संजय कुमार सिंह
बिहार चुनाव की खबर जब महत्वपूर्ण हो ही गई थी तो नतीजों के बाद कोई भी जानना चाहेगा कि सरकार किसकी बन रही है? भाजपा की प्रचंड जीत तो हो गई। प्रचार भी हो गया। आलोचना-प्रशंसा भी होती रही। अब आज, अमर उजाला की बैनर खबर के अनुसार बिहार में नीतिश दसवीं बार शपथ लेंगे और पुराने फॉर्मूले पर ही मंत्री बनेंगे। निश्चित रूप से यह बड़ी खबर है और असली खबर यही है कि भाजपा (असल में गुजराती जोड़ी) नीतिश कुमार को शिन्दे नहीं बना पाई। पलटू चच्चा पूरी बेइज्जती शह कर भी इस बार पल्टी नहीं मार पाए। मुझे लगता है कि यह भी सामान्य बात नहीं है। जो स्थितियां थीं उनमें भाजपा के लिए बिहार जीतना मजबूरी थी और बिहार जीतकर नीतिश को कमजोर करना दूसरी बड़ी मजबूरी थी। वरना समय पर पल्टी मारकर सहयोग करने वाले को कोई ऐसे समय में नाराज क्यों करता। पर किया गया। नीतिश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भाजपा ने नहीं से नहीं घोषित किया। नीतिश ने खुद को अगला मुख्यमंत्री जरूर घोषित किया और यह गुजराती जोड़ी की रणनीति भी हो सकती है। फिर भी प्रचंड जीत के बावजूद नीतिश कुमार 10वीं बार शपथ लेंगे – भाजपा या गुजराती जोड़ी की हार के बारे में बहुत कुछ कहता है वरना आज इसे पहले पन्ने पर नहीं होने का और क्या कारण हो सकता है?
इसके अलावा, आज जो खबरें हैं उनमें लाल किला धमाके के आत्मघाती हमलावर का सहयोगी गिरफ्तार लालू की तीन अन्य बेटियों ने घर छोड़ा, सोनभद्र में खान धंसने से तीन मरे, कई फंसे (द हिन्दू) 2030 में चिराग पासवान बिहार में ‘सीधी’ भूमिका में होंगे (द टेलीग्राफ) और नरेन्द्र मोदी आज शाम छठा रामनाथ गोयनका व्याख्यान देंगे (इंडियन एक्सप्रेस)। इसमें सबसे बड़ी खबर यही है कि एक्सप्रेस समूह के संस्थापक के नाम पर आयोजित इस व्याख्यान में ऐसे वक्ताओं को आमंत्रित किया गया है जिन्होंने बदलाव को आकार दिया है और समकालीन चुनौतियों तथा मुद्दों पर आलोचनात्मक चिंतन को प्रेरित किया है। ऐसे में यह दिलचसप है कि नरेन्द्र मोदी को इस विषय पर बोलने के लिए आमंत्रित किया गया है। नरेन्द्र मोदी जो बोलेंगे, जब बोलेंगे पर अभी एक्सप्रेस समूह के अध्यक्ष विवेक गोयनका ने कहा है, “यह व्याख्यान कोई समारोह नहीं, बल्कि सत्य-कथन, जवाबदेही और विचारों की शक्ति के मूल्यों के प्रति कटिबद्धता है।” उन्होंने आगे कहा, “यह एक ऐसा समय है जब दुनिया के शक्ति समीकरण उलट-पुलट हो रहे हैं, जब राष्ट्र अपने स्थान और उद्देश्य, दोनों को पुनर्परिभाषित कर रहे हैं और जब अनिश्चितता और अस्थिरता हमारे समय के प्रमुख शब्द हैं। इसलिए, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सर्वोच्च निर्वाचित पद का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रधानमंत्री को सुनना एक गहरी गूंज पैदा करता है।” गोयनका ने कहा कि रामनाथ गोयनका के नाम पर प्रधानमंत्री का भाषण “इस बात की पुष्टि है कि राज्य और स्वतंत्र प्रेस के बीच संवाद एक आत्मविश्वासी राष्ट्र की धड़कन है।” कहने की जरूरत नहीं है कि यह मन की बात करने वाले प्रधानमंत्री के व्याख्यान को आत्मविश्वासी राष्ट्र संवाद के रूप में स्थापित करने की कोशिश है और इसीलिए मैंने कहा कि यही सबसे बड़ी खबर है। आज की इन खबरों का क्रम बताता है कि देश अभी वैसे ही चलेगा। अभी कुछ बदलने की उम्मीद नहीं है और यह आज की दूसरी खबरों से स्पष्ट है।
सबसे पहले तो भाजपा जीत गई लेकिन मुख्यमंत्री अपना नहीं बना पा रही है। जीते नीतिश भी, सीटें भी लगभग बराबर हैं लेकिन अपमानित करने वालों के साथ ही रहने को मजबूर है। मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया जाना और फिर मुख्यमंत्री बनाने के लिए तैयार या मजबूर होना कम अपमानजनक नहीं है लेकिन कुर्सी भी तो कोई चीज है। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने के लिए जो सब किया है उसमें नीतिश (और अन्य क्षेत्रीय दलों को भी) भाजपा से अलग हो जाना चाहिए था। जाहिर है भाजपा तब मुसीबत में फंसेगी। और ऐसे क्षेत्रीय दल अगर केंद्र की बैसाखी खींचने की ताकित दिखाएं तो राजनीति में जोश आ सकता है। नीतिश के अपमान के बाद मुझे इसकी उम्मीद थी पर ऐसा नहीं हुआ और जाहिर है नीतिश को अपनी वास्तविक ताकत या मजबूरी मालूम होगी। मैं तो सिर्फ छपी हुई खबरों के आधार पर अपने विचार रख रहा हूं। मेरा मानना है कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की राजनीति के साथ पत्रकारिता का भी बुरा हाल है जिसका पता खबरों से लगता रहता है। उदाहरण के लिए वंशवाद पर प्रधानमंत्री का हमला सर्वविदित है। आज देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, नई सरकार के गठन को हलचल तेज। नवोदय टाइम्स की लीड है, एनाईए ने उमर के साथी आमिर को किया गिरफ्तार। यहां बिहार चुनाव पर कोई खबर पहले पन्ने पर नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने लालू परिवार के आंतरिक कलह को लीड बनाया है। इसके ठीक नीचे खबर है, नीतिश वीरवार को शपथ लेंगे कम से कम एक दिन के मुख्यमंत्री जरूर होंगे, भाजपा को 16 मंत्रीपद मिल सकते हैं।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


