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आज के अखबार (दो) : आरएसएस से जुड़े संगठन ने BLO की मौत के लिए एक करोड़ का मुआवजा मांगा

एसआईआर और बीएलओ की मौत से संबंधित खबरों में एक खबर यह भी है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन ने एसआईआर के काम में लगे बीएलओ की मौत का मुद्दा उठाया है और एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है। जनसत्ता डॉट कॉम की खबर के अनुसार, आरएसएस से जुड़े संगठन अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) ने भी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई है। एबीआरएसएम ने कहा है कि एसआईआर की समय सीमा बढ़ाई जाए और इस प्रक्रिया के दौरान जिन लोगों की जान गई है, उनके परिवारों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए। एबीआरएसएम ने कहा है कि बीएलओ के रूप में काम कर रहे टीचर्स को दबाव और धमकी का सामना करना पड़ रहा है। एबीआरएसएम की स्थापना 1988 में की गई थी और इसका दावा है कि देशभर में 13.5 लाख टीचर इस संगठन से जुड़े हुए हैं।   

मैंने चैट जीपीटी से सवाल किया था, “एसआईआर के कारण देश भर में बीएलओ की मौत या आत्महत्या के कुल कितने मामले हैं। क्या इनमें से किसी में एफआईआर दर्ज हुई है”। जवाब मिला – एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईआर के दौरान “15+ मौतें (हत्या, आत्महत्या, हार्ट अटैक आदि)” सामने आई हैं। कुछ अन्य रिपोर्ट कहती हैं कि सात–आठ राज्यों से अब तक लगभग “20 बीएलओ के मरने” की सूचना है। एक लेख कहता है कि शुरआती तीन हफ्तों में “लगभग 16 बीएलओ” की मौत हुई है। कई राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, केरल, पश्चिम बंगाल — में हार्ट अटैक, मानसिक तनाव, आत्महत्या आदि कारण बताए गए हैं। राज्यों के हिसाब से मामलों की संख्या भी बदली-बदली मिल रही है: उदाहरण के लिए, एक रिपोर्ट कहती है कि मध्य प्रदेश में चार बीएलओ की मौत हुई है। “कुल कितने मरे” से संबंधित आंकड़ा स्पष्ट नहीं है (कम-से-कम सार्वजनिक तौर पर)। सार्वजनिक मीडिया रिपोर्ट्स में “15+”, “≈20”, “≈16” — इन सब तरह का दावा देखने को मिल रहा है। लेकिन किसी भरोसेमंद, स्वतंत्र, केंद्रीयकृत स्रोत — जैसे कि सरकार या चुनाव आयोग द्वारा ऐसा कोई संकलित आँकड़ा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ दिख रहा है, जो पूरे भारत भर में एसआईआर से संबंधित बीएलओ की मौतों का कुल आंकड़ा दे। कुछ मामलों में एफआईआर (या “अनिश्चित मृत्यु / आत्महत्या / अस्वाभाविक मौत” दर्ज) होने की खबर है। उदाहरण के लिए केरल में, एक बीएलओ की आत्महत्या के बाद एफआईआर दर्ज की गई है। वैसे सभी मामलों में ऐसा नहीं है। कई मौतों को “हार्ट अटैक / बीमारी / दिक्कत” बताया गया है, जहाँ काम के दबाव को कारण माना जा रहा है, लेकिन उस आधार पर एफआईआर दर्ज होने की खबर नहीं है। कई बार परिवार या सहकर्मी “एसआईआर के दबाव” को कारण बता रहे हैं, लेकिन प्रशासन या अधिकारियों का कहना है कि व्यक्ति पहले से बीमार था। रिपोर्टिंग और पब्लिक रिकॉर्ड में अंतर है। मीडिया में खबरें आ रही हैं, लेकिन कोई एक सरकारी रिपोर्ट नहीं मिली जिसमें सारे मामलों का संग्रह हो। चैट जीपीटी ने यह भी कहा कि राज्यवार अव्यवस्था है। हर राज्य में जांच, एफआईआर, रिकॉर्ड रख-रखाव अलग तरह से हो रहा है; इस कारण आँकड़ा केंद्रित रूप से उपलब्ध नहीं है।

ग्रोक डॉट कॉम

मैंने वही सवाल ग्रोक डॉट कॉम से पूछा। जवाब के खास अंश पेश हैं – विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार, एसआईआर शुरू होने (नवंबर 2025) के बाद से देश भर में कुल 25-26 मौतें/आत्महत्याएं दर्ज की गई हैं। इनमें आत्महत्याएं के कम से कम 10-12 मामले (उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, राजस्थान, केरल) के हैं। हार्ट अटैक, स्ट्रोक या तनाव से जुड़ी मौत के कुल 13-14 मामले हैं। चुनाव आयोग इन्हें “अलग-थलग मामले” मानता है और एसआईआर से सीधा संबंध नकारता है जबकि मरने वालों के परिवार और उनकी यूनियनों ने दबाव को मुख्य कारण बताया है। ग्रोक ने मुझे मरने वालों का विवरण, कारण समेत सबसे अच्छी तरह से दिया है। इसने कुल 25-26 लोगों की मौत का विवरण दिया है और सुसाइड नोट में ईसीआई को जिम्मेदार ठहराने से लेकर सर्वर की समस्या तक के उदाहरण दिए हैं। भारत के कानून के तहत ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज होते रहे हैं। बहू की मौत के मामले में हुई है लेकिन सरकारी काम, स्वतंत्र और स्वायत्त चुनाव आयोग की जबरदस्ती के कारण हुई मौत के मामलों में कार्रवाई तो नहीं ही है, खबर भी नहीं के बराबर है।

क्रम संख्या राज्य / क्षेत्रकुल मौतें / आत्महत्याएंमुख्य कारण (परिवारों के अनुसार)उल्लेखनीय मामले
01उत्तर प्रदेश  6-7  आत्महत्या (तनाव, एफआईआर धमकी)  फतेहपुर (सुधीर कोरी, शादी से एक दिन पहले); गोंडा (विपिन यादव, जहर); जहानाबाद (सुधीर); विजय वर्मा (लखनऊ)।  
02पश्चिम बंगाल4-5आत्महत्या + हार्ट अटैकनादिया (रिंकू तरफदार, सुसाइड नोट में ईसीआई को दोषी ठहराया); जलपाईगुड़ी (शांति मणि); पूर्व बर्धमान (नमिता हंसदा, स्ट्रोक); मुर्शिदाबाद (जाकिर हुसैन, सर्वर की समस्या)  
03गुजरात5आत्महत्या + हार्ट अटैकगिर सोमनाथ (अरविंद वाढेर, सुसाइड नोट); खेड़ा (रमेश भाई परमार, हार्ट अटैक); वडोदरा (ऊषा इंद्र सिंह सोलंकी)  
04मध्य प्रदेश  3-4  हार्ट अटैक/तनाव  रायसेन (रामाकांत पांडेय); दमोह (सीताराम गोंड); एक लापता  
05राजस्थान  2-3आत्महत्याजयपुर (मुकेश जांगिड़, ट्रेन के आगे); 2 हार्ट अटैक  
06केरल2आत्महत्याकन्नूर (अनीश जॉर्ज)  
07अन्य (तमिलनाडु, पंजाब आदि)  3आत्महत्या / तनाव  कुम्बाकोनम (अटेम्प्ट); 1-2 मौतें  

ग्रोक ने इन मामलों में एफआईआर का विवरण भी दिया है लेकिन बताया है कि 1-2 मामलों में आत्महत्या के लिए उकसाने की एफआईआर दर्ज हुई है और यह अधिकारियों के खिलाफ हैं। उत्तर प्रदेश के जहानाबाद में सुधीर की आत्महत्या के बाद परिवार ने राजस्व निरीक्षक शिवराम पर दबाव डालने का आरोप लगाया। एफआईआर निरीक्षक और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुई है। यूपी लेखपाल एसोसिएशन ने इसे “आंशिक कार्रवाई” बताया है। अन्य मामलों में एफआईआर का जिक्र धमकी के रूप में आता है (जैसे लक्ष्य न पूरे करने पर), लेकिन मौतों के बाद कोई एफआईआर नहीं है। उदाहरण के लिए फतेहपुर (सुधीर कोरी) में परिवार एफआईआर की की मांग कर रहा है, लेकिन अभी दर्ज नहीं हुई है। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने फतेहपुर में परिवार को दो लाख रुपए दिए हैं। आरएसएस से जुड़े शिक्षक संगठन ने ईसीआई को पत्र लिखा है और एक करोड़ का मुआवजा देने तथा एसआईआर की डेडलाइन बढ़ाने की मांग की है। राजस्थान के मुख्य चुनाव अधिकारी ने बीएलओ की मदद का वादा किया है। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मौतों पर ईसीआई से जवाब मांगा है। बीएलओ की समस्याओं में 16-18 घंटे काम, घर-घर सर्वे, डेटा एंट्री और एफआईआर की धमकी के साथ पर्याप्त ट्रेनिंग न होने, स्टाफ की कमी जैसे कारण हैं। ये आंकड़े 28-29 नवंबर 2025 तक के हैं आगे स्थिति बदल सकती है।

जेमिनी

इसी सवाल के जवाब में जेमिनी ने बताया कि पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर में एक महिला बीएलओ, रिंकू तरफदार की कथित आत्महत्या के मामले में उनके पति द्वारा एफआईआर दर्ज करने की बात सामने आई है। इसमें उन्होंने एसआईआर के काम के तनाव को मौत का कारण बताया है। अन्य आत्महत्या/मौत के मामलों में एफआईआर दर्ज होने की विस्तृत और अद्यतन जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। एक अधिकारी ने कहा था कि नादिया जिले में महिला बीएलओ की मौत की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर निर्भर है और आत्महत्या या हत्या की पुष्टि होने पर एफआईआर दर्ज होगी। कई राज्यों में, बीएलओ की मौत से संबंधित नहीं, बल्कि एसआईआर कार्य में लापरवाही, गैर-अनुपालन और आधिकारिक निर्देशों की अनदेखी के लिए कई बीएलओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश के नोएडा और गाजियाबाद में 60 से अधिक और 21 बीएलओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की खबरें हैं। बीएलओ की मौत या आत्महत्या के कुल मामले 11 से 16 तक बताए जा रहे हैं, और इनमें से कुछ मामलों (जैसे पश्चिम बंगाल में) में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी है, लेकिन सभी मामलों की विस्तृत स्थिति स्पष्ट नहीं है। वहीं, काम में लापरवाही के लिए बड़ी संख्या में बीएलओ पर एफआईआर दर्ज हुई हैं। जाहिर है, ये खबरें भी पूरी नहीं हैं। फिर भी इनसे स्पष्ट है कि एसआईआर बीएलओ के लिए जानेलवा साबित हो रहा है। बिहार में इससे किसी लाभ की खबर नहीं है, भाजपा को चुनाव में लाभ के तमाम संकेत हैं फिर भी चुनाव आयोग ने कहा है और टाइम्स ऑफ इंडिया ने छापा है कि बिहार में ईवीएम की जांच और पुनर्मतदान के लिए कोई आवेदन नहीं है (इसलिए सब ठीक है)। आप जानते हैं कि राहुल गांधी से शपथपत्र मांगने वाले चुनाव आयोग ने समाजवादी पार्टी के शपथपत्र मामले में झूठ बोला था, अनुराग ठाकुर से नहीं मांगा, तेजस्वी यादव और पवन खेड़ा जैसी हस्तियों के खिलाफ दो एपिक नंबर के मामले में नोटिस जारी हुए लेकिन आगे की खबर नहीं है तथा अलंद मामले में सीआईडी की 18 चिट्ठियों का जवाब देने के मामले में पहले तो लीपा-पोती की गई पर चुनाव आयोग को कामयाबी नहीं मिली, जवाब देने की खबर नहीं है और जांच भाजपा नेता से होते हुए अमेरिका से वेबसाइट के जरिए सिम की क्लोनिंग कके भारतीय नंबरों पर ओटीपी भेजने की सेवा लेने और इसके लिए 700 रुपए प्रत्येक का भुगतान किए जाने की खबरें हैं इसपर चुनाव आयोग ने मुंह सिल रखा है। (जारी)

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लेखक संजय कुमार सिंह से [email protected] के जरिए संपर्क किया जा सकता है।  

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