ज्ञानेंद्र अवस्थी-
अजीत अंजुम सिर्फ एक पत्रकार नहीं हैं, वे आज के दौर में भारतीय लोकतंत्र की उस पताका को थामे हुए खड़े हैं जिसे सत्ता, सिस्टम और सेंसरशिप ने बार-बार गिराने की कोशिश की है।
FIR एक डर का औजार है, लेकिन जब पत्रकार डरने से इनकार कर दे, तो वह जनपक्षधरता का प्रतीक बन जाता है। अजीत जी ने जिस जज़्बे और तथ्यात्मक ताकत के साथ SIR प्रक्रिया की खामियों को उजागर किया है, वह किसी व्यक्तिगत साहस का नहीं, पत्रकारिता के मूल धर्म का निर्वाह है।
आज जब ज़्यादातर मीडिया सत्ता के साथ खड़ा है, तब अजीत अंजुम अपने कैमरे और कलम के साथ जनता के साथ खड़े हैं। यही सच्ची पत्रकारिता है। हम उनके साथ हैं—कानूनी लड़ाई में भी, नैतिक समर्थन में भी। यह लड़ाई अब केवल अजीत अंजुम की नहीं, हर उस नागरिक की है जो वोट को अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व मानता है।
बेखौफ पत्रकारिता पर हमला:
अजीत अंजुम के समर्थन में बेगूसराय में भाकपा का जोरदार प्रदर्शन
बेगूसराय – वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम पर दर्ज फर्जी मुकदमे के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने मंगलवार को ज़ोरदार प्रतिरोध मार्च निकालते हुए लोकतंत्र की रक्षा की हुंकार भरी। ज़िला कार्यालय से निकले जुलूस ने शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए पटेल चौक पर सभा में तब्दील होकर सरकार की तानाशाही के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा के पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि “बेगूसराय के बेटे और अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त पत्रकार अजीत अंजुम ने मतदाता सूची में हो रही गड़बड़ियों और नागरिकों को वोट के अधिकार से वंचित करने की साज़िश का पर्दाफाश किया है।” उन्होंने आरोप लगाया कि अजीत अंजुम पर दर्ज फर्जी एफआईआर लोकतंत्र पर हमला है।
सरकार ने साबित किया कि देश आपातकाल की ओर बढ़ रहा है – भाकपा
भाकपा नेताओं ने बिना शर्त मुकदमा वापस लेने की माँग करते हुए चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज़ होगा। पार्टी नेता अनिल कुमार अंजन ने कहा, “सरकार ने अजीत अंजुम पर झूठा मुकदमा दर्ज कर यह स्पष्ट कर दिया है कि देश एक अघोषित आपातकाल से गुजर रहा है।”
सभा में उपस्थित नेताओं ने एक स्वर में कहा कि हर लोकतंत्रप्रेमी नागरिक का कर्तव्य है कि वह तानाशाही के खिलाफ आवाज़ उठाए। कार्यक्रम में भाकपा नेता राजेन्द्र चौधरी, प्रह्लाद सिंह, एआईएसएफ के राज्य अध्यक्ष शंभू देवा, अशोक सिंह, मुखिया सुरेन्द्र पासवान, वरिष्ठ अधिवक्ता राज कुमार राय सहित कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
नारे गूंजे: “हिटलरशाही नहीं चलेगी, जनतंत्र पर हमला बंद करो”
प्रदर्शन के दौरान “हिटलरशाही नहीं चलेगी”, “मोदीशाही नहीं चलेगी”, “जनतंत्र पर हमला बंद करो” जैसे नारे लगाए गए, जिससे पूरा शहर गूंज उठा।



