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आज के अखबार : अमेरिका से ‘कुट्टी’ नहीं हुई लेकिन अमेरिका जाने वाले पार्सल रोकेगा डाक विभाग

संजय कुमार सिंह

केंद्रीय विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा है, अमरिका से कुट्टी नहीं हुई है (नवोदय टाइम्स)। अमेरिकी टैरिफ को अनुचित बताते हुए उन्होंने कहा है कि वार्ता जारी है, लाइनें नहीं कटी हैं (इंडियन एक्सप्रेस)। दूसरी ओर, द हिन्दू और देशबन्धु की खबरों के अनुसार, डाक विभाग 29 से अमेरिका जाने वाले पार्सल लेना बंद कर देगा यानी डाक विभाग के जरिये अमेरिका पार्सल भेजना अस्थायी रूप से बंद रहेगा। अमेरिका ने 30 जुलाई को एक आदेश जारी कर 800 अमेरिकी डॉलर तक के मूल्य वाले सामानों के लिए शुल्क मुक्त छूट वापस ले ली है। (इसलिये) 29 अगस्त से अमेरिका को भेजे जाने वाले किसी भी मूल्य के सभी डाक सामान सीमा शुल्क आकर्षित करेंगे। यह अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम टैरिफ ढांचे के तहत होगा। अब 100 अमेरिकी डॉलर तक की उपहार वाली वस्तुएं ही शुल्क मुक्त रहेंगी। केवल अंतरराष्ट्रीय वाहक और अमेरिकी सीमा शुल्क की ओर से अनुमोदित अन्य योग्य पक्ष ही डाक शिपमेंट पर शुल्क वसूल और भुगतान कर सकते हैं। अमेरिका के लिए पार्सल स्वीकार नहीं करने के निर्णय का कारण यही है और तथ्य है कि दोनों खबर आज ही छपी हैं। टैरिफ जैसे गंभीर मामले पर एक तरफ विदेश मंत्री कह रहे हैं कि बातचीत जारी है दूसरी ओर, डाक विभाग ने अमेरिका के लिए पार्सल स्वीकार करना बंद करने का निर्णय लिया है। देशबन्धु ने इसे टैरिफ विवाद के बीच बड़ा फैसला कहा है। द हिन्दू की खबर के अनुसार, 25 अगस्त (यानी कल से) डाक विभाग चिट्ठियां, दस्तावेज और 100 डॉलर तक के उपहार छोड़कर अमेरिका के लिए हर तरह की डाक सामग्री की बुकिंग अस्थायी तौर पर निलंबित कर देगा। यह निर्णय अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी एक एक्जीक्यूटिव आदेश के आलोक में किया गया है। यह शुल्क मुक्त आयात समाप्त करने तथा 29 अगस्त से सीमा शुल्क डाटा और प्री-पेड शुल्क एकत्र करने के आदेश से  संबंधित है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर इस प्रकार है, रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने के खिलाफ मास्को से डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन पर निशाना साधने के कुछ ही दिनों बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोहराया कि अमेरिकी टैरिफ गैरवाजिब और अनुचित है। उन्होंने कहा कि इसे तेल से संबंधित मामले के रूप में गलत ढंग से पेश किया जा रहा है। उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि भारत कभी भी किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की रक्षा करने से समझौता नहीं करेगा। स्पष्ट है कि अमेरिका अपनी चलाये जा रहा है और अखबार यह बता रहा है कि विदेश मंत्री ने पहले भी निशाना साधा था और अब फिर कहा है। दूसरी ओर, अमेरिका जो कर रहा है  भारत उसे झेलने को मजबूर है, कह रहा है कुट्टी नहीं हुई है, वार्ता चल रही है पर नतीजा कुछ नहीं निकला है। अमेरिकी कार्रवाई के कारण डाक विभाग को पार्सल सेवा बंद करनी पड़ रही है। है। इंडियन एक्सप्रेस ने इसे अपनी इस मुख्य खबर के साथ सिंगल कॉलम में छापा है। अमेरिकी टैरिफ पर विदेश मंत्री का यह हमला इंडियन एक्सप्रेस की लीड है। अखबारों ने आज यह भी बतया है कि ईडी के बाद सीबीआई ने भी अनिल अंबानी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। आज कर्नाटक के कांग्रेस विधायक केसी वीरेन्द्र को ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी में गिरफ्तार किये जाने तथा उनके 31 ठिकानों पर छापे और उसमें बरामदगी की खबर प्रमुखता से है। यह खबर अमर उजाला के साथ, नवोदय टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, दि एशियन एज आदि में है। विदेशमंत्री जयशंकर ने टैरिफ पर जो कहा है वह ज्यादा अखबारों में प्रमुखता से है लेकिन डाक विभाग वाली खबर कम है। कम महत्वपूर्ण ढंग से तो हे ही।

यह खबर क्यों नहीं है?

आज या एकाध दिन पहले भी मेरे अखबारों में किसी में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं दिखी कि मशहूर निवेशक (दिवंगत) राकेश झुनझुनवाला की पत्नी रेखा झुनझुनवाला ने दो महीने पहले नजारा टेक के अपने शेयर बेच दिये थे। हाल में सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेय़क संसद में पेश किया। इससे नजारा टेक के शेयर 17 फीसदी गिर चुके हैं। अनुमान है कि समय पर (या समय से पहले) अपने शेयर बेचकर रेखा झुनझुनवाला ने 334 करोड़ रुपये बचाये हैं। शेयर बेचने का यह मामला इतना बड़ा था कि तब भी खबर छपी थी। सरकार के विधेयक लाने के बाद यह चर्चा चल पड़ी है कि क्या उन्हें दो महीने पहले पता गया था? पता था या नहीं और था तो कैसे नहीं था तो उन्होंने किसी कंपनी में अपनी इतनी बड़ी हिस्सेदारी क्यों बेची? कई सवाल है? शेयर मार्केट में इसे इनसाइडर ट्रेडिंग कहा जाता है और अपराध है। ऐसा करने वाले निवेशकों को प्रतिबंधित किया जाता रहा है। सेबी, सीबीआई-ईडी की जांच भी हो सकती है। पर वह सब अभी मुद्दा नहीं है। अभी मुद्दा है कि यह खबर पहले पन्ने पर क्यों नहीं है? समय पर किये गये एक निर्णय से अगर किसी के 334 करोड़ रुपये बच जायें तो खबर है। थी भी और अब सरकारी विधेयक के बाद संबंधित शक और संयोग भी बड़ी खबर है लेकिन यह पहले पन्ने पर नहीं है।  

पुरानी फोटो, शॉर्टपीडिया डॉट कॉम से साभार

खबरों के अनुसार, बीएसई के बल्‍क डील डेटा के मुताबिक, रेखा झुनझुनवाला ने 13 लाख शेयर औसतन ₹1,225.19 प्रति शेयर के भाव पर बेचे। एनएसई डेटा में भी यही जानकारी सामने आई कि 13 जून 2025 को रेखा झुनझुनवाला ने 14,23,620 शेयर ऑफलोड किए। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, यह डील ओपन मार्केट ऑपरेशन के ज़रिए पूरी की गई। इस तरह यह सौदा या लेन-देन बिल्कुल सामान्य भी हो तो शेयर बेचने का रेखा झुनझुनवावला का निर्णय चौंकाने वाला है। खबरों के अनुसार,  पिछले पांच साल में इसने 37% से ज्यादा रिटर्न दिया है और पिछले एक साल में 21.81% की बढ़त दर्ज की है। 13 जून को शेयर बेचने के बाद लेकिन (संभवतः) विधेयक पेश किये जाने से शुक्रवार को नजारा टेक का शेयर 4.13% गिरकर ₹1,155.75 पर बंद हुआ। पिछले एक महीने में यह शेयर 19% से ज्यादा गिर चुका है और पिछले पांच सत्रों में 17.58% की गिरावट दर्ज की है। मतलब बेचने के बाद ही गिरावट शुरू हो गई थी भले विधेयक बाद में आया। बड़े निवेशकों की बिक्री-खरीद के बाद ऐसा होता है। इसलिए यह खबर नहीं है। लेकिन सरकारी विधेयक के बाद शेयर गिरने का कारण होता है और बड़े निवेशक ऐसे कमाते हैं। वह अनुमान हो तो ठीक अगर किसी सूचना पर है तो अपराध। इसे इनसाइडर ट्रेडिंग कहा जाता है। मेरा मानना है कि यह अपराध न हो पूरी तरह संयोग हो तब भी खबर है खासकर तब जब सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने 23 अगस्त 2024 को आदेश जारी कर अनिल अंबानी और उनसे जुड़े 24 अन्य लोगों / संस्थाओं को प्रतिभूति बाजार से पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है।   

यह कदम रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) के माध्यम से नकदी के अवैध हेरफेर करने के आरोपों पर आधारित था। सेबी ने पाया कि आरएचएफएल के प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक अनिल अंबानी की प्रेरणा/अनुमति से, बिना किसी क्षमता वाले या प्रोमोटर लिंक्ड कंपनियों को फ़र्जी लोन जारी हुए। इसके चलते कंपनी को भारी नुकसान हुआ और लाखों निवेशकों की धनराशि प्रभावित हुई। कल्पना कीजिये कि किसी को पता हो (और होता ही है) कि रेखा झुनझुनवाला के पास जिस कंपनी के शेयर हैं उसे प्रतिबंध के बाद घाटा होगा और उस व्यक्ति को स्वयं या किसी के जरिये  प्रतिबंध लगने की पूर्व सूचना है। यह सूचना समय पर मिल जाने से बेचना संभव होगा और निवेशक भारी नुकसान से बच जायेगा। इसलिए ऐसा करना प्रतिबंधित है, छोटे और सामान्य मामलों में भी कार्रवाई होती है। इसीलिए बजट बनाने और उसकी छपाई से संबंधित तमाम लोग लगाता कई दिन घर नहीं आते हैं और उन्हें दफ्तर में ही रहना पड़ता है। बजट की छपाई के लिए अलग प्रेस है आदि आदि। सरकारी सूचनाओं का अपना महत्व है और अधिकारी चाहें तो बहुत आसानी से किसी की कमाई करवा सकते हैं। घाटा होने से बचा सकते हैं। इसलिए रेखा झुनझुनवाला का मामला बहुत सामान्य होते हुए भी बड़ी खबर है लेकिन अखबारों ने वह महत्व नहीं दिया है जो अनिल अंबानी पर प्रतिबंध को दिया था या दिवालिया जैसी स्थिति में पहुंचे अनिल अंबानी के यहां छापे या सरकारी कार्रवाई को देता रहा है। यह मीडिया की स्वतंत्रता और अघोषित इमरजेंसी की पत्रकारिता है। सेबी ने अनिल अंबानी पर 25 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है लेकिन रेखा झुनझुनवाला से सरकार को कुछ नहीं मिलेगा। जो मिलेगा वह शेयरों की कमाई पर मिलेगा।

दूसरी ओर, अगस्त 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, रेखा झुनझुनवाला ने गेमिंग और स्पोर्ट्स मीडिया कंपनी, नजारा टेक्नाललॉजिज में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी है। उन्होंने यह पोर्टफोलियो लगभग 111% रिटर्न के साथ हासिल किया था, जो पिछले तीन साल में कंपनी के प्रदर्शन का परिणाम था। इससे पहले भी, जून 2025 में, उन्होंने नजारा में लगभग 1.98% (लगभग ₹218 करोड़) की हिस्सेदारी निकाल दी थी, जिससे उनकी हिस्सेदारी 7.05% से घटकर 5.07% हो गई थी। रेखा झुनझुनवाला का नाम सेबी के साथ एक पुराने इनसाइडर ट्रेडिंग केस (ऐपटेक लिमिटेड से जुड़ा) में आया था। इस मामले में, उन्होंने 2021 में लगभग ₹1.57 करोड़ सेटलमेंट राशि के रूप में दी थी, जिसमें गलत तरीके से प्राप्त लाभ और ब्याज शामिल था। ऐपटेक ने 7 सितंबर 2016 को प्री‑स्कूल सेगमेंट में प्रवेश की घोषणा की थी। सेबी ने पाया कि मार्च से लेकर उस तारीख तक यह सूचना अप्रकाशित और कीमत के लिहाज से संवेदनशील सूचना थी (यूपीएसआई) थी। रेखा झुनझुनवाला सहित अन्य लोगों ने इस जानकारी के आधार पर ट्रेड किया था—हालांकि सेटलमेंट के दौरान उन्होंने न तो आरोप स्वीकारे और न ही इनकार किया। गौरतलब है कि सेबी की कार्रवाई कंपनी से संबंधित अप्रकाशित सूचना के कारण थी। सरकारी सूचना के मामले में सेबी कार्रवाई कर सकती है कि नहीं वह भी मेरी जानकारी में नहीं है लेकिन खबर तो हो ही सकती थी। खासकर इस तस्वीर के सार्वजनिक होने के आलोक में। सोशल मीडिया पर यह मामला इसीलिये चर्चा में है लेकिन अखबारों में खबर वैसे नहीं है जैसी हो सकती थी या 2014 की आजादी से पहले होती थी।

भारत में अमेरिकी राजदूत

आज ही द टेलीग्राफ में लीड और कुछ दूसरे अखबारों में खबर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने खास और करीबी, सर्जियो गोर को भारत में अमेरिकी राजदूत  बनाया है। भारत के कई शहरों में ट्रम्प का अच्छा-खासा व्यवसाय और निवेश है। ऐसे में भारत में अमेरिकी राजदूत का अलग महत्व है और वह ट्रम्प का करीबी है तो आप समझ सकते हैं कि उसके मायने क्या है। दूसरी ओर सब झेलने के बाद विदेश मंत्री कह रहे हैं कुट्टी नहीं हुई है। हमेशा की तरह प्रधानमंत्री जिम्मेदारी लेने या मुश्किल समय में सीन से बाहर रहने की अपनी परंपरा पर कायम हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स में आज एक खबर प्रमुखता से छपी है। इसके अनुसार कर्नाटक धर्म स्थल मामले में एसआईटी ने शिकायकर्ता को गिरफ्तार किया है। आप जानते हैं कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। पहले की सरकार को भाजपा गिरा चुकी है और दूसरे राज्यों में भी ऐसा करती रही है। संयोग से आज एक खबर कर्नाटक के कांग्रेस विधायक की गिरफ्तारी की है और अब इस मामले में शिकायतकर्ता को ही गिरफ्तार कर लिया है जो असामान्य मामला है और वैसे ही है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री पर कुछ ही दिन पहले दिल्ली आये एक गुजराती ने हमला कर दिया। उसके बाद मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था हुई, दिल्ली के पुलिस प्रमुख का फैसला हो गया जो पहले कार्यवाहक प्रमुख से चल रहा था। ये ऐसी खबरें हैं जो अपने साथ कई सवाल लाती है। निजी क्षेत्र का मीडिया अगर ऐसी खबरें नहीं देता है तो यह काम सरकारी मीडिया को करना चाहिये खासकर तब जब एक-एक एंकर को इतने पैसे दिये जा रहे हैं जो पहले कभी नहीं दिये गये। टैक्स के पैसों से सरकारी मीडिया संस्थान सरकार का प्रचार करें यह गलत नहीं है लेकिन स्थिति यह है कि सिर्फ प्रचार ही करते हैं और जरूरत पड़े तो सरकार उनसे कथित फैक्ट चेक करवाती है और वो भी चुने हुए मामलों में जिनका जनहित से कोई संबंध नहीं होता है या न के बराबर होता है और सब सरकार या सत्तारूढ़ पार्टी के लिए महत्वपूर्ण होता है।

खबरों के अनुसार, एक पूर्व सफाई कर्मचारी जो ‘व्हिसलब्लोअर या शिकायतकर्ता’ माना जा रहा था, ने यह दावा किया था कि उसे 1995 से 2014 के बीच धर्मस्थल (धर्मस्थल मंञ्चुना स्वामी मंदिर) में महिलाओं और नाबालिगों के शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया। कुछ शवों पर यौन उत्पीड़न के निशान भी थे। उसने यह दावा एक मजिस्ट्रेट के समक्ष भी दर्ज कराया था। इसपर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया, जिसने कई जगहों पर खुदाई की। कुल 13 स्थल चिन्हित किए गए, जिनमें से केवल दो पर ही मानव अवशेष मिले—एक स्थल पर आंशिक कंकाल, और दूसरे पर मानव खोपड़ी और हड्डियाँ। बाकी नौ स्थलों पर कोई अवशेष नहीं मिले। असंगत बयान और दस्तावेजों के बाद एसआईटी का मानना है कि शिकायतकर्ता की जानकारी और सबूतों में गड़बड़ियाँ थीं। इस कारण 23 अगस्त 2025 को उसे झूठी गवाही के आरोप में गिरफ्तार किया गया और 10 दिन की एसआईटी हिरासत में भेज दिया गया। पहले उसे गवाह सुरक्षा अधिनियम के तहत सुरक्षा मिली हुई थी लेकिन हिरासत में लेने से पहले उसका यह संरक्षण रद्द कर दिया गया। संभावना है कि “कुछ लोगों” ने उसे आरोप लगाने के लिए प्रेरित किया होगा। उसकी पूर्व पत्नी ने उसे सार्वजनिक रूप से आदतन झूठा कहा है और कोर्ट तथा मीडिया को बताया है कि इस तरह के आरोप उसने पहले कभी नहीं लगाये। उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने कहा कि सरकार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को “सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश” करार दिया और कहा कि इसमें विदेशी फंडिंग और सक्रियता शामिल हो सकती है। पार्टी ने मामले की जांच एनआईए से कराने का सुझाव दिया है। यह दिलचस्प है कि एसईआईटी राज्य सरकार के अधीन काम करती है और एनआईए केंद्र सरकार के तहत। कायदे से दोनों की जांच और दोनों का काम अपराधियों का पता लगाना है लेकिन भाजपा की सरकार एनआईए का उपयोग खास मामलों में खास उद्देश्य के लिए करती लगती है और वह अलग मामला है। गौर करने वाली बात यह है कि शिकायतकर्ता सीएन चिनैया ने पहली बार यह गंभीर आरोप जुलाई 2024 में लगाए थे।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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