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झारखंड

दैनिक भास्कर की चूक : जब अमन साहू रायपुर से रांची ले आया गया था तब पलामू में एनकाउंटर कैसे हो गया ?

सैय्यद शहरोज़ क़मर-

पहले किसी भी फ़ील्ड में प्रतिद्वंद्वी हुआ करते थे, शत्रु नहीं। लेकिन देखते-देखते प्रतिद्वंद्वी कब शत्रु समझा जाने लगा, पता ही ना चला! मीडिया में इसकी शुरुआत एक बड़े अख़बार समूह ने की। उसने प्रतिद्वंद्वी अख़बार को ‘शत्रु’अख़बार कहना शुरू किया। लेकिन बाज़ार का दबाव कहिए या सबसे पहले ख़बर देने की हड़बड़ी, ऐसी चूक की वजहें यही हैं, जैसा कुख्यात अपराधी अमन साहू के मामले में भास्कर की इस ख़बर में हुआ। और सवाल उठना ही था कि जब अमन साहू रायपुर से रांची ले आया गया था तब पलामू में एनकाउंटर कैसे हो गया ?

मुझे माया याद आती है। तब पत्रिकाओं का जलवा हुआ करता था। “माया” दमदार पत्रिका हुआ करती थी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री उन दिनों अर्जुन सिंह हुआ करते थे। कांग्रेस का कोई आयोजन ग्वालियर के पास डबरा में होना था। पत्रिका जब बाज़ार में पहुंचती, आयोजन को हो जाना था। माया ने छाप दिया कि डबरा में अर्जुन सिंह पहुंचे। ये हुआ, वो हुआ। जबकि हक़ीक़त ये थी कि आंधी के सबब वो कार्यक्रम ही नहीं हुआ, उसे स्थगित कर दिया गया था।

ऐसी भूल चूक हो जाती है।

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