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उत्तर प्रदेश

पेट्रोल पंप पर पत्रकार दंपति से दिल्ली पुलिस की बर्बरता, SI ने कार की बोनट पर लिखा माफीनामा

नोएडा: गुरुवार की उमस भरी दोपहर। सेक्टर-38 स्थित एक पेट्रोल पंप पर गाड़ी में ईंधन भरवाते समय वरिष्ठ पत्रकार दंपति अयंतीका पाल (Times Of India) और राहुल साहा (MoneyControl) पर एक ऐसा हादसा टूटा, जिसकी उन्हें कल्पना भी नहीं थी। रोजाना बड़े-बड़े मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने वाले इन पत्रकारों को उस दिन खुद एक सिस्टम की लापरवाही और बर्बरता का शिकार होना पड़ा।

अचानक ही तीन लोग plain clothes में उनकी गाड़ी के पास पहुंचे—दिल्ली पुलिस साइबर सेल से सब-इंस्पेक्टर ऋतु डांगी, हेड कांस्टेबल हरेंद्र और कांस्टेबल अमित। राहुल को देखते ही हरेंद्र ने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा, “तुम राहुल हो ना? तुम पर धोखाधड़ी और साजिश के मामले में शक है।”

अयंतीका ने तुरंत स्थिति भांप ली और अपने मोबाइल से रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। उन्होंने पूछा, “आप लोग कौन हैं? पहचान दिखाइए।” लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनकी बात को नज़रअंदाज़ कर दिया और ज़बरदस्ती राहुल को गाड़ी से बाहर खींचने लगे।

जब अयंतीका ने विरोध किया तो एक पुरुष कांस्टेबल ने महिला कांस्टेबल को आदेश दिया, “खींचो इसको पीछे से!”

अयंतीका ने अपना प्रेस कार्ड दिखाया और बार-बार कहा कि वे नोएडा के पत्रकार हैं, मूल रूप से पश्चिम बंगाल से हैं और उनके पति राहुल किसी अपराध में शामिल नहीं हैं। लेकिन पुलिस टीम उन्हें जबरदस्ती उठाने पर अड़ी रही।

दरअसल, पुलिस जिस राहुल की तलाश कर रही थी, वह हरियाणा के बहादुरगढ़ का एक साइबर क्रिमिनल था। मोबाइल सिग्नल ट्रैक करते हुए वे इस पेट्रोल पंप तक पहुंचे थे। दुर्भाग्य से राहुल साहा का नाम और सामान्य हुलिया उस संदिग्ध से मेल खा गया, और बिना किसी पुष्टि के पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी।

अयंतीका के कैमरे में पूरा घटनाक्रम कैद हो गया—पेट्रोल पंप की पृष्ठभूमि में चल रही अफरा-तफरी, लोगों की भीड़ और पत्रकार दंपति की घबराहट साफ़ झलक रही थी। वीडियो में अयंतीका कहती हैं, “ये सरासर उत्पीड़न है। हम पत्रकार हैं और बिना पुष्टि के हमें अपराधी बना दिया गया।”

NDTV से बातचीत में दंपति ने कहा, “अगर हमारे पास प्रेस आईडी और कैमरा न होता, तो शायद हम इस वक्त जेल में होते। सोचिए उन लोगों का क्या होता है जिनके पास आवाज़ नहीं है?”

आख़िरकार, जब राहुल की पहचान की पुष्टि हो गई, तो पुलिस को अपनी गलती का एहसास हुआ। SI ऋतु डांगी ने कार की बोनट पर खड़े होकर कागज़ पर हाथ से एक माफीनामा लिखा, जिसमें कहा गया—

“SI Ritu Dangi, HC Harendir & Ct Anit, PS-Cyber, Shahdara misunderstood Mr Rahul Shah as our alleged person Mr Rahul and apologised on behalf of my team and in future this thing will not be done from our side.”

बाद में DCP प्रशांत गौतम की ओर से दिल्ली पुलिस का आधिकारिक बयान आया। उन्होंने बताया कि उनकी टीम भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी और साजिश के मामले की जांच कर रही थी। संदिग्ध का मोबाइल सिग्नल उस पेट्रोल पंप पर मिला था और राहुल महज़ एक दुर्भाग्यपूर्ण संयोग के शिकार हो गए। पुलिस ने बयान में दावा किया कि “किसी तरह की अभद्रता या बल प्रयोग नहीं हुआ” और पहचान स्पष्ट होने पर टीम ने तुरंत माफी मांग ली।

हालांकि यह सफाई अब सवालों के घेरे में है। वायरल हो चुके वीडियो ने न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी पूछा जा रहा है कि क्या तकनीक और प्रोफेशनल ट्रेनिंग के बावजूद ऐसी लापरवाह कार्रवाई की जा सकती है?

अयंतीका का सवाल वाजिब है—”हम तो पत्रकार थे, हमारे पास कैमरा था, इसलिए सुना गया। लेकिन जिनके पास न तो कैमरा है, न ही कोई पहचान, उन्हें इंसाफ कौन दिलाएगा?”

मुख्य सवाल:

  • बिना ठोस पहचान के कार्रवाई क्यों?
  • क्या मोबाइल ट्रैकिंग के नाम पर मनमानी की छूट मिल गई है?
  • क्या आम नागरिकों के साथ ऐसे व्यवहार को संस्थागत तौर पर रोका जा सकता है?

यह एक अकेली घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर एक गंभीर टिप्पणी है।

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