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आज के अखबार : ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव की खबर लीड से सिंगल कॉलम तक, एचटी में शीर्षक अलग

मेरा भारत महान – एसआईआर में नाम सुधरवाने के लिए मेले जैसा दृश्य। इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित फोटो। मुझे याद नहीं है कि पहले कभी ऐसा हुआ हो या आबादी के इतने बड़े हिस्से या अनुपात को लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी या तर्कसंगत विसंगति के कारण इतना परेशान होना पड़ा हो। वोट नहीं दे पाए वो अलग मुद्दा है और अभी भी वैसे लोग रह ही जाएंगे। यह सब हो या चल रहा है ताकि मतदाता सूची में किसी विदेशी का नाम शामिल नहीं हो जाए। इसकी आड़ में अब तर्कसंगत विसंगतियां सुधारी जा रही हैं। विडंबना यह है कि सब कुछ सुप्रीम कोर्ट की जानकारी में वहां बार-बार एतराज दाखिल किए जाने के बावजूद हो रहा है और आज तो होते रहने का आश्वासन भी है। ताज्जुब यह है कि पंच परमेश्वर के देश में निष्पक्ष खबरों और निर्णयों का कोई आश्वासन नहीं है। अखबारों का पक्षपात साफ-साफ दिखता रहा है। अब चुनाव आयोग से जुड़े पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट को सरकार के पक्ष में झुकाव नहीं भी दिख रहा हो तो एसआईआर और चुनाव आयोग की निष्पक्षता भी नहीं दिखती है या शायद यह उसका काम ही नहीं है। जो भी हो, यह अखबारों के लिए भी मुद्दा नहीं है। ना जगह भरने के लिए, ना अपनी स्वतंत्रता के लिए ना जनता के लिए। जिसके लिए है उसे भाजपा या सरकार का विरोधी करार दिया जाता है और इस कारण बहुत सारे लोग ऐसे विषयों पर चुप रहना बेहतर मानते हैं। वह अलग मुद्दा है।  

संजय कुमार सिंह

आज देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, विपक्ष को लोकसभा अध्यक्ष पर अविश्वास, अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में विपक्ष। अमर उजाला में यह खबर सेकेंड लीड है। शीर्षक है, लोकसभा अध्यक्ष बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगा विपक्ष। उपशीर्षक है, सांसदों से हस्ताक्षर कराए, विपक्षी गठबंधन आज देगा नोटिस। नवोदय टाइम्स में यह सिंगल कॉलम की खबर है, बिरला को स्पीकर पद से हटाने की कोशिश में विपक्ष। अंग्रेजी अखबारों में अकेले हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर ऐसा कोई शीर्षक ही नहीं है। लीड से लेकर सिंगल कॉलम की एक-एक खबरों को देखने के बाद ध्यान में आया कि इसका जिक्र सेकेंड लीड में हो सकता है। शीर्षक है, संसद में चल रहे गतिरोध को रोकने की कोशिश में कांग्रेस ने नया दांव चला। मुझे लगता है कि यह ‘दांव’ छोटा-मोटा या समान्य है इसलिए दांव को ही लिखा जाना चाहिए ताकि दाग लगे तो पक्का। इस लिहाज से खबर में कहा गया है, …. कांग्रेस के कुछ सांसदों ने संकेत दिया कि वे लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहे हैं। इसकी तुलना अमर उजाला के उपशीर्षक – सांसदों से हस्ताक्षर कराए, विपक्षी गठबंधन आज देगा नोटिस से करके आज जो होता है उसके बाद आप तय कर सकते हैं कि खबरों के नाम पर आपका अखबार आपको क्या दे या परोस रहा है। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड पाकिस्तान भारत के साथ वर्ल्ड कप मैच खेलेगा शीर्षक खबर है। यह खेलों में राजनीति घुसेड़ने के बाद राजनीतिक दबाव में जीत जाने का मामला है। इसलिए यह ध्यान रहे कि  जहां हम हार जाते हैं या कमजोर दिखते हैं उसकी खबरों को महत्व नहीं मिलता है। बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की खबर अंग्रेजी अखबारों में अकले दि एशियन एज में लीड है। शीर्षक है, विपक्ष बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की योजना बना रहा है – इसलिए लोकसभा में हंगामा। ‘पक्षपाती’ लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास (की) कोशिश, शीर्षक से द टेलीग्राफ में यह खबर सिंगल कॉलम में है। लीड पश्चिम बंगाल में एसआईआर की तारीख सात दिन बढ़ाए जाने की खबर है।

अमर उजाला और नवोदय टाइम्स की लीड, डिजिटल धोखाधड़ी रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की खबर है। नवोदय टाइम्स में मुख्य शीर्षक है, डिजिटल धोखाधड़ी रोकने पर एसओपी बनाए सरकार। 54,000 करोड़ की डिजिटल धोखाधड़ी सरासर डकैती, जिम्मेदारी भूल रहे हैं बैंक। यहां ध्यान देने वाली बात है कि संसद की कार्यवाही नहीं चल पा रही है। मुद्दा है नरवणे की किताब। उसकी खबर अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं के बराबर है। पुराना समय याद कीजिए। ऐसी खबर कैसे छपती थीं। अब अगर सरकार राहुल गांधी की बात मान ले और संसद की कार्यवाही सामान्य हो जाए तो क्या अमेरिका से करार पर चर्चा होगी या रूस से तेल के आयात या उसके रोकने पर – मुझे नहीं लगता है कि सरकार ऐसी चीजों पर चर्चा होने देगी या चाहेगी कि नरवणे की किताब से आगे बढ़कर इसपर चर्चा होने लगे। एक तरफ संसद का सत्र हंगामे की भेंट चढ़ रहा है, उसकी खबर नहीं है और सरकार विपक्ष की सुन नहीं रही है और भाजपा के लोगों के लिए किताब मु्द्दा है। यह ठीक है राहुल गांधी अपनी बात और विषय पर अड़े हैं लेकिन सरकार अपनी पर अड़ी है और उसमें दूसरे मुद्दे भी रह जाएंगे क्योंकि अब प्रश्न काल, जीरो आवर होता है या नहीं अखबारों से तो पता नहीं चलता है। संसद का सत्र पहले जैसा नहीं होता है और खबर कुछ और निशाने पर किताब नहीं, उसके तथ्य नहीं, प्रकाशन की अनुमति नहीं मिलना भी नहीं है। राहुल गांधी को बदनाम करना है। सरकार इसका जो फायदा उठा सकती है, उठा रही है। नुकसान अगर हो रहा है तो राहुल गांधी का। दूसरी ओर,  भाजपा को लोग शहीद दिखाने या बनाने में लगे हैं। 

टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड तेल रणनीति पर विदेश सचिव का बयान है। उन्होंने कहा है, तेल रणनीति राष्ट्रहित से निर्देशित है। अखबार ने लिखा है, अमेरिका के टैरिफ हटाने के बाद मिसरी की यह टिप्पणी पहली प्रतिक्रिया है। कहने की जरूरत नहीं है कि इस खबर से भारत सरकार का जवाब नहीं देना और दूसरी संबंधित खबरों को धोने-पोंछने की कोशिश दिखती है। सरकार के खिलाफ दिखने वाली खबरों को छोड़कर सेकेंड लीड का शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एसआईआर को रोकने नहीं देंगे, ना वाजिब मतदाताओं को छोड़ने देंगे। यह खबर तब है जब इंडियन एक्सप्रेस की लीड का शीर्षक है, राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का संदेश : एसआईआर में रुकावट नहीं होने देंगे। जाहिर है, सुप्रीम कोर्ट एसआईआर को सही और जरूरी या जायज मान रहा है और इसमें ‘बाधा’ नहीं होने देगा जबकि लाखों लोग बिलावजह परेशान हैं। सॉफ्टवेयर की खराबी और प्रतिबंधी अथवा नियामक (‘Restrictive’) सॉफ्टवेयर का उपयोग किए जाने के कारण भी हैं। मुझे लगता है कि जनता को इतना परेशान करके, इतना भारी खर्च थोपकर और करके इतने कम समय में एसआईआर करना और चाहे जो हो, जनहित तो नहीं ही है ना निष्पक्ष चुनाव के हित में हो सकता है। फिर भी हो रहा है और सुप्रीम कोर्ट का आश्वासन है। इसीलिए, द हिन्दू का शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा – एसआईआर के लिए प्रतिबंधी अथवा नियामक (‘Restrictive’) सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है। खबर के अनुसार, राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा है, नाम में मामूली गलतियों के लिए 70 लाख लोगों को सुनवाई में भाग लेने के लिए बुलाया गया था। इंडियन एक्सप्रेस ने फोटो छापी है जिससे पता चलता है कि सुनवाई केंद्रों पर मेला जैसा नजारा है। मतदाता सूची में नाम (या सुधार) या उसे अद्यतन करने के लिए इतने लोगों को परेशान करने और इतने पैसे खर्च करने का कोई मतलब नहीं है और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। 2003 में जो हुआ था उसकी तो चर्चा ही नहीं थी। मुझे अच्छी तरह याद है।

आज की जो दूसरी महत्वपूर्ण खबरें हैं उनमें मणिपुर में नई सरकार बनने के तुरंत बाद फिर हिन्सा शुरू होने की खबर है। जो स्थितियां हैं उनमें इसका संबंध भाजपा की राजनीति से भी हो सकता है इसलिए इस खबर का अलग महत्व है। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार भ्रष्टाचार के शिकार प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के 178 केंद्रों को काली सूची में डाला गया है और कई स्तर की जांच के बाग 41 एफआईआर हुई है। लेकिन यह कार्रवाई सीएजी की रिपोर्ट के बाद हुई है और इसका कोई मतलब नहीं है क्योंकि तमाम मामले ठंडे बस्ते में पड़े हैं। ऐसे मामलों में सरकार की प्राथमिकता सर्वविदित है। कार्रवाई का यह दिखावा संबंधित घपलेबाजों को नियंत्रण में रखने के लिए भी हो सकता है। नौसेना प्रमुख की किताब लीक होने के मामले में एफआईआर और उसकी जांच दिल्ली पुलिस करेगी – द हिन्दू में सिंगल कॉलम की खबर है। अमर उजाला में यह तीन कॉलम में है। देशबन्धु में, राहुल गांधी का यह कहना कि सरकार बहस से डर रही है तीन कॉलम में है।   

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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