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उत्तर प्रदेश

खोजी पत्रकार अनूप गुप्ता द्वारा काला चिट्ठा खोले जाने के बाद सीएम योगी ने कैबिनेट मंत्री राकेश सचान के पर कतर दिए!

Hindi newspaper front page featuring a man in a beige vest and orange scarf, with a bold yellow headline 'राजनीति का सूर्य ग्रहण'.

लखनऊ/कानपुर- यूपी की राजधानी लखनऊ के वरिष्ठ और खोजी पत्रकार अनूप गुप्ता ने भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री राकेश सचान का संपूर्ण काला चिट्ठा खोलकर रख दिया है। इस दौरान अनूप गुप्ता पर राकेश सचान के इशारे पर कई मुकदमे दर्ज कराए गये। धमकियों का सिलसिला चला। पुलिस का उपयोग कर उन्हें डराया गया। बावजूद इसके इस जुझारू पत्रकार ने न सिर्फ मंत्री राकेश सचान बल्कि उनकी काली करतूतों में भागीदार उनकी पत्नी सीमा सचान को लगातार बेनकाब किया।

अनूप गुप्ता

अनूप गुप्ता की खबरों और मंत्री के खिलाफ किए गये एक के बाद एक खुलासों से सरकार भी बैकफुट पर आ गई। जिसके बाद कैबिनेट मंत्री राकेश सचान के विभाग का वो जिम्मा छीन लिया गया जिसमें सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार किया गया था। इस तरह उनके पर कतर दिए गए!

मंत्री राकेश सचान से छीना गया डिपार्टमेंट लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब भूपेंद्र चौधरी को सौंपा गया है। नीचे पढ़िए अनूप गुप्ता के सिलसिलेवार खुलासों की कुछ झलकियां…


Front page of a Hindi newspaper featuring a man in a white shirt and black vest gesturing, with a bold yellow Hindi headline about MSME in the lower half.
Front page of a Hindi newspaper called 'Prakhar Post' featuring a large portrait of a smiling man wearing a saffron scarf, with a bold yellow headline across the bottom and a text article block on the left.

चाल, चरित्र चेहरा की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी के अंदर का क्या अनुशासन खत्म हो चुका है। क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा सार्वजनिक मंचों से भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को उनके ही मंत्रिमंडल के मंत्री मानने को तैयार नहीं हैं। ऐसी स्थिति में सरकार के अंदर ईमानदारी की बात करना बेईमानी साबित हो रहा है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल का सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी मंत्री राकेश सचान है। “प्रखर पोस्ट” समाचार पत्र लगातार राकेश सचान, उसकी पत्नी, बेटी और उसके समूचे गैंग के द्वारा कालेधन से अर्जित की हुई सैकड़ों करोड़ की जमीन और संपत्तियों का लगातार खुलासा कर रहा है, लेकिन भाजपा का प्रदेश नेतृत्व और केंद्रीय नेतृत्व राकेश सचान के भ्रष्टाचार पर आंख, कान व नाक सब बंद किए हुए है, लेकिन प्रखर पोस्ट की अपनी सामाजिक जिम्मेदारी कि वह राकेश सचान जैसे अनगिनत भ्रष्ट मंत्रियों के भ्रष्टाचार का खुलासा करता रहेगा। पढ़िए प्रखर पोस्ट की इस बार की आवरण कथा में ‘भाजपा का भस्मासुर’


Front page of a Hindi newspaper featuring a large portrait of an elderly man with white hair and mustache, with a bold Hindi headline in bright yellow at the bottom.

आम जनमानस पसंदीदा व्यक्ति को अपने वोटों से प्रतिनिधि के तौर पर विधानसभा के अंदर भेजता है। इस आशय के साथ कि हमारे वोटों से जीता हुआ प्रत्याशी विधानसभा पहुंचकर हमारे हितों की रक्षा करेगा। हमारे बच्चों एवं परिवार के साथ-साथ प्रदेश के विकास में सहायक सिद्ध होगा। आम जनमानस अपने जीते हुए प्रतिनिधि से बड़ी-बड़ी आशाएं लगा लेता है। लेकिन आश्चर्य तब होता है जब उनका प्रतिनिधि विधानसभा में असंख्य झूठ बोलकर संविधान की शपथ लेता है। इस तरह शपथ लेने के बाद तत्काल ही पथभ्रष्ट होने की शुरूआत कर देता है। विधानसभा के अंदर वर्तमान काबीना मंत्री राकेश सचान के रूप में एक डकैत मौजूद है जो प्रदेश की जनता के सपनों पर डाका डालने के क्रम में चंबल के डकैतों को भी मात दे रहा है। प्रखर पोस्ट समाचार पत्र लगातार खुलासा कर रहा है राकेश सचान का। कैसे फुटपाथ पर खड़ा हुआ एक लड़का 35 साल के राजनीतिक जीवन में हजारों करोड़ के कालेधन का मालिक बन बैठता है। ऐसे ही कालेधन से अर्जित की हुई संपत्तियों का प्रखर पोस्ट इस अंक में बड़ा खुलासा करने जा रहा है। पढ़िए इस बार के प्रखर पोस्ट की आवरण कथा में ‘कालेधन का खलनायक’।


Front page of a Hindi newspaper showing a close-up of a man in a white shirt and a woman in a saree against an orange background, with a large yellow Devanagari headline below.

किसी आम नागरिक को जनप्रतिनिधि बनने पर क्या संविधान से खिलवाड़ करने का अधिकार मिल जाता है? किसी भी जनप्रतिनिधि का लोकसभा या विधानसभा के अंदर शपथ लेने के दौरान झूठ बोलकर संविधान की शपथ लेना क्या विशेषाधिकार की श्रेणी में आता है? चुनाव लड़ने के दौरान शपथ पत्र में प्रत्याशी जो कुछ भी उल्लेख करता है, वह उसकी पूर्ण जिम्मेदारी होती है। यदि गलत उल्लेख करता है और पकड़ा जाता है तो फिर सजा का भी प्रावधान है। जन प्रतिनिधियों ने विधानसभा व लोकसभा के अंदर झूठ बोलते हुए शपथ लेकर भारतीय लोकतंत्र का मजाक बना रखा है। ऐसे ही एक जनप्रतिनिधि राकेश सचान हैं, जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में काबीना मंत्री हैं। इन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर छल-कपट, झूठ-फरेब और मक्कार होने का परिचय दिया है। झूठ के पुलिंदों से भरा पति-पत्नी का लूट के लिए बना यह गठजोड़ लोकतंत्र को मुंह चिढ़ा रहा है। ऐसे में राकेश सचान व सीमा सचान को बंटी-बबली कहना अतिश्योक्ति न होगा। यह बंटी-बबली राजनीतिक सत्ता की आड़ में कितने बड़े भू-माफिया बन जाते हैं, इसका खुलासा प्रखर पोस्ट करने जा रहा है। पढ़िये प्रखर पोस्ट की इस बार की आवरण कथा “बंटी-बबली बने भू-माफिया”


Front-page news image: a construction site background with green tarps, a large bold yellow Hindi headline over red text blocks, and a man in a dark vest speaking on the right side.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बीते साढ़े आठ साल से हर मंच से और हर पटल से यह दंभ भरते रहे हैं कि न मैं खाऊंगा और न खाने दूंगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ मेरी सरकार की नीति “जीरो टॉलरेंस” की होगी, लेकिन अब यह शब्द व दंभ समय के साथ बेमानी नजर आने लगा है, क्योंकि अपने ही मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों के द्वारा सरकारी खजाना लूटा जा रहा है। वे इतने ढीठ हो गए हैं कि योगी के भी सपनों व प्राथमिकता वाली योजनाओं के बजट को साफ करने से नहीं चूक रहे हैं और मुख्यमंत्री न जाने किस मजबूरी में तमाशबीन बने हुए हैं। बाल्यावस्था से सुनते आए हैं कि चंबल के बीहड़ों में डकैत होते हैं, लेकिन 25 साल की पत्रकारिता के बाद यह बात बेधड़क कह सकता हूं कि चंबल घाटी में डकैत नहीं, बल्कि बागी होते हैं, कई सफेदपोश डकैत तो प्रदेश की विधानसभा में मिल जाएंगे। ऐसे कई आस्तीन के सांप योगी के मंत्रिमंडल में भी घुसे बैठे हैं, जिनमें से एक है बेरहम क्रूर आंखों वाला डकैत एमएसएमई मंत्री राकेश सचान। उसकी आंखों की शर्म-ओ-हया तब मर जाती है, जब वह और उसका कुनबा बेरोजगारों के पैसों पर डाका डाला डालने के लिए मैदान में उतरता है। वह इतना गिरा हुआ इंसान है कि गरीब, लाचार, कमजोर व असहाय बच्चों को मिलने वाले टूलकिट के पैसे के साथ-साथ उन्हें ट्रेनिंग के दौरान मिलने वाले भोजन की थाली भी लूटने में संकोच नहीं कर रहा है। इसको यूं भी कहा जा सकता है कि राकेश सचान सीएम के मंत्रिमंडल का वो भस्मासुर है, जो योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति को चुनौती दे रहा है। एमएसएमई, खादी, रेशम, हथकरघा व निर्यात प्रोत्साहन जैसे अहम विभाग के अरबों रुपए के बजट में से एक बड़ा हिस्सा अपनी बेटी के राशि फाउंडेशन व बेटा, भतीजा, साले की कंपनियों की माध्यम से लूट रहा है। उक्त विभागों को उसने सचान फैमिली प्राइवेट लिमिटेड बनाकर रख दिया है। सैकड़ों करोड़ की लूट के तांडव का बड़ा खुलासा “प्रखर पोस्ट” अपने अगले अंक में “एमएसएमई का भस्मासुर” के माध्यम से डंके की चोट पर करने जा रहा है। प्रखर पोस्ट व दृष्टांत का यह दृढ़ संकल्प है कि राकेश सचान जैसे अनेकों भ्रष्टाचारियों व भस्मासुरों को बेनकाब करता रहेगा।


Front page of a Hindi newspaper showing two men in the foreground, with coffins in the background. The bold headline in large yellow Devanagari script reads 'काला बाजार' and a smaller line above says 'कफनचोरों का' indicating a report on a black market involving funeral shrouds.

उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री आदित्य नाथ के मंत्रिमंडल में ऐसे ऐसे मंत्री व अधिकारी हैं, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाई जा रही मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी को कई साल से पलीता लगा रहे हैं। ऐसे भ्रष्ट लोगों का खुलासा प्रखर पोस्ट लगातार करता रहा है और आगे भी डंके की चोट पर करता रहेगा। इस बार की आवरण कथा में पढ़िए जनता के टैक्स के पैसों पर डाका डालने वाले मंत्री और अधिकारी की जुगलबंदी पर आधारित कथा कफन चोरों का कालखंड।

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