, वे सभी मुकदमे उनके नाम से नहीं, बल्कि एक अन्य व्यक्ति घनश्याम पाठक पुत्र स्व. राम लखन पाठक निवासी बसवरिया, थाना जंसा, वाराणसी के नाम से जुड़े हैं।

उन्होंने बताया कि वायरल की गई सूची में जिन धाराओं का उल्लेख है, उनका उनसे कोई संबंध नहीं है। उदाहरण के तौर पर:

  • मुकदमा संख्या 0022/93, धारा 395, थाना चौरी – उनका नाम नहीं
  • मुकदमा संख्या 0057/94, धारा 457/380, थाना जंसा – असंबंधित
  • मुकदमा संख्या 0130/99, धारा 4/25 आर्म्स एक्ट – फर्जी तरीके से जोड़ा गया
  • मुकदमा संख्या 0131/99 और 002/2001 (NDPS एक्ट) – कोई संबंध नहीं
  • मुकदमा संख्या 286/2007 (498A, 304B आदि) – ऐसा कोई पारिवारिक विवाद ही नहीं हुआ

25 साल पुराने विवाद का हवाला देकर भ्रम फैलाने की कोशिश

पत्रकार घनश्याम पाठक ने यह भी बताया कि जिन पुराने मामलों का जिक्र हो रहा है, वे 25 साल पुराने पत्रकारों के आपसी विवाद से जुड़े हैं, जो अब समाप्त हो चुके हैं। उस समय उनके खिलाफ 9 और प्रतिद्वंद्वी पत्रकार के खिलाफ 24 मुकदमे दर्ज हुए थे, जो बाद में आपसी समझौते से निपट गए।

प्रेस क्लब अध्यक्ष होने के कारण हो रहा है निशाना

पाठक ने आरोप लगाया कि एक दैनिक अखबार से जुड़े पत्रकार के विवादित मामले की रिपोर्टिंग के चलते उनके ऊपर प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है कि वे खबर का खंडन करें और सोशल मीडिया से सभी पोस्ट हटाएं।

“मुझे पेश किया जा रहा है जैसे मैं कोई अपराधी हूं”

घनश्याम पाठक ने कहा, “साजिशन मुझे पेश किया जा रहा है जैसे मैं कोई पेशेवर अपराधी हूं, जबकि सच्चाई यह है कि मैंने हमेशा पत्रकारिता को मिशन की तरह जिया है। सत्ता और अपराध के गठजोड़ को उजागर करना मेरा कर्तव्य है, और इसी कारण मैं निशाने पर हूं।”

“सच की लड़ाई जारी रहेगी”

उन्होंने दो टूक कहा कि “मैं इस दुष्प्रचार से डरने या झुकने वाला नहीं हूं। जो झूठ फैलाया गया है, उसका जवाब कानून के दायरे में दिया जाएगा। साजिशकर्ताओं को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। पत्रकारों के हक की लड़ाई में मेरी कलम हमेशा चलती रहेगी।”

पाठक ने यह भी जोड़ा कि सच्ची पत्रकारिता मुकदमों से नहीं डरती, बल्कि मुकदमे ही सच्ची पत्रकारिता का तमगा हैं।

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