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आज के अखबार : अब न्यूजीलैंड से मुक्त व्यापार करार का प्रचार लेकिन अमेरिका के मामले में सन्नाटा

संजय कुमार सिंह

आज मेरे कई अखबारों की लीड भारत व न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार करार को अंतिम रूप देने पर सहमति की खबर है। इसके साथ प्रचार यह भी है कि 15 साल में 20 अरब डॉलर का निवेश आएगा। हाल में ओमान के साथ ऐसे ही करार की खबर आई थी लेकिन अमेरिका के साथ होने वाला व्यापक करार अटका हुआ है। उसकी कोई खबर नहीं है। कोलकाता के अखबार द टेलीग्राफ ने लिखा है कि न्यूजीलैंड के साथ हुए करार में भारत के डेयरी क्षेत्र को अलग रखा गया है। इसी खबर में कहा गया है कि अमेरिका भारत के कृषि और डेरी क्षेत्र में प्रवेश चाहता है और इसीलिए अमेरिका से करार अटका हुआ है। लेकिन अमर उजाला ने यह जरूर बताया है कि पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि भारत-न्यूजीलैंड के बीच सिर्फ नौ महीनों में एफटीए पर बातचीत का सफल समापन ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को गहरा करने की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और साझा महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। यह एफटीए बेहतर बाजार पहुंच और निवेश प्रवाह को बढ़ावा देगा, साथ ही नवप्रवर्तकों, उद्यमियों, किसानों, छात्रों और युवाओं के लिए अनेक अवसर पैदा करेगा। एक और खबर है, भारत अब तक 18 देशों के साथ कर चुका एफटीए। इसके अनुसार, भारत ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के मकसद से अब तक 18 मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। थाईलैंड, सिंगापुर, मलयेशिया, कोरिया, इनमें 10 आसियान देश – श्रीलंका, भूटान, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूएई व मॉरीशस हैं। इनके अलावा चार यूरोपीय देशों के ईएफटीए (आइसलैंड, लिंकैटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड), ब्रिटेन और ओमान के साथ व्यापारिक समझौते भी शामिल हैं। इस साल यह तीसरा एफटीए है। इससे पहले ब्रिटेन और ओमान से इसी साल मुक्त व्यापार समझौते हुए हैं।

द टेलीग्राफ की खबर, उद्योग और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के हवाले से है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एफटीए में डेयरी पर कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है। भारत चाह रहा है कि डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में कोई मुफ्त आयात न हो ताकि स्थानीय किसानों और छोटे डेयरी उत्पादकों की रक्षा हो सके। लेकिन अखबारों के लिए प्रधानमंत्री का प्रचार खबर देने से ज्यादा महत्वपूर्ण है। वह भी तब जब न्यूज़ीलैंड के नेताओं ने कहा है कि भारत ने डेयरी जैसे मुख्य निर्यात क्षेत्रों को एफटीए में शामिल नहीं किया है इसलिए न्यूज़ीलैंड को इसका उतना फायदा नहीं होगा। जो भी हो, खबर तो खबर है लेकिन यह सरकार और प्रधानमंत्री का प्रचार भी है। गौरतलब है कि न्यूजीलैंड भी ओमान की तरह 50-55 लाख की आबादी वाला देश है। यह अलग बात है कि प्रति व्यक्ति आय अच्छी होने के कारण यह बड़ा बाजार है वरना हमारे यहां तो 80 करोड़ लोग मुफ्त राशन पर जी रहे हैं। एफसीआरए नियमों की सख्ती के कारण विदेशी दान व चन्दा लेकर जनसेवा करना मुश्किल बना दिया गया है। मनरेगा को जी राम जी बनाने से उधर भी गड़बड़ की आशंका है। भले यह दावा किया जा रहा है कि अब 100 की जगह 125 दिन काम दिया जाएगा लेकिन प्रधानमंत्री कौशल योजना के बारे में जो खबर छपी है उससे तो लगता है कि मनरेगा में बदलाव का मकसद भी वही हो सकता है। वरना असफलता के स्मारक को छेड़ने की जरूरत ही क्या थी।

जो भी हो, अमर उजाला की लीड का उपशीर्षक है, पीएम मोदी व न्यूजीलैंड के पीएम लक्सन ने फोन पर बातचीत के बाद एलान किया। इसके बराबर में छपी खबर का शीर्षक है, साइबर ठगी के शिकार पूर्व आईजी ने खुद को गोली मारी। खबर के अनुसार, पूर्व आईजी प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री और वित्त मंत्री के नाम नोट लिखकर बताया था कि वे धोखेबाजों के गिरोह के शिकार हो गए हैं। यह आश्चर्यजनक है कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ठगी का शिकार हो गया और इतना लाचार था कि उसे आत्महत्या की कोशिश करनी पड़ी। दूसरी ओर, हाल में खबर थी कि नोएडा पुलिस ने महिला वकील को 14 घंटे कैद रखकर बदसलूकी की। नोएडा के थाने पर इस आरोप के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज मांगे हैं। दोनों दो अलग घटनाएं हैं। एक दूसरे से कोई संबंध नहीं है। फिर भी देश में कानून व्यवस्था का हाल तो बताते हैं। नोएडा वाली खबर पुरानी है लेकिन पहले पन्ने पर नहीं दिखी थी जबकि पूर्व आईजी की खुदकुशी की कोशिश अमर उजाला में पहले पन्ने पर प्रमुखता से है। और भी कई अखबारों में है। इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने पर छपी एक खबर के अनुसार, उत्तर प्रदेश पुलिस ने हत्याकांड के आरोपियों के खिलाफ मामला वापस लेने की अपील की है। यह 2015 का मामला है जब दिल्ली के पास दादरी में मोहम्मद अखलाक की हत्या कर दी गई थी। न्यूजीलैंड के साथ करार की यह खबर देशबन्धु में तो लीड नहीं है लेकिन तीसरे हिन्दी अखबार नवोदय टाइम्स में लीड है।

अंग्रेजी अखबारों में यह हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस, द हिन्दू (कल मैंने लिखा था दोनों अलग हैं। आज सरकारी प्रचार में एक नजर आ रहे हैं) और दि एशियन एज में लीड है। देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, अरावली पर्वत बचाने के लिए आंदोलन तेज। उपशीर्षक है, राजस्थान के कई शहरों में पुलिस-प्रदर्शनकारियों में भिड़ंत। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, तनाव बढ़ा तो बांग्लादेश ने दिल्ली में वीजा परिचालन बंद किया। टाइम्स ऑफ इंडिया में एक और महत्वपूर्ण खबर है, दिल्ली के पटपड़गंज क्षेत्र में एक महिला भाजपा नेता रेणु चौधरी ने किसी विदेशी को धमकी दी है, हिन्दी सीखो या ….। चौधरी पार्षद हैं और विदेशी को धमकी देने का उनका वीडियो वायरल है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने यह खबर इसी आधार पर दी है। इसके साथ छपी खबर बताती है कि दिल्ली सरकार के आईआईआईटीके निदेशक रंजन बोस ने इस्तीफा दे दिया है। संस्थान ने विदेशी संस्थाओं के साथ तीन  अनुसंधान और फंडिग करार किए थे। एलजी कार्यालय ने उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया जिसमें कहा गया था कि वे अपने वैधानिक कर्तव्य और जिम्मेदारियों को पूरा करने में नाकाम रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने न्यूजीलैंड के साथ करार की खबर को दो कॉलम में छापा है और साथ में बताया है कि यह क्यों महत्वपूर्ण है। भारत-ओमान का वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार लगभग $10 बिलियन का है, जो न्यूज़ीलैंड से काफी बड़ा है। ओमान छोटा बाजार है लेकिन यह वैश्विक ऊर्जा और समुद्री मार्ग के लिए रणनीतिक है। अमेरिका ने भारत से आयात पर उच्च टैरिफ (लगभग 50% तक) लगाया हुआ है। इससे निर्यात प्रभावित हुआ है। भारत-अमेरिका के बीच एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौता पूरी तरह फाइनल नहीं हुआ है और अपेक्षित टैरिफ व सेवा-उपबंधों पर बातचीत जारी है। इसका मतलब यह है कि बड़े बाजार (जैसे अमेरिका) तक पहुंच उतना आसान नहीं है, इसलिए भारत एफटी के ज़रिए दूसरे बाजारों को प्राथमिकता दे रहा है। अमेरिका जैसे “कठिन और अनिश्चित” बाजार के बजाय छोटे, स्थिर, नियम-आधारित देशों से मुक्त व्यापार करारकर रहा है। भारत ने सीखा है कि: बहुत बड़े बाजार खतरनाक भी हो सकते हैं। इसलिए बाजारों का विविधीकरण ज़रूरी है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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