चिदंबरम की रिहाई को सबसे बढ़िया ‘टेलीग्राफ’ ने कवर किया, ‘हिंदुस्तान’ की हेडिंग हास्यास्पद

Sanjaya Kumar Singh : जमानत नियम है, जेल अपवाद… फिर भी, सुप्रीम कोर्ट के वकील को अपनी जमानत मिलने में 105 दिन लगे… पी चिदंबरम को जमानत मिलने की खबर आज लगभग सभी अखबारों में पहले पन्ने पर है। टेलीग्राफ ने इसका शीर्षक अपनी खास शैली में लगाया है पर बाकी अखबारों में यह रूटीन खबर की ही तरह है। फिर भी चर्चा करने लायक तो है ही।

सबसे पहले टेलीग्राफ का शीर्षक, जमानत नियम है, जेल अपवाद। इसके बावजूद न्याय शास्त्र के स्वर्ण सिद्धांत को लागू करने का इंतजार करने में समय जाया किया गया और उसे इस तरह गिना गया।

नवोदय टाइम्स का शीर्षक है, 106 दिन बाद चिदंबरम रिहा। उपशीर्षक है, पांच कारण जिनसे राह हुई आसान। मुझे नहीं लगता राह आसान हुई। आरोपों, जेल से छूटने के बाद चिदंबरम का यह कहना कि उनपर अभी भी कोई आरोप नहीं लगाया गया है, मायने रखता है।

इतना भी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की इस शर्त के बावजूद कहा है कि वे कोई मीडिया इंटरव्यू न दें और ना ही इस मामले में सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी करें। ऐसे में रिहाई किन कारणों से मिली उसका कोई मतलब ही नहीं है। वैसे भी, जमानत नियम है, जेल अपवाद, (द टेलीग्राफ का शीर्षक)। इन स्थितियों में 105 दिन बाद जमानत मिलने पर यह बताने का कोई मतलब नहीं है कि जमानत क्यों मिली। बताया यह जाना चाहिए कि जमानत क्यों नहीं मिल पाई।

ऐसे में दैनिक भास्कर और कुछ दूसरे अखबारों की इस सूचना का भी कोई मतलब नहीं है कि तिहाड़ से छूटते ही सोनिया से मिले, आज संसद जाएंगे। इसमें आज संसद जाएंगे तो ठीक है पर छूटते ही सोनिया से मिले, तथ्यात्मक रूप से गलत है। क्योंकि जेल के बाहर कई लोग थे और सोनिया गांधी जेल नहीं गई होंगी, वे जेल से उनसे मिलने सीधे उनके घर भले गए हों। खबर में अंदर लिखा भी है … इसके बाद वह सोनिया गांधी से मिलने उनके घर गए। अदालत ने फैसले की एक और खास बात को प्रमुखता दी है और इसे मुख्य खबर के साथ अलग से छापा गया है।

खबर का शीर्षक है, सीलबंद लिफाफे के आधार पर जमानत न देना न्यायसंगत नहीं: कोर्ट। इस खबर में कहा गया है, सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने कहा- ‘ईडी ने हलफनामे में यह नहीं कहा है कि चिदंबरम फरार हो सकते हैं। न ही हाईकोर्ट ने फैसले में ऐसी कोई आशंका जताई थी। कोर्ट, जांच एजेंसी और सरकार के पास मौजूद दस्तावेजों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं दिखती, क्योंकि चिदंबरम न तो सरकार में हैं और न ही किसी पद पर हैं। सीलबंद लिफाफे में दिए गए दस्तावेजों के आधार पर आरोपी को जमानत देने से इनकार करना न्यायसंगत नहीं है। इसलिए हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया जाता है।’

इस तथ्य के मद्देनजर आप समझ सकते हैं कि देश के पूर्व गृह और वित्त मंत्री को, जो खुद एक वरिष्ठ अधिवक्ता भी है, 105 दिन जेल में रखने के बावजूद उन पर अगर आरोप भी नहीं हैं तो खबर क्या है। अब बताता हूं कि दूसरे अखबारों में क्या छपा है।

हिन्दुस्तान का शीर्षक है, राहत : चिदंबरम 105 दिन बाद जमानत पर जेल से घर आए। इसमें घर आए अटपटा और हास्यास्पद है। जमानत पर छूटने के बाद आदमी घर ही जाता है। घर नहीं जाए तो खबर है। हालांकि जमानत पर छूटने के बाद व्यक्ति आजाद होता है, वह कहीं भी जा सकता है (विदेश जाने की मनाही है, कहीं और जाने की हो तो वहां नहीं ही जाएगा)। इसमें भी आए क्यों? गए क्यों नहीं? अगर रिपोर्टिंग उनके घर से हो रही हो (इसका कोई कारण नहीं है किसी विशेष कारण से हो रही हो) तो ऐसा कहा और लिखा जा सकता है पर तिहाड़ से रिपोर्टिंग हो रही है तो गए होना चाहिए।

अगर हिन्दुस्तान के ऑफिस या रिपोर्टर के घर से रिपोर्ट हो रही है आए और गए का विवाद हो सकता है पर उसमें आए कब लिखा जाएगा आप समझ सकते हैं। वैसे इस खबर में एक उपशीर्षक भी है, तिहाड़ से निकल सीधे सोनिया से मिले। यही शीर्षक दैनिक भास्कर में है और मैं लिख चुका हूं कि ऐसा लिखना गलत है। इससे लगता है कि अखबार किसी और की लिखी खबर छाप रहे हैं। और यह एजेंसी हो सकती है पर यहां एजेंसी को श्रेय नहीं है। यह विशेष संवाददाता की खबर है।

नवभारत टाइम्स में यह खबर पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर है और रूटीन शीर्षक है, चिदंबरम को मिली जमानत, 106 दिन बाद तिहाड़ से रिहाई। यह भी बताया गया है कि उन्हें आईएनएक्स केस में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। इसमें अच्छी बात सिर्फ यह है कि अखबार ने इस खबर के साथ सुप्रीम कोर्ट के इस कथन को हाईलाइट किया है, आर्थिक अपराध काफी गंभीर श्रेणी में आते हैं, लेकिन जमानत नियम है और जेल अपवाद है। वरना लगता है कि खबर सुबह ही छप गई थी। बाद में फोटो साथ छाप कर कैप्शन दिया गया, चिदंबरम बुधवार शाम तिहाड़ से बाहर आ गए। वरना खबर में लिखा है, रिहाई का रास्ता बुधवार को साफ हो गया, और …. शर्तों के साथ जमानत दे दी।

राजस्थान पत्रिका, दैनिक जागरण में यह खबर रूटीन शीर्षक से है। अमर उजाला ने उपशीर्षक लगाया है, मीडिया से बात नहीं कर सकेंगे, विदेश यात्रा पर भी कोर्ट से रोक। और इस शीर्षक के नीचे ही सिंगल कॉलम में खबर है, मुझ पर कोई आरोप नहीं, प्रेस कांफ्रेंस करूंगा : चिदंबरम, शीर्षक से एक छोटी सी खबर है। अखबार ने इस खबर के साथ सोनिया गांधी से मिले उपशीर्षक वाली खबर दी है।

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की एफबी वॉल से.

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