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गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पत्रकार अभिसार शर्मा की अंतरिम सुरक्षा 22 अक्टूबर तक बढ़ाई

गुवाहाटी। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पत्रकार अभिसार शर्मा को गिरफ्तारी और चार्जशीट जैसी किसी भी जबरन कार्रवाई से मिली अंतरिम सुरक्षा की अवधि 22 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। यह राहत उन्हें उस एफआईआर के खिलाफ दायर याचिका में मिली है, जिसे असम पुलिस ने दर्ज किया था।

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि शर्मा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर “सांप्रदायिक राजनीति” करने का बयान दिया। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 (राष्ट्र की संप्रभुता को खतरे में डालना), 196 (समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना) और 197 (राष्ट्रीय एकता व सुरक्षा के विरुद्ध आरोप) के तहत दर्ज किया गया है।

जस्टिस मृदुल कुमार कालिता की बेंच ने कहा कि मामला जांच योग्य है और इसके लिए अपराध शाखा की केस डायरी तलब की जाए। शर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कमल नयन चौधरी ने दलील दी कि याचिकाकर्ता एक पत्रकार हैं और उन्होंने केवल सरकार की नीतियों की आलोचना की है, जिसे अपराध नहीं माना जा सकता।

उन्होंने तर्क दिया, “अगर हर आलोचना को देशद्रोह करार दिया जाएगा तो यह लोकतंत्र के लिए काला दिन होगा। आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।”

वहीं शिकायतकर्ता आलोक बरुआ ने आरोप लगाया कि शर्मा ने जानबूझकर सरकार की छवि धूमिल करने और सांप्रदायिक तनाव फैलाने के इरादे से वीडियो बनाया। आरोप है कि वीडियो में शर्मा ने “राम राज्य” का मजाक उड़ाया और सरकार पर हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का सहारा लेने का आरोप लगाया।

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