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प्रति व्यक्ति आय के मामले में अब बांग्लादेश भारत से ऊपर है!

Hindi political infographic featuring Narendra Modi on the right, market metrics and arrows in the center, and a cheering crowd at the bottom conveying a nationalist message about economic trends.

सुभाष सिंह सुमन-

ताइवान जैसे छोटे द्वीप का शेयर बाजार अब हमारे शेयर बाजार से बड़ा है। ताइवानी बाजार का मार्केट कैप सोमवार को 4.95 ट्रिलियन डॉलर पर पहुँच गया। भारतीय बाजार का एमकैप 4.92 ट्रिलियन डॉलर। ताइवानी बाजार इस साल अब तक चढ़ा है करीब 50%। हमारा बाजार इस साल अब तक उतरा है करीब 10%। हम क्षेत्रफल में ताइवान से 91 गुणा, जनसंख्या में 65 गुणा और अर्थव्यवस्था में 4 गुणा बड़े हैं। प्रति व्यक्ति संसाधन हमसे कई गुणा कम है ताइवान के पास। कुछ ही दिन में दक्षिण कोरियाई बाजार भी हमसे आगे निकलने वाला है। कोरियाई बाजार इस साल अब तक 87% चढ़ा है और इसका मार्केट कैप अभी 4.6 ट्रिलियन डॉलर हो चुका है। भारत अभी 5वें से गिरकर छठे पर आया है। एकाध महीने में 7वें पर आ जायेगा।

पिछले महीने की एक ये खबर भी मजेदार है। प्रति व्यक्ति आय के मामले में अब बांग्लादेश भारत से ऊपर है। बांग्लादेश 2,910 डॉलर के साथ 148वां अमीर देश है। हमारा भारत महान 2,810 डॉलर के साथ 150वें पायदान पर है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 2026 के अनुमानित प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से पिछले महीने इसकी रिपोर्ट-रैंकिंग जारी की। संक्षेप में:- बांग्लादेश पहली बार प्रति व्यक्ति अमीरी के मामले में भारत से आगे निकला है और यह उपलब्धि उसने हासिल की इसी साल।

रुपया चीनी युआन के सामने इस साल अब तक 15% गिरा है। पाकिस्तानी रुपये के सामने हमारा रुपया इसी साल अब तक में 7% गिरा है। डॉलर के सामने भी 10% सस्ता हुआ है।

रुपये की इस गिरावट का ही साइड इफेक्ट है कि भारत अब सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की कतार में फिसलकर वापस छठे स्थान पर चला गया है। दावे जापान को पछाड़कर चौथे पायदान पर पहुँचने के हो रहे थे। हुआ कि ब्रिटेन से भी नीचे गिरकर छठे पर आ गये।

पाकिस्तानी रुपये के साथ तुलना तो सिर्फ मौज लेने के लिए कर दिये हैं। डॉलर के सामने गिरना चिंता की बात है, क्योंकि डॉलर ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा की हैसियत में है और हम निर्यात से बहुत ज्यादा आयात करने वाले देश हैं। पिछले वित्त वर्ष में हमारा व्यापार घाटा 120 अरब डॉलर का था। मतलब हमने दूसरे देशों को जितना बेचा, उससे 120 अरब डॉलर ऊपर का खरीदा।

युआन के सामने गिरने की बातें कम हो रही हैं, लेकिन यह मेरी समझ में डॉलर के सामने गिरने से भी ज्यादा खतरनाक है। हमारे कुल व्यापार घाटे में अकेले चीन का हिस्सा 90% से ज्यादा है। पिछले वित्त वर्ष में हमने चीन को बेचा सिर्फ 19.5 अरब डॉलर, जबकि चीन से खरीदा 131.6 अरब डॉलर। मतलब घाटा हुआ 112.1 अरब डॉलर का। अब युआन के महँगा होने से चीनी सामान सिर्फ इस साल हमारे लिए 15% महँग हो गया है। हमारी सरकार ईवी-ईवी चिल्ला रही है। ईवी के मामले में हमारी स्थिति क्रूड जैसी ही दयनीय है। हम क्रूड भी खरीद रहे बाहर से। ईवी में पॉवरट्रेन और बैटरी पैक खरीद रहे चीन से। पॉवरट्रेन और बैटरी के बाद किसी ईवी में 15-20% से ज्यादा की वैल्यू का काम बचता नहीं है। जितना ईवी-ईवी करेंगे, चीन से हम उतना ज्यादा खरीदेंगे। टाटा-फाटा सब एसी-फ्रिज के कम्प्रेसर खरीद रहे चीन से।

अडानी-अंबानी सब सोलर पैनल और बैटरी स्टोरेज खरीद रहे चीन से। हमारा खुद का काम आर्यभट्ट की महान खोज बराबर। अब युआन के सामने रुपये की गिरावट का असर सोच लीजिये।

इतनी महानतम उपलब्धियाँ हम हासिल करते जा रहे हैं, लेकिन महामानव मोदीजी को कोई कुछ नहीं कहेगा। वर्ना भक्त पहली फुर्सत में हुस्न हाजिर करते हुए गाना शुरू कर देंगे:- कोई पत्थर से न मारे मेरे दीवाने को…!

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