Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

आज के अखबार : ट्रम्प की मौजूदगी में ‘सुनाया’ वाले प्रचार का फॉलो अप तो है लेकिन ‘खबर’ टेलीग्राफ में है

Hindi news clipping with a burning car as the main image and a small inset photo of a man; headline says BJP leader burned alive in a car, describing the incident and suspects.

संजय कुमार सिंह

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत सरकार का प्रचार करने में प्रतिस्पर्धा कर रहे अखबारों में आज पहले पन्ने पर आठ कॉलम का विज्ञापन है। सरकार ने 12 साल में जो किया, खुद बताया है (बताती रही है, कई दिनों से) बाकी खबरों के रूप में भी प्रचार ही होता है। प्रधानमंत्री विदेश दौरे पर पत्रकारों को साथ ले नहीं जाते हैं। एजेंसियों के संवाददाता जाते होंगे या स्थानीय संवाददाता खबर भेजते होगे वही सभी अखबारों में छपती है, एक जैसी। आज मेरे 10 अखबारों में सिर्फ द टेलीग्राफ की खबर और शीर्षक अलग है बाकी सब में लगभग एक जैसी। अंग्रेजी अखबारों में कइयों की खबरे नई दिल्ली डेटलाइन से हैं। लेकिन बाईलाइन है। इसका मतलब यहां उसके संवाददाता ने लिखी है। नवोदय टाइम्स और अमर उजाला की खबर एवियन डेटलाइन से एजेंसियों के हवाले थे। देशबन्धु की खबर नई दिल्ली डेटलाइन से एजेंसी की की खबर है लेकिन दैनिक भास्कर की नई दिल्ली डेटलाइन से भास्करन्यूज की अपनी अलग। अंग्रेजी में टाइम्स ऑफ इंडिया दूसरों से थोड़ा अलग है। उसमें डेटलाइन नहीं है, बाईलाइन के साथ ई मेल आईडी है। द हिन्दू में लंदन डेटलाइन से श्रीराम लक्ष्मण की खबर छपी है। बाकी सब में नई दिल्ली डेटलाइन से बाई लाइन है। आज द टेलीग्राफ की खबर से पता चलता है कि यहां बैठकर भी कायदे से खबर लिखी जा सकती है। आज आपके लिए इसका हिन्दी अनुवाद पेश है। देखिए चापलूसी में कैसी खबर क्या बन जाती है। वैसे तथ्य यह भी है कि प्रधानमंत्री ने ट्रम्प को ‘सुनाने’ के बाद सीधी बात भी की। उसके लिए दुभाषिए थे और प्रधानमंत्री के हाथ में पर्ची भी। इसमें कुछ गलत या बुरा नहीं है लेकिन सोशल मीडिया पर मजाक उड़ाया जा रहा है कि मनमोहन सिंह को मौनमोहन कहने वाले टेलीप्रॉम्पटर खराब हो जाए तो मौन हो जाते हैं और जो बात करनी होती है उसे पर्ची में लिखकर ले जाते हैं। खबर में बताया गया है कि कल की खबरों के अनुसार ट्रम्प को ‘सुनाने’ के बाद ट्रम्प से आमने सामने की बात में प्रधानमंत्री ने ट्रम्प से क्या कैसे कहा। आज की दूसरी प्रमुख खबरों में कोटा बच्चों के बीच राहुल गांधी के कार्यक्रम की खबर देशबन्धु और नवोदय टाइम्स में है। नवोदय टाइम्स में छत्तीसगढ़ के एक भाजपा नेता को कार में जिन्दा जला दिए जाने और तीन अन्य लोगों की हत्या की खबर है। तृणमूल पार्टी में तोड़ फोड़ के बाद आज शिव सेना के उद्धव ठाकरे गुट में एक बार फिर तथा समाजवादी पार्टी में भी तोड़फोड़ की खबर हैं। संजय राउत ने आरोप लगाया है कि भाजपा सांसदों को 50 करोड़ रुपए में खरीद रही है।

नई दिल्ली डेटलाइन से अनीता जोशुआ की यह खबर सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध वीडियो से ही लिखी गई होगी। इसे पढ़कर समझा जा सकता है कि सामान्यतया खबर कैसी होनी चाहिए। प्रचार तो हमलोग कई साल से पढ़ रहे हैं। इस खबर का शीर्षक हिन्दी में इस तरह होगा, मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ समुद्री नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर ज़ोर दिया। ट्रंप ने संवेदना जताई, लेकिन नाविकों के काम को ‘मुश्किल’ बताया। खबर इस प्रकार है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बैठक में समुद्री नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान के साथ शांति समझौते को लागू करते समय उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। दोपहर में जी7 बैठक के दौरान हुई मुलाकात में राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की मौजूदगी में एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने इस बार आठ युद्ध रोके हैं। हालांकि उन्होंने पिछले साल भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन ट्रंप अक्सर सार्वजनिक रूप से युद्ध रोकने के अपने दावों में इसे शामिल करते रहे हैं। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इसमें किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नहीं था। ट्रंप ने “जी2” – यानी अमेरिका-चीन के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक का भी संक्षेप में ज़िक्र किया। यह बैठक तब होगी जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सितंबर में अमेरिका का दौरा करेंगे; यह दौरा ट्रंप की हालिया बीजिंग यात्रा के जवाब में होगा। ट्रम्प से ओमान की खाड़ी में पिछले हफ्ते अमेरिकी सशस्त्र बलों द्वारा उनके व्यापारिक पानी जहाज पर हमले में मारे गए समुद्री नाविकों के शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा: “हां, मैं संवेदना व्यक्त करता हूं।” हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि समुद्री नाविक होना हमेशा से एक मुश्किल पेशा रहा है। “हां, मैं करता हूं। मैंने इसके बारे में सुना है। यह एक मुश्किल पेशा है, इसमें कोई शक नहीं। हम इस पर मिलकर काम करते हैं (मोदी की ओर इशारा करते हुए)। ऐसा हमेशा से होता रहा है… हम उन सभी लोगों से प्यार करते हैं। वे बहुत अच्छे लोग हैं।” शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के बारे में पूछे गए सीधे सवाल के जवाब में ट्रंप ने ये बातें कहीं।

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने एक्स पर लिखा है: “उन्होंने (ट्रंप ने) न केवल सवाल को टाल दिया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि ऐसे जोखिम तो बने रहेंगे। उन्होंने एक बार फिर अफ़सोस जताने और मामले को खत्म करने का मौका गंवा दिया। उन्हें कोई पछतावा नहीं है। हालांकि, मोदी की तारीफ़ की जानी चाहिए कि उन्होंने इस मुद्दे को मज़बूती से और ज़ोरदार ढंग से उठाया।” इससे पहले, मीडिया के सामने अपनी शुरुआती टिप्पणी में प्रधानमंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और बताया कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ज़रूरी है। मोदी ने कहा, “हमने हमेशा नेविगेशन की आज़ादी सुनिश्चित करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है और हमें इसके लिए मिलकर काम करना चाहिए। दुनिया भर में समुद्री क्षेत्र में लाखों भारतीय नाविक काम कर रहे हैं, और उनकी सुरक्षा हमारे लिए बहुत ज़रूरी है। आपने (ट्रंप) शांति समझौते के लिए कड़ी मेहनत की है और मुझे भरोसा है कि समझौते को लागू करते समय नाविकों के मुद्दे को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दी जाएगी,”  दोनों देशों के रिश्तों के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने वॉशिंगटन में ट्रंप के साथ अपनी पिछली मुलाक़ात को भी याद किया। इसके बाद उनके अनुसार भारत-अमेरिका संबंधों को नई रफ़्तार और ऊर्जा मिली थी। इस खबर के दूसरे हिस्से का शीर्षक है, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं। वॉशिंगटन की मुलाक़ात ने रिश्तों को नई गति दी थी, लेकिन कुछ महीनों बाद जब ट्रंप ने बार-बार दावा किया कि उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी और दोनों को सीज़फायर के लिए राज़ी करने के लिए अमेरिका के साथ व्यापार का इस्तेमाल किया था तब हालात बिगड़ने लगे थे। ट्रंप ने अपनी शुरुआती टिप्पणी में कहा, “हम ट्रेड डील कर रहे हैं, अमेरिका और भारत के बीच बहुत कुछ हो रहा है… प्रधानमंत्री अमेरिका में बहुत कुछ बना रहे हैं, अमेरिका में बहुत पैसा खर्च कर रहे हैं। मैं इसकी बहुत तारीफ़ करता हूँ। मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि वह लंबे समय से मेरे दोस्त रहे हैं और हमारे रिश्ते हमेशा बहुत अच्छे रहे हैं और आपके साथ होना बहुत अच्छा लग रहा है।” भारत और अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के कितने करीब हैं, इस पर ट्रंप ने कहा: “बहुत करीब। हम काफी समय से इस पर काम कर रहे हैं। वह एक सख़्त नेगोशिएटर हैं। सबसे सख़्त लोगों में से एक… आप इस आदमी को देखिए… वह बहुत अच्छे दिखने वाले आदमी हैं। वह बहुत अच्छे लगते हैं, वह एक फ़रिश्ते की तरह हैं। असल में, वह उतने ही सख़्त हैं जितने कि वह ‘किलर’ (कठोर) हैं। वह बहुत सख़्त हैं लेकिन बहुत अच्छे दिखते हैं। इसलिए, वह आपको चौंका देते हैं… वह एक सख़्त ट्रेडर हैं और वह भारतीय लोगों से प्यार करते हैं लेकिन वह अमेरिका से भी प्यार करते हैं… हम भविष्य में कभी भारत जाएँगे।” जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें उम्मीद है कि भारत पश्चिम एशिया में कोई भूमिका निभाएगा, तो ट्रंप ने जवाब दिया: “हाँ, मुझे उम्मीद है, मुझे उम्मीद है… मुझे लगता है कि भारत हर चीज़ में बड़ी भूमिका निभाता है। जब तक वह नेता हैं, भारत बड़ी भूमिका निभाता रहेगा।” अपनी शुरुआती बातों के ठीक बाद, ट्रंप संयुक्त मीडिया बातचीत में सवालों का जवाब दे रहे थे। सभी सवाल राष्ट्रपति से पूछे गए थे और भारत-अमेरिका संबंधों से जुड़े सवालों पर मोदी ने बीच में कोई टिप्पणी नहीं की।

खबर से लग रहा है और रिपोर्ट भी है कि, भारतीय नाविकों पर ट्रम्प से सवाल मोदी ने नहीं, किसी पत्रकार ने पूछा है। सवाल था कि, ओमान के पास अमेरिकी कार्रवाई में मारे गए तीन भारतीय नाविकों के परिवारों के लिए क्या उनका कोई संदेश है। प्रधानमंत्री मोदी भी वहीं मौजूद थे। ट्रम्प ने जो जवाब दिया वही ऊपर लिखा है। “यह जोखिम भरा पेशा है” कहना मौतों की गंभीरता को कम करके दिखाने जैसा लगा। मोदी ने सार्वजनिक रूप से अधिक कठोर प्रतिक्रिया नहीं दी। मोदी के इस रुख की आलोचना कई जाने-माने लोगों ने की है। राहुल गांधी, अरविन्द केजरीवाल, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी आदि ने् अमेरिकी कार्रवाई की सरकारी आलोचना नहीं करने की निन्दा की है। जाहिर है सबकी अपेक्षा प्रधानमंत्री से है और ट्रम्प से जो-जैसे पूछा गया उसका यहां प्रचार अच्छा है। द टेलीग्राफ की उपरोक्त खबर के मुकाबले टाइम्स ऑफ इंडिया की आज की लीड का शीर्षक है, अमेरिका-ईरान करार के मसौदे में होर्मुज के जरिए आवा-जाही, प्रतिबंध हटाना और 300 बिलियन डॉलर का फंड शामिल है। इसके तहत एक और खबर का शीर्षक है, मोदी ने एक बार फिर समुद्री नाविकों की सुरक्षा का मामला ट्रम्प के सामने ऊठाया। हिन्दुस्तान टाइम्स का प्रचार और भी दिलचस्प है, “मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर हमला हुआ तो मदद करूंगा : ट्रम्प”। मुझे पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की किताब और उसकी बातें याद आईं जिसके बारे में यही तय नहीं है कि किताब छपी या नहीं, नहीं छपी थी तो राहुल गांधी के पास कैसे आई और जब कॉपी थी ही तो क्यों कहा गया कि नहीं छपी है और छपी है तो बिक क्यों नहीं रही है। यह पूर्व सेना प्रमुख जो बताना चाहते हैं उसके मामले में है। किताब में 2020 के भारत-चीन सीमा तनाव, विशेषकर पैंगोंग त्सो और कैलाश रेंज क्षेत्र की घटनाओं का वर्णन है। जनरल नरवणे के अनुसार, जब उन्हें लगा कि चीनी सेना आगे बढ़ रही है और स्थिति बेहद गंभीर है, तब उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से स्पष्ट निर्देश मांगे। संस्मरण के अनुसार रक्षा मंत्री ने बाद में बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बात की है और कहा: “यह पूरी तरह सैन्य निर्णय है, जो उचित समझो वो करो।” अब ट्रम्प की घोषणा और हिन्दुस्तान टाइम्स के शीर्षक को समझिए।

इंडियन एक्सप्रेस की लीड का शीर्षक है, व्यापार से नाविकों की सुरक्षा तक, मोदी और ट्रम्प ने नई शुरुआत करने की उम्मीद जताई। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, संबंध कभी इतने करीब नहीं रहे। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट खत्म करने के उनके प्रयासों की प्रशंसा की। द हिन्दू की लीड का शीर्षक है,  मोदी ने ट्रंप से मुलाक़ात की, भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उपशीर्षक है, प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने की ट्रंप की कोशिशों की तारीफ़ की और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खुला रखने के महत्व पर ज़ोर दिया; ट्रंप ने मोदी की तारीफ़ की और कहा कि अमेरिका और भारत व्यापार समझौते के ‘बहुत करीब’ हैं। दि एशियन एज और आगे है। लीड का शीर्षक है, मोदी, ट्रम्प ने ऊर्जा, व्यापार, रक्षा पर बात की; द्विपक्षीय संबंधों की नई शुरुआत। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक वही है जो हिन्दुस्तान टाइम्स का है – भारत पर हमला हुआ तो हम साथ : ट्रम्प। अखबार ने मोदी की पूरी प्रशंसा को शीर्षक के रूप में बड़े फौन्ट में अखबार पर चिपका दिया है। बैनर खबर है सो अलग। दैनिक भास्कर में खबर शीर्षक वही है लेकिन चार कॉलम में ही। कुल मिलाकर यहां भी वही सब है लेकिन करीब आधी जगह में। देशबन्धु में उद्धव सेना में एक और टूट की अटकलें लीड है। यहां एक खबर का शीर्षक है, राहुल ने कोटा से छेड़ा देशव्यापी आंदोलन, बोले देश की शिक्षा व्यवस्था वसूली तंत्र बन गई है। कहने की जरूरत नहीं है कि यह एक जरूरी खबर है, राहुल गांधी के कार्यक्रम का हर संभव विरोध हुआ उन्हें रोकने की कोशिश हुई। फिर भी कार्यक्रम हुआ तो उसकी पहले पन्ने पर चर्चा नवोदय टाइम्स में भी है। अमर उजाला भी बाकी सभी अखबारों जैसा है। वैसे, मुझे मालूम नहीं है कि इनमें असली कौन है और कौन नकल करता है। या सब एक ही विज्ञप्ति से लिखते हैं।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन