लोकसभा चुनाव 2024 में आरा सीट से हार के बाद पूर्व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने अपनी ही पार्टी और नीतीश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि भागलपुर पावर प्रोजेक्ट के आवंटन में अनियमितताओं से राज्य को करीब 6,200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सिंह ने इस मामले में अडानी पावर का नाम लेते हुए कहा कि प्रोजेक्ट की लागत और दरों में हेराफेरी की गई।
हालांकि, अडानी पावर ने उनके आरोपों को पूरी तरह “भ्रामक और तथ्यहीन” बताते हुए कहा कि परियोजना पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत बिहार सरकार की शर्तों के अनुसार दी गई थी। सिंह ने भाजपा नेतृत्व पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी उनके खिलाफ काम कर रही है और चाहें तो उन्हें निकाल सकती है, लेकिन वह “सच बोलने से पीछे नहीं हटेंगे।”
मुकेश कुमार-
मोडानी मीडिया बिहार के 62000 करोड़ के घोटाले को निगल गया। ध्यान रखिए कि ये घोटाला राहुल गाँधी या विपक्ष के किसी नेता ने उजागर नहीं किया था, बल्कि बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह डंके की चोट पर इसे सामने लाया और पीछे नहीं हटे।
एबीपी न्यूज़ ने तो इसे उसी दिन डिलीट कर दिया। बड़े-बड़े अख़बारों और चैनलों ने इसे कवर ही नहीं किया। कुछ ने कवर किया तो घोटाले की जाँच करने के बजाय उसे संदेह बताते हुए ताकि मोदी-अडानी-नीतीश पर कोई असर न पड़े।
ज़्यादातर मोडानी मीडिया ने इसे ऐसे पेश किया मानो आर. के. सिंह ने निजी खुन्नस में भंडाफोड़ किया हो। हालाँकि आर. के. सिंह लगातार अपने दावे पर डटे रहे और पूरा हिसाब देते रहे।
सिंह ने सीबीआई जाँच की मांग भी की मगर उसे भी मीडिया खा गया। मोदी और नीतीश सरकार की खामोशी पर भी उसने कोई सवाल नहीं उठाए। ऐसे ही घोटालों को दबा-दबाकर बीजेपी दावा करती है कि मोदी राज में कोई घोटाला नहीं हुआ।
दयाशंकर मिश्रा-
ख़बर ग़ायब करने की कला….
बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह के 62000 करोड़ के कथित घोटाले की ख़बर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में पलट गई है । इसका शीर्षक आरके सिंह पर ही सवाल उठा रहा है, अडानी ग़ायब हो गए। ख़बर का शीर्षक निबंध की तरह लिखा गया है।

अमृत काल में यह साहस की पत्रकारिता है! ख़बर का शीर्षक बीजेपी नेता पर ही सवाल उठा रहा है। आरके सिंह के राजनीतिक भविष्य पर टिप्पणी कर रहा है; अडानी के घनघोर भ्रष्टाचार को विलुप्त कर दिया गया है।



