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सियासत

Adani Files : 300 करोड़ डॉलर का ऑफशोर खेल और भारतीय नियामकों की संदिग्ध चुप्पी!

शीतल पी सिंह-

ADANI FILES… 300 करोड़ डॉलर का ऑफशोर खेल, और भारत के नियामकों को “साँप क्यों सूँघ गया?”

यह कोई अचानक हुआ खुलासा नहीं है। यह कोई “विदेशी साज़िश” भी नहीं है। यह जानकारी काफ़ी समय से पब्लिक डोमेन में मौजूद है—लेकिन भारत की नियामक एजेंसियाँ ऐसे सोई रहीं, मानो उन्हें साँप सूँघ गया हो।

अरबों की गुप्त हिस्सेदारी — नाम किसी और का, फ़ायदा किसी और को? जांच रिपोर्टों के मुताबिक, 2023 तक अडानी परिवार से जुड़े लोगों ने लगभग 3 अरब डॉलर के अडानी शेयर विदेशी हेज फंड्स के ज़रिये दबा कर रखे थे—

  • यूएई के नासिर अली शबान अहली — 2.02 अरब डॉलर
  • ताइवान के चांग चुंग-लिंग — 1.02 अरब डॉलर

काग़ज़ों में ये “स्वतंत्र विदेशी निवेशक” हैं, असल में—अडानी के भरोसेमंद चेहरे।

ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स: जहाँ सच कपड़े उतार देता है,सारा पैसा गया British Virgin Islands (BVI) की शेल कंपनियों में— Gulf Asia Trade & Investment Ltd, Lingo Investment Ltd।

BVI का मतलब साफ़ है: “पूछो मत, बताओ मत, दिखाओ मत।” और भारतीय नियामक? सब कुछ देखते हुए भी अनदेखा।

स्विट्ज़रलैंड में कार्रवाई, भारत में सन्नाटा। चांग चुंग-लिंग पर 2021 से स्विट्ज़रलैंड में आपराधिक जांच चल रही है। मनी लॉन्ड्रिंग और दस्तावेज़ों की जालसाज़ी का आरोपी है। अगस्त 2024 में स्विस फेडरल क्रिमिनल कोर्ट ने उनकी 31 करोड़ डॉलर से ज़्यादा की संपत्ति फ्रीज़ कर दी।

यानी— स्विट्ज़रलैंड को शक हुआ तो अदालत ने कार्रवाई की संपत्ति ज़ब्त हुई। और भारत में? SEBI, ED, CBI — सबको जैसे सामूहिक ध्यान-समाधि लग गई।

बैंक रिकॉर्ड बताते हैं कि ये निवेश: “निजी और पेशेवर रिश्तों” के आधार पर किए गए। अडानी से जुड़ी इकाइयों के निर्देशों पर ट्रेड हुए यानी यह कोई रिटेल निवेशक का रिस्क नहीं, बल्कि नियंत्रण छुपाने की संगठित रणनीति है।

यही बातें पहले Hindenburg Research भी कह चुका है— शेयर कीमतों में हेराफेरी, फ्री फ्लोट का भ्रम, और ऑफशोर नेटवर्क।

नेटवर्क इतना गहरा कि नियामक डूब जाएँ। दुबई से पैसा घुमा कर बरमूडा के हेज फंड्स में और उन्हीं फंड्स में अडानी के शेयर ठूँस दिए गए, बीच-बीच में Vinod Adani का नाम भी विदेशी हिस्सेदारियों में उभरता है।

DRI की पुरानी जांचों (हीरा आयात, ओवर-इनवॉइसिंग) में वही चेहरे, वही कंपनियाँ, लेकिन भारत में हर बार जवाब एक ही: “सब कुछ नियमों के भीतर है।”

जब यह सब मीडिया में छपा,अंतरराष्ट्रीय जांचों में सामने आया, विदेशी अदालतों में साबित हुआ तो फिर भारत की एजेंसियाँ किसका इंतज़ार कर रही थीं?

क्या उन्हें: नोटिस नहीं मिला? फ़ाइल नहीं दिखी? या ऊपर से फ़ोन आ गया?

यह सिर्फ़ अडानी की कहानी नहीं है। यह उस सिस्टम की कहानी है जहाँ—अरबों डॉलर विदेश में पार्क होते हैंऔर देश के नियामक “देशभक्ति” के पोस्टर चिपकाते रह जाते हैं।

ये सारे तथ्य OCCRP और उसके साझेदारों की खोजी रिपोर्टों पर आधारित हैं। अडानी समूह इन आरोपों को नकारता रहा है—लेकिन अब सवाल सिर्फ़ अडानी से नहीं, भारत के नियामकों से भी हैं।


सौमित्र रॉय-

भारत के राष्ट्रसेठ गौतम अदानी के शेयरों में कंपनी के दो छिपे हुए साझेदारों- चांग चुंग लिंग और संयुक्त अरब अमीरात के नासेर अली शाबान अहली के जरिए ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड से हवाला के माध्यम से 3 बिलियन डॉलर झोंके गए।

स्विस बैंक ने जांच बिठा दी है। इटली में भी जांच हुई है। चांग और अहली दोनों ने लिखित बयान दिया है कि उनके अदानी लाला से पर्सनल और प्रोफेशनल रिश्ते हैं।

लेकिन आप घबराएं नहीं। अदानी घूसखोर, झूठा और एक नंबर का दलाल है तो क्या अमीर है। वह भारत का विकास कर रहा है।

इतने बड़े राष्ट्रभक्त का तलवा तो क्या, भारत की जनता उसका पिछवाड़ा भी चाटेगी।

आपको डरना नहीं, बस ‘अपने को क्या’ कहते हुए सो जाना है।

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