ताजे ताजे बने डिजिटल चैनल न्यूज़ पिंच का एक वीडियो जबर तरीके से वायरल हो रहा है। 1 मिनट 21 सेकंड अवधि के इस वीडियो में रुबिका भी हैं, चित्रा का नाम भी है। अभिनव पांडेय के श्रीमुख से तगड़े तगड़े मंत्रोच्चार निकल रहे हैं। कौन सा न्यूज़ चैनल है जिसका नाम आया है। कौन सी एंकर है जिसे खबर का एबीसीडी भी नहीं आता है। इस वीडियो में जितना भी जो कुछ है आज का सबसे धमाकेदार क्लिप है।
नीचे लोगों की टिप्पणियों के साथ वीडियो भी देखिए, पर हेडफोन लगाकर। गालियां एकदम फ्लो में दी गई हैं…..
अरविंद चोटिया-
शब्दों पर जाने वाले शब्दों पर जा रहे हैं। भावनाओं पर जाने वाले भावनाओं पर जा रहे हैं।
नया जमाना है साहब, चैनल भी नया है। अभिनव पांडे का दौर आज से ही शुरू हुआ मान लिया जाना चाहिए।
कड़ी मेहनत करके बनाए गए वीडियो वायरल हों या ना हों, कोई गारंटी नहीं लेकिन बिना किसी प्रयास के बने वीडियो वायरल हो जाते हैं।
एक और लफड़ा लोड हो गया है। दल्लनटॉप छोड़ने के बाद न्यूज पिंच के नाम से यूट्यूब चैनल चलाने वाले अहंकारी अभिनव पांडे ने.. महिला पत्रकारों पर अमर्यादित टिप्पणी की। माना कि ये महिलाएं गोदी पत्रकार हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि… आप चित्रा त्रिपाठी को जाहिल, गंवार और अनपढ़ जैसे शब्द बोलेंगे..!! आगे कहते हैं कि 4 लाईन ख़ुद से बोल नहीं पाएगी अगर हम जैसे लिख कर ना दे तो।
– प्रो, इलाहाबादी
मंजीत घोषी-
कृपया हेडफोन लगाएं
अभिनव पांडे – “MC ये एंकर Bsdk के हमारा ही तो लिखा पढ़ते थे, जब मैं ABP news में काम करता था तो देखता था ये रूबिका चित्रा जैसो का समय चल रहा है हमारा तो दौर आयेगा ये साले अनपढ़ गवार जाहिल BC”
Note – चित्रा और रुबिका को नफ़रत भरा शो ये लिखते थे…. मोज कर दी।
मीना कोटवाल-
भारतीय मीडिया और समाज ऐसा ही है, अभिनव पांडे या चित्रा त्रिपाठी को दोष देने से पहले ख़ुद से भी पूछिए-
एक वीडियो वायरल है जिसमें अभिनव पांडे अपने चैनल पर चित्रा त्रिपाठी और रबिका लियाक़त के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, इतना ही नहीं वे माँ-बहन की गालियाँ देते हुए भी दिख रहे हैं.
अभिनव पांडे को शायद अंदाज़ा नहीं था कि उनकी गाली-गलौच की वीडियो का LIVE प्रसारण हो रहा है, तभी वे भी पूरे इत्मीनान और पुरुषवादी ठसक के साथ महिलाओं के अंग विशेष को टार्गेट कर लगातार गालियाँ बकते रहे हैं.
दरअसल जैसा हमारा समाज है, अभिनव भी यहाँ वैसा ही बिहेव कर रहे हैं. भले ही सोशल मीडिया पर अमूमन लोग आदर्शवादी बातें करते हुए दिखते हैं लेकिन निजी ज़िंदगी में महिलाओं और जातियों पर आधारित गालियाँ देना भारत में बेहद ही आम है.
बात-बात पर ना सिर्फ़ यहाँ माँ-बहन की गाली आम है, बल्कि जाति का गुमान और इनपर आधारित गाली खाने के मेज़ पर भी धड़ल्ले से दी जाती है. लेकिन दुखद पहलू बस यह है कि भारतीय समाज ने इसको अब जेनरलाइज कर दिया है. फिर लोग-बाग यह भी चर्चा करते फिरते हैं कि महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ता जा रहा है…
खैर, मेनस्ट्रीम मीडिया में काम कर रहे व्यक्तियों से पत्रकारिता की उम्मीद पाले लोग बहुत ही मासूम और भोले हैं. वे कोई पत्रकारिता नहीं बल्कि प्रॉफिट पाने और प्रोफाइल बनाने के लिए हर-गलत सही काम को अंजाम दे रहे हैं.
दूसरी बात कि जबतक आपलोग स्वतंत्र और जनवादी पत्रकारिता को सपोर्ट नहीं करेंगे, तबतक भारत का मीडिया यूँ ही गर्त में गिरता जाएगा. आख़िर चौथे खंभे को बचाने की कुछ ज़िम्मेवारी आम नागरिकों की भी है ही!
ऐसे तमाम मीडिया संस्थानों का सपोर्ट कीजिए जो ग्राउंड ज़ीरो पर जाकर ना सिर्फ़ सरकार-सिस्टम के कारनामों का भंडाफोड़ कर रहे हैं बल्कि उनसे टकराने का साहस भी दिखा रहे हैं. जिनके इंपैक्टफूल जर्नलिज़्म की वजह से बदलाव आ रहा है. दूसरों की ग़लतियाँ खोजने से पहले कभी-कभी ख़ुद के भीतर भी झांकना ठीक रहता है…
विवेक कुमार-
न्यूज़ पिंच के पत्रकार अभिनव पांडेय की एक वीडियो वायरल हो गई जिसमे वो आपसी बातचीत में गाली गलौज का इस्तेमाल करते हुए दिख रहे हैं।
मेरा व्यक्तिगत मानना है कि इस तरह किसी की वीडियो को शतिराना तरीके से रिकॉर्ड करना उसके बाद वायरल कर देना ग़लत है।
सत्ता के सामने जब कई जगह पत्रकार दण्डवत हो जाते हैं वहाँ भी तुमने सीना तानकर सत्ता की आँखों में आँख डाल कर सवाल किया है।
गाली का समर्थन नहीं करता हूँ लेकिन आपकी पत्रकारिता को सैलूट जरूर कर रहा हूँ। More power to you Abhinav Pan भाई…
https://twitter.com/IAmKrishnaaX/status/1989036357549978002?t=vOcfBIuukHoIdR5cCxHEEg&s=08



