त्रिभुवन-
राम मंदिर में श्रद्धालु लोगों के माध्यम से मिली संपदा भगवान् राम की ही थी। लेकिन ख़बरें हैं कि यहाँ से 200 करोड़ रुपए और बहुमूल्य सोने के मुकुट तक चोरी हो गए। ये कौन विधर्मी हैं, जो प्रभु राम का मंदिर लूटने आए हैं। क्या यह सोमनाथ से भी ख़तरनाक हमला नहीं है? राम के नाम पर ऐसा करना वाक़ई चिंतित करता है।
मामला इतना गंभीर है कि उत्तरप्रदेश की योगी सरकार ने इस मामले में तीन-सदस्यीय SIT गठित की और इसे 16 जून 2026 तक यानी आज तक रिपोर्ट देनी है। उसे सात दिन में प्रारम्भिक और पंद्रह दिन में अंतिम रिपोर्ट देने को कहा गया था। अभी किसी व्यक्ति का अपराध न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ है।
करीब ₹200 करोड़ की चोरी, ₹2 करोड़ की बरामदगी और 1,250 बहुमूल्य रामशिलाओं के गायब होने जैसी बातें फिलहाल मीडिया रिपोर्टों, सूत्रों और शिकायतकर्ताओं के आरोप हैं। यह अंतिम निष्कर्ष नहीं है। ट्रस्ट ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि उसने स्वयं स्वतंत्र जाँच की मांग की थी, जैसा कि हर आरोपित कहता ही है। लेकिन यह प्रकरण बड़े सवाल खड़े करता है और इसे समझने की ज़रूरत है।
प्रभु राम ने राजपाट छोड़ दिया था, पर पराया धन नहीं लिया था। जो लोग उनके नाम पर जमा धन तक को निजी संपत्ति समझ बैठे, उन्होंने केवल कानून नहीं तोड़ा; उन्होंने मर्यादा को अपमानित किया है। SIT की रिपोर्ट चाहे जो कहे, अब 1989 से आज तक प्राप्त नकदी, सोना, चाँदी, रत्न, शिलाओं, भूमि और खर्च का पूरा सार्वजनिक फॉरेंसिक ऑडिट होना चाहिए। राम का मंदिर किसी बंद तिजोरी का नाम नहीं; वह देश की खुली आस्था है।
- दानपात्र की नकदी का आरोप
आरोप है कि रामलला के दानपात्रों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई नकदी का पूरा हिसाब बैंक और खातों तक नहीं पहुँचा। शुरुआती मीडिया अनुमानों में रकम ₹200 करोड़ से अधिक तक बताई जा रही है। SIT बताएगी कि कितनी रकम आई, कितनी दर्ज हुई और बीच में कितनी गायब हुई। - मामूली वेतन, करोड़ों की संपत्ति
आरोप है कि चौदह से बीस हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारी थोड़े समय में महंगी जमीनों, मकानों, फार्महाउसों, हॉस्टलों और गाड़ियों के मालिक बन गए। प्रश्न बहुत सीधा है—इतना धन आया कहाँ से? क्या रामलला की दानपेटी किसी के निजी कारोबार की पूँजी बन गई थी? - घरों से मिली बेहिसाबी नकदी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चढ़ावे की गणना से जुड़े लोगों के ठिकानों से नकदी मिलने की बात सामने आई है। कहीं अलमारी, कहीं गोबर के ढेर में रुपये छिपाए जाने का दावा है। श्रद्धालु ने रुपये भगवान के चरणों में रखे थे—किसी कर्मचारी के घर में छिपाने के लिए नहीं। - सोना-चाँदी भी हिसाब से बाहर?
पूर्व लेखाधिकारी ने आरोप लगाया है कि सोने-चाँदी के आभूषणों से भरी कई पेटियाँ बिना रसीद और बिना लेखा-प्रविष्टि के बाहर ले जाई गईं। यदि यह सच है तो केवल नोट नहीं चुराए गए; किसी माँ की चूड़ी, किसी स्त्री का मंगलसूत्र और किसी परिवार की जीवनभर की श्रद्धा लूटी गई। - कम रकम वाले फर्जी वाउचर?
आरोप है कि दानपात्र में निकली वास्तविक रकम से कई लाख रुपये कम राशि वाउचर में दर्ज की जाती थी। अर्थात रुपये पहले गिने जाते थे, फिर कागजों में उनकी संख्या घटा दी जाती थी। यह अचानक हुई चोरी नहीं, बल्कि कथित रूप से सुनियोजित हिसाब-किताब था। - सात-आठ महीने की CCTV रिकॉर्डिंग कहाँ गई?
यह भी आरोप है कि दान की गणना से जुड़ी सात-आठ महीने की CCTV रिकॉर्डिंग मिटा दी गई। कैमरे यदि सही समय पर अंधे हो जाएँ, तो संदेह केवल चोर पर नहीं रहता; उन लोगों पर भी जाता है जिनके पास कैमरे, रिकॉर्ड और व्यवस्था की चाबी थी। - सोने-चाँदी की 1,250 रामशिलाएँ कहाँ हैं?
धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे का दावा है कि 1989 में देश-विदेश से आईं सोने, चाँदी, अष्टधातु, हीरे और माणिक्य से बनी 1,250 पूजित रामशिलाएँ 2002 के बाद दिखाई नहीं दीं। यह दावा अभी स्वतंत्र रूप से सिद्ध नहीं है, लेकिन SIT को प्रत्येक शिला की सूची, वजन, तस्वीर और वर्तमान स्थान सार्वजनिक करना चाहिए। - हीरे जड़ी और मॉरीशस से आई शिला कहाँ है?
दावा है कि इन शिलाओं में मॉरीशस से आई अत्यंत मूल्यवान शिला और मुंबई के एक व्यापारी द्वारा दी गई हीरे जड़ी शिला भी शामिल थी। यदि वे सुरक्षित हैं तो देश को दिखाई जाएँ; यदि उपयोग हुईं तो विवरण दिया जाए; और यदि गायब हैं तो बताया जाए कि तीन तालों के भीतर से उन्हें कौन ले गया। - जिम्मेदारी केवल छोटे कर्मचारियों की नहीं हो सकती इतनी बड़ी व्यवस्था में दान गिनने वाले, निगरानी करने वाले, बैंक अधिकारी, लेखा-परीक्षक और वरिष्ठ प्रबंधक—सबकी अलग-अलग जिम्मेदारी थी। करोड़ों की कथित हेराफेरी को केवल दो-चार कर्मचारियों के सिर डाल देना न्याय नहीं होगा। जाँच नीचे से ऊपर तक और ताले से चाबी तक होनी चाहिए।
- यह चोरी रुपये की नहीं—राम के भरोसे की है ये कौन लोग हैं, जो दिन में राम का नाम लेते हैं और रात में राम की दानपेटी पर हाथ साफ करने के आरोपों से घिरे हैं? इससे बुरा क्या होगा—राम के नाम पर सत्ता, राम के नाम पर चंदा और फिर राम का ही पैसा खा जाना? यदि आरोप सही निकले तो ये साधारण चोर नहीं होंगे; ये करोड़ों मर्यादावान श्रद्धालुओं के विश्वास के अपराधी होंगे।
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सरकारी मुखपत्र दैनिक जागरण राम मंदिर पर इतना खुलकर कैसे रिपोर्टिंग कर पा रहा है? इस वीडियो से समझिए


