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दिल्ली

अडानी ग्रुप ने गिरवा दी इन पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर गाज

नई दिल्ली। रोहिणी स्थित एक अदालत ने शनिवार को अडानी ग्रुप से जुड़ी कथित “मानहानिकारक और असत्यापित” खबरों के प्रकाशन पर अस्थायी रोक लगा दी। अदालत ने पांच पत्रकारों और तीन वेबसाइटों को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक वे ऐसी किसी भी रिपोर्ट, पोस्ट या सामग्री का प्रसार न करें।

स्पेशल सिविल जज अनुज कुमार सिंह ने यह अंतरिम आदेश अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की याचिका पर दिया। अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया मामला अडानी ग्रुप के पक्ष में है और निरंतर नकारात्मक खबरों व पोस्ट्स से उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।

जिन पत्रकारों पर यह रोक लगाई गई है, उनमें शामिल हैं:

  • परंजॉय गुहा ठाकुरता
  • रवि नायर
  • अबीर दासगुप्ता
  • आयुषकांत दास
  • आयुष जोशी

जबकि जिन वेबसाइटों पर रोक लगी है, वे हैं:

  • pranjoy.in
  • adaniwatch.org
  • adanifiles.com.au

अदालत की टिप्पणी

जज ने कहा कि निरंतर फॉरवर्डिंग, री-ट्वीट और ट्रोलिंग से कंपनी की छवि को गहरी क्षति पहुंच सकती है और मीडिया ट्रायल का माहौल बन सकता है। आदेश में कहा गया:

“न्याय के हित में यह पर्याप्त होगा कि प्रतिवादी नंबर 1 से 10 को अगली सुनवाई की तारीख तक वादी की प्रतिष्ठा को कथित रूप से धूमिल करने वाली असत्यापित, निराधार और प्रत्यक्ष रूप से अपमानजनक रिपोर्टों के प्रकाशन/वितरण/प्रसारण से रोका जाए।”

अडानी ग्रुप के तर्क

याचिका में आरोप लगाया गया कि पत्रकार और वेबसाइटें “एजेंडा संचालित” तरीके से अडानी ग्रुप, उसके संस्थापक और चेयरमैन के खिलाफ झूठी और अपमानजनक सामग्री लगातार प्रकाशित कर रहे हैं। यह भी कहा गया कि सामग्री न केवल वेबसाइटों पर बल्कि सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी तेजी से फैलाई जा रही है।

कंपनी ने दावा किया कि इन प्रकाशनों से उसके निवेशकों का भरोसा टूटा, शेयर बाजार में दहशत फैली और भारी वित्तीय नुकसान हुआ।

अदालत का आदेश

प्रतिवादी अपने-अपने लेखों, सोशल मीडिया पोस्ट और ट्वीट्स से अडानी ग्रुप के खिलाफ सामग्री को तुरंत हटाएं। यदि यह तुरंत संभव न हो, तो पांच दिनों के भीतर हटाना अनिवार्य है।

अदालत ने आईटी नियम 2021 (नियम 3) का हवाला देते हुए कहा कि मध्यस्थों (इंटरमीडियरीज़) को ऐसी सामग्री हटाने के लिए सावधानी बरतनी होगी और आदेश मिलने के 36 घंटों के भीतर कार्रवाई करनी होगी।

अगली सुनवाई तक स्थिति

मुकदमे में समन जारी करते हुए अदालत ने कहा कि यदि राहत न दी जाती तो कंपनी को “अपूरणीय क्षति” होती। मामले की अगली सुनवाई तक यह अंतरिम रोक प्रभावी रहेगी।

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