एस्सार-मीडिया सांठ-गांठ मामले पर केंद्र और सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

नई दिल्ली: एस्सार कंपनी के ई-मेल लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सीबीआई और एस्सार को नोटिस जारी करते हुए छह हफ़्ते में जवाब मांगा है। एस्सार मामले में दायर जनहित याचिका के खुलासे ने कई दिग्गज पत्रकारों को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया था। एस्सार की सुविधाएं भोगने को लेकर कई वरिष्ठ पत्रकार संदेह के घेरे में आ गए थे।

याचिकाकर्ता ने इस मामले में राजनीतिज्ञ, कॉरपोरेट्स और मीडिया के बीच सांठ-गांठ की एसआईटी से जांच कराने की मांग की थी। याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने श्रीप्रकाश जायसवाल, वरुण गांधी, दिग्विजय सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा जैसे कुछ नेताओं के इसमें शामिल होने का आरोप लगाया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना इनका पक्ष जाने कोर्ट केस को आगे कैसे बढ़ा सकता है।

जस्टिस टीएस ठाकुर की बेंच ने याचिका पर जवाब देने के लिए एस्सार और सरकार को छह हफ्तों का समय दिया है। दरअसल, एक अंग्रेजी अखबार ने सनसनीखेज खुलासा किया था कि किस तरह उद्योगपति रुइया परिवार के एस्सार समूह ने कथिततौर पर अपने खर्च पर भाजपा के बड़े नेता नितिन गडकरी को सपरिवार क्रूज की सैर कराई। 

कंपनी के आंतरिक ई-मेल और अन्य वार्तालापों में पूर्व कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल के साथ ही कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और भाजपा सांसद वरुण गांधी के नाम भी हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने खबर में बताया था कि व्हिसलब्लोअर ने ये जानकारी जुटाई। कंपनी के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत से संदेह है कि कंपनी ने अपने हितों को साधने के लिए मंत्रियों, नौकरशाहों और पत्रकारों को लालच दिया। हालांकि, एस्सार के प्रवक्ता ने अपनी सफाई में बताया था कि कंपनी से जुड़े ई-मेल से कुछ डेटा चोरी किया गया है और उसके साथ छेड़खानी की गई है। वे इस बारे में पहले ही दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कर चुके हैं। 

उल्लेखनीय है कि एस्सार मामले में दायर जनहित याचिका के खुलासे ने कई दिग्गज पत्रकारों को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया था। मामला चर्चा में आने के दौरान टाइम्स नाउ की डिप्टी न्यूज एडिटर मीतू जैन, मेल टुडे के संपादक संदीप बामजई और हिंदुस्तान टाइम्स की एनर्जी एडिटर अनुपमा ऐरी ने इस्तीफा दे दिया था। एस्सार की सुविधाएं भोगने को लेकर कई वरिष्ठ पत्रकार घेरे में आ गए थे। नया इंडिया के खिलाफ खबर छापने के मामले में इंडियन एक्सप्रेस को भी कठघरे में खड़ा किया गया है। नया इंडिया ने अपने संपादकीय लेख में लिखा है कि यदि उपहारों के आदान-प्रदान से ही पत्रकारों को खरीदा जा सकता है तो इंडियन एक्सप्रेस के तो सभी पत्रकार बिके होंगे क्योंकि सरकार ने उसे बहादुरशाह जफर मार्ग पर अरबों रुपये की जमीन दी है। हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी खोजी रिपोर्ट से खुलासा किया था कि एस्सार कंपनी नेताओं, पत्रकारों को तोहफे के तौर पर महंगे सेलफोन बांटती थी। अपने खर्च पर सैर करवाती थी। जरूरत पड़ने पर टैक्सी सेवा और मोबाइल बिल भी अदा करती थी।

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