यादव कुल में लातम-जूतम : कहीं आईपीएस अमिताभ ठाकुर और पत्रकार यशवंत सिंह के श्रापों-आहों का असर तो नहीं!

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी में भयंकर ड्रामा चरम पर है. सारे चेहरे बेनकाम हो रहे हैं, मुलायम सिंह यादव से लेकर रामगोपाल यादव तक और शिवपाल यादव से लेकर अखिलेश यादव तक. हर कोई स्वार्थ, लिप्सा और सत्ता की चाहत में किसी भी लेवल पर गिरने को तैयार है. जनता हक्की बक्की देख रही है. उधर, कुछ लोगों का कहना है कि आईपीएस अमिताभ ठाकुर व भड़ास फेम पत्रकार यशवंत सिंह जैसे बहादुर, ईमानदार और सरोकारी लोगों के साथ सपा की इस सरकार के राज में जो जो बुरा बर्ताव किया गया, उसकी आहों व बददुवाओं का असर है कि अखिलेश यादव राज बवंडर में है और यादव कुल के किसी भी व्यक्ति का जीवन शांत नहीं रह गया है.

इस यादव कुल की आपसी लातम-जूतम को देखकर दुनिया आनंदित हो रही है और इनकी लगातार सामने आती खलनायकी भ्रष्टाचारी वाली छवि से नाराज लोग इन्हें चुनावों में सबक सिखाने को आतुर हैं. कट्टर यादवों को छोड़ दें तो इस समय सारे लोग इस सपा सरकार के जंगलराज और इनकी आपसी जूतम-पैजार से परेशान है. प्रदेश में सारा काम ठप पड़ा हुआ है. अफसर भी मजे लेकर तमाशा देख रहे हैं.

रामगोपाल यादव सीबीआई और बीजेपी के चंगुल में हैं जिसके कारण उन्हें शिवपाल ने पार्टी से निकाल दिया वहीं मुलायम सिंह दलालों अपराधियों आदि को अपना बहुत करीबी बताकर अपने बेटे अखिलेश का विरोध कर रहे हैं. वहीं अखिलेश मुगल शासक के राजाओं की तरह सत्ता मिल जाने के बाद किसी भी तरह अपना कद और पद बड़े से बड़ा बनाना चाहते हैं ताकि यादव कुल में सीएम पद के लिए कोई दूसरा प्रतिस्पर्धी न पैदा हो सके. इस प्रकार यह खानदान आपस में ही चरम मारकाट में लिप्त होकर एक दूसरे को एक्सपोज कर रहा है. उत्तर प्रदेश में जंगलराज का जो लंबा दौर चला है उसमें बहुत से ईमानदार, निर्दोष और साहसी लोगों को शासन सत्ता का उत्पीड़न झेलना पड़ा.

मीडिया मालिकों और संपादकों के सांठगांठ के दबाव में यूपी सरकार ने भड़ास4मीडिया के एडिटर को 68 दिनों के लिए जेल भेज दिया था और तरह तरह के फर्जी मुकदमें लाद दिए थे ताकि कभी जमानत न हो पाए. इसी तरह निर्भीक आईपीएस अमिताभ ठाकुर को पग पग पर परेशान किया गया और जितना प्रताड़ित किया जा सकता था, उन्हें किया गया. अमिताभ और यशवंत दोनों ने फेसबुक पर अपने अपने अंदाज में लिखा है कि उनकी बददुवाओं और आहों का असर पड़ा है जिसके कारण प्रकृति निरंकुश और अन्यायी यादव कुल के साथ अपने तरीके से न्याय कर रही है. आइए पढ़ते हैं अमिताभ और यशवंत ने एफबी पर क्या क्या लिखा है :

Amitabh Thakur : इनकी दुर्दशा में कुछ मेरी भी आहें जरूर शामिल रही होंगी जो मैंने अकेली रातों में उनके अन्याय के साए में निकालीं. चलो, कम से कम अब मंत्री गायत्री प्रजापति के खिलाफ कार्यवाही तो हो रही है. xxx अब जब मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने श्री प्रजापति को दुबारा बर्खास्त करते हुए कड़ा कदम उठाया है तो हम उम्मीद करेंगे कि वे मेरी पत्नी द्वारा जून 2015 में श्री प्रजापति के खिलाफ थाना गोमतीनगर में दर्ज कराये गए एफआईआर में उन्हें गिरफ्तार कराते हुए हमें न्याय देंगे. xxx My silent tears on all the torture I faced through misuse of their authority seem to get some solace today. xxx Thank God, now justice is being done against minister Gayatri Prajapati. Now when CM Sri Akhilesh Yadav has taking strong action against Mr Prajapati by sacking him again, we hope the CM will also take police action against Mr Prajapati by arresting him in the FIR registered by my wife Nutan in Gomtinagar police station in June 2015 for trying to frame us in false cases, which is pending since then.

Yashwant Singh : प्रकृति का न्याय है भाई। एक फ़क़ीर का श्राप था इन रामगोपाल जी पर। और, यादव खानदान पर भी। इन्हें नष्ट होना है। जिन जिन पर श्राप होंगे, वो नष्ट होंगे। भ्रष्टाचारियों और आततायियों को रोने के लिए कंधे न मिलेंगे। खुद को बिना अपराध 68 दिन जेल में रखने के चलते दिए गए श्राप का असर होना ही था। यादव खानदान के गलत कामों और जंगलराज से पीड़ितों की आह भी तो लगेगी इनको, इसलिए ये नष्ट होंगे। कुछ श्राप जल्द लगते हैं, कुछ आहों का असर सदियों में दिखता है। इसके उलट वाइस वर्सा कुछ आहों का असर तत्काल दिखता है और कुछ श्राप का सदियों में।

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Comments on “यादव कुल में लातम-जूतम : कहीं आईपीएस अमिताभ ठाकुर और पत्रकार यशवंत सिंह के श्रापों-आहों का असर तो नहीं!

  • Deshpal Singh Panwar says:

    are yashwant, shrap kisi ka bhi lag sakta hai. esiliye kaha gaya hai ki- garib ki aah se khaal bhasm ho jaaye. tumne aur Amitabh Thakur ne sach mei bada sangharsh kiya hai es ravan raj ke khilaf. big salute for both.

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  • saurabh dubey says:

    ये श्राप ही है जिससे यादव कुल बिना वजह बर्बादी की ओर अग्रसर हो चुका है.. सबकी आंखों पर पट्टियां बंध चुकी हैं और सब खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं.

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  • Shyam Singh Rawat says:

    यदुवंशियो के इस गृह-कलह में असल सवाल तो जनता का है जिसका भारी पैमाने पर शोषण इस कुनबे ने किया। इस झगडे से लोगों को यह साफ पता चल गया है कि मुलायम, शिवपाल, रामगोपाल आदि सभी लुटेरे हैं। आमदनी से अधिक सम्पत्ति रखने, एक मामूली इंजीनियर यादवसिंह के साथ सांठ-गांठ कर अरबों की लूट, सीबीआइ. की जांच व जेल आदि मामलों में सबने एक-दूसरे की मदद की। जिसका भांडा अब सार्वजनिक रूप से फूट रहा है। इनकी असली लडाई तो इसी लूट की बंदरबांट को लेकर है। जिसे जनता समझती है, लेकिन अफ़सोस मीडिया को चर्चा तो उस लूट के और उसके अपराधियों के कुकर्मों की करनी चाहिये थी। सारी बहस गलत दिशा मेंं जान-बूझ कर मोडी जा रही है। पत्रकारों को देश व समाज से अधिक चिंता इन लुटेरों-डकैतों के भविष्य की हो रही है।

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