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उत्तर प्रदेश

माफिया अखिलेश दुबे पर बुलडोज़र एक्शन, 500 करोड़ की स्कूल की जमीन 41 साल बाद कब्जा मुक्त

कानपुर। कुख्यात माफिया वकील और न्यूज़ चैनल मालिक अखिलेश दुबे पर मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक वार हुआ। कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने साकेत नगर स्थित करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन पर चला आ रहा 41 साल पुराना कब्जा हटाते हुए भूखंड को मुक्त कराया। यह वही जमीन है जो वर्ष 1984 में जवाहर विद्या समिति को स्कूल निर्माण के लिए आवंटित की गई थी।

बुलडोज़र से ढही बाउंड्री व पार्क

सुबह भारी पुलिस बल और पांच बुलडोज़रों के साथ केडीए की टीम भूखंड संख्या 70 पर पहुंची। एक घंटे चले अभियान में अवैध रूप से बनाई गई पार्क की बाउंड्री, फुटपाथ और लगाए गए पेड़-पौधों तक को ध्वस्त कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश बना आधार

जमीन पर लंबे समय से कब्जा जमाए बैठे अखिलेश दुबे और उनके साथियों के खिलाफ जवाहर विद्या समिति कई वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रही थी। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए केडीए को कब्जा हटाकर जमीन समिति को सौंपने का आदेश दिया। बीते वर्ष भी कार्रवाई की कोशिश हुई थी, लेकिन स्थानीय महिलाओं के विरोध के चलते टीम को लौटना पड़ा था। अब अखिलेश दुबे के जेल में होने के बाद प्रशासन ने दोबारा अभियान चलाकर कब्जा हटवा दिया।

सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

संभावित विरोध को देखते हुए किदवई नगर समेत छह थानों की पुलिस, दो प्लाटून पीएसी और भारी फोर्स मौके पर तैनात की गई थी। कुछ महिलाओं ने कार्रवाई रोकने की कोशिश की, लेकिन महिला पुलिस बल ने स्थिति को संभाल लिया। थाना प्रभारी किदवई नगर धर्मेंद्र कुमार राम ने बताया कि जमीन को पूरी तरह से कब्जा मुक्त करा दिया गया है।

सियासत में गरमाहट

जमीन खाली कराने की कार्रवाई पर राजनीति भी तेज हो गई है। हाल ही में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा था। वहीं पीड़ित प्रज्ञा त्रिवेदी ने कहा, “अखिलेश दुबे ने जमीन पर कब्जा कर हद पार कर दी थी। अब बुलडोज़र बाबा से पंगा लिया, जिसका नतीजा सबके सामने है।”

41 साल से अधर में लटकी यह जमीन आखिरकार समिति को सौंप दी गई है, जिसे लेकर इलाके में बड़ी चर्चा है.


अखिलेश की संपत्ति पर बुलडोजर चलने का वीडियो शेयर करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय लिखते हैं-

अखिलेश दुबे की संपत्तियों पर अंतत: चला बुलडोजर। कानपुर के साकेत नगर में करीब 500 करोड़ के कब्जे की जमीन बताई जा रही है।

टॉप सीक्रेट अरसे से यही सवाल उठा रहा था कि इस मामले में बुलडोजर को लकवा क्यों मार गया है? कानून व्यवस्था को शंकराचार्य के अद्वैत और कबीर की फक्कड़ी की तरह ही निस्पृह और निष्पक्ष होना चाहिए।

अगर आप बुलडोजर के पहियों पर भी अपने व्यक्तिगत राग का विराग और निजी द्वेष का चुंबकत्व मढ़ देंगे तो फिर किस बात का शासन करेंगे?


दुबे की संपत्ति पर बुलडोजर चलने के मामले में दैनिक भास्कर ने क्या कुछ लिखा छापा है- पढ़िए

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