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आज के अखबार : अमर उजाला में कश्मीर और महाराष्ट्र को छोड़कर बंगाल को प्रमुखता देना समझ में आता है? 

संजय कुमार सिंह

आज अमर उजाला की लीड है, पश्चिम बंगाल फिर शर्मसार, दो अस्पतालों में नर्स और 12 साल की बच्ची से छेड़छाड़। उत्तर 24 परगना और नादिया में दो नाबालिगों का यौन शोषण, तीन गिरफ्तार। यह दिलचस्प है कि बंगाल की जो खबर दिल्ली में लीड है वह कोलकाता के टेलीग्राफ में सिंगल कॉलम में है। यहां शीर्षक है, नर्स से मरीज की छेड़खानी के खिलाफ आंदोलन। हिन्दुस्तान टाइम्स में इस खबर का शीर्षक है, बंगाल के दो अस्पतालों में यौन हमलों के खिलाफ विरोध भड़का। आज नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, अदालतों में लंबित मामले बड़ी चुनौती :राष्ट्रपति मुर्मू। यही खबर इंडियन एक्सप्रेस में भी लीड है। इन दोनों खबरों से अलग, द टेलीग्राफ की लीड है, जूनियर डॉक्टर की पेन डाउन स्ट्राइक वापस ली गई। फ्लैग शीर्षक है, मरीजों की मौत की खबर के आलोक में जूनियर डॉक्टर्स ने विरोध प्रदर्शन को सघन नहीं करने की सीनियर्स की सलाह मानी। मुझे लगता है कि इन खबरों के मुकाबले नवोदय टाइम्स की सेकेंड लीड ज्यादा महत्वपूर्ण है और हेडलाइन मैनेजमेंट नहीं है। हालांकि, बहुत संभावना है कि इसी कारण दूसरी खबरें लीड बनी है और यह सिर्फ नवोदय टाइम्स में है।

आप जानते हैं कि महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग स्थित राजकोट किले में 17वीं शताब्दी के मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज की 35 फीट ऊंची प्रतिमा 26 अगस्त को गिरने से विवाद खड़ा हो गया है। इस प्रतिमा का अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 4 दिसंबर को नौसेना दिवस पर किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मूर्ति गिरने के लिये माफी मांगी है। तथ्य यह भी है कि कुछ महीने पहले मुंबई में एक भारी-भरकम विज्ञापन बोर्ड गिरने से 14 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 70 से ज्यादा घायल हुए थे। कहने की जरूरत नहीं है कि इसमें भी लापरवाही और भ्रष्टाचार ही कारण होगा। यही नहीं, उज्जैन के महाकाल लोक में स्थापित सप्त ऋषियों की सात में से छह प्रतिमाएं तेज हवा के कारण न सिर्फ गिर गईं बल्कि टूट भी गई थीं। यह पिछले साल मई की बात है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सात महीने पहले इनका लोकार्पण किया था और यह 856 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है। ऐस में प्रधानमंत्री ने सिर्फ शिवाजी महाराज की मूर्ति गिरने और टूटने के लिये माफी मांगी है और इसके बावजूद वहां नाराजगी है। यही नहीं वहां चुनाव भी होने हैं और भाजपा ने वहां कैसे सरकार बनाई और चलाई है, सो आप जानते हैं। यही नहीं, असामान्य समय पर शपथ दिलाने के लिए मजबूर किये गये राज्यपाल ने इस्तीफा भी दे दिया था।

यह सब सामान्य तौर पर गुजर गया या अब जब लोग इन्हें भूल चुके हैं या इसके लिए आंदोलन नहीं कर रहे हैं तो मीडिया में उस खबर को भी महत्व नहीं मिला है जिसके लिए प्रधानमंत्री ने माफी मांगी है और लोग इसके बाद भी संतुष्ट नहीं हैं। नवोदय टाइम्स की इस खबर का शीर्षक है, छत्रपति की प्रतिमा पर छिड़ा संग्राम। उपशीर्षक है, मुंबई में शरद पवार, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में एमवीए का मार्च। यह अलग बात है कि भाजपा ने कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किया और खबर उसकी भी छपी है। यही नहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिन्दे ने कहा है और वह भी अखबार में छपा है, औरंगजेब, अफजल खान का अनुकरण करते हैं उद्धव। आप जानते हैं कि महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार है फिर भी सरकार कई शहरों में प्रदर्शन कर रही है। लेकिन पश्चिम बंगाल में बलात्कार हत्या की जांच राज्य पुलिस से लेकर सीबीआई को दे दी गई और ममता बनर्जी ने जांच जल्दी पूरी करने और आंदोलनकारियों का साथ देने के लिए मार्च किया तो सवाल उठ रहे थे। महराष्ट्र में भाजपा के प्रदर्शन के खिलाफ सवाल नहीं है। 

नवोदय टाइम्स में एक खबर है, “अल्पसंख्यकों पर हमलों के बीच सरकार मू्र्क दर्शक: राहुल गांधी। यह खबर आज दूसरे अखबारों में (पहले पन्ने पर नहीं है)।  लेकिन, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सीजेआई के सामने मुद्दा उठाया और कहा कि दुष्कर्म के 32 साल बाद न्याय तो मुस्कान हो जायेगी खत्म खबर है (अमर उजाला)। आप जानते हैं कि इंडियन एक्सप्रेस ने कल अपने खिलाफ 37 साल पुराना मामला खत्म होने की खबर पहले पन्ने पर छापी थी, उससे पहले खबर थी कि 1984 के मामले में कांग्रेस नेता के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिये गये हैं। और गुजरात की बिलकिस बानो के बलात्कारियों को पहले ही छोड़ दिया गया था। ऐसे में राष्ट्रपति न्याय व्यवस्था पर जो बोल रही हैं वह आधा-अधूरा है। कल की ही एक खबर के अनुसार मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि, ‘जिला न्यायपालिका कानून के शासन का महत्वपूर्ण घटक और न्यायतंत्र की रीढ़ है।’ मैं नहीं कहता कि राष्ट्रपति के कहे को प्रमुखता नहीं मिलनी चाहिये। राष्ट्रपति अपने विवेक से जो भी मुद्दा उठायें वही महत्वपूर्ण हो जायेगा। लेकिन अखबारों को उसका उपयोग हेडलाइन मैनेजमेंट में नहीं करना चाहिये और करें तो रेखांकित किया ही जायेगा। मै वही कर रहा हूं।

सीजेआई ने कहा है कि जिला न्यायपालिका से जबरदस्त जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा की जाती है और इसे ‘न्यायपालिका की रीढ़’ कहना ही उचित है। उन्होंने आगे कहा कि कानूनी प्रणाली की रीढ़ को बनाए रखने के लिए हमें जिला न्यायपालिका को अधीनस्थ न्यायपालिका कहना बंद करना चाहिए। आजादी के 75 साल बाद अब समय आ गया है कि हम अंग्रेजों के जमाने की औपनिवेशिक और पराधीनता की मानसिकता को समाप्त कर दें। सभी पक्षों को पढ़ने के बाद यह स्पष्ट है कि न्यायपालिका के मामले में कुछ आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता है बहुत हुआ जैसी बातों से मामला खत्म नहीं होगा। दूसरी ओर, भिन्न अखबारों ने इस मामले के भिन्न पहलू अपने हिसाब से उजागर किये हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार कश्मीर घाटी में भाजपा आधी सीटों पर चुनाव नहीं लड़ रही है और दूसरे व तीसरे चरण के उम्मीदवारों में भी एक ही घाटी की सीट के लिये है। खबर के अनुसार इससे पार्टी में नाराजगी है। टिकट वितरण के सवाल पर जम्मू में दो पुराने नेता इस्तीफा दे चुके हैं। कश्मीर में भाजपा की यह हालत अनुच्छेद 370 हटाने और प्रधानमंत्री के यह कहने के बावजूद है कि ब्रह्मांड की कोई शक्ति 370 को वापस नहीं ला सकती है। मुद्दा यह नहीं है कि प्रधानमंत्री का कहना कितना सही है। मुद्दा यह है कि अयोध्या हार गये, कश्मीर में बुरा हाल है  तो लोकप्रियता ब्रांडिंग की बदौलत है या चुनाव आयोग की मेहरबानी?  ऐसे में आज टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड और सेकेंड दोनों गंभीर खबरें है लीड राजस्थान की है और सेकेंड लीड झारखंड की। हिन्दी के अखबारों में हिन्दी पट्टी की इन खबरों को वो महत्व नहीं दिया गया है। राजस्थान में एक रिटायर अधिकारी को अपने बच्चों को परीक्षा में मदद करने के आरोप में पकड़ा गया है तो झारखंड से खबर है कि कांसटेबल के 583 पदों के लिये 4,44,000 आवेदन हैं और फिटनेस टेस्ट के 11 दिनों में 11 मर गये। हिन्दुस्तान टाइम्स में असम में बाढ़ की खबर और फोटो सेकेंड लीड है। द हिन्दू में तेलंगाना में बाढ़ की खबर लीड है। मणिपुर में हिंसा फिर से भड़की कई अखबारों में है।

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