Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

उत्तर प्रदेश

भ्रष्टाचार के आरोपी डॉ के के गुप्ता को बीएचयू प्रबंधन ने दिया अभयदान

भास्कर गुहा नियोगी-

बनारस। हम मानते है कि भ्रष्टाचार हुआ लेकिन हम आरोपी को अभयदान देते हैं। भ्रष्टाचार से लड़ने का, भ्रष्टाचार (Corruption) को रोकने का यह नायाब तरीका बीएचयू ने अपनाया है। एमआरआई टेंडर (MRI Tendor) से जुड़े फर्जीवाड़ा मामले में बीएचयू (BHU) की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने यही किया है।

कमेटी ने माना कि गलत तरीके से फर्जी जीएसटी नंबर वाली कम्पनी को टेंडर दिया गया। कमेटी ने टेंडर को भी निरस्त कर दिया लेकिन सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ के के गुप्ता पर कोई कार्रवाई न करते हुए उन्हें उनके पद पर सुरक्षित रखा है।

टेंडर घोटाले के मामले में बीते 19 मार्च को जिला न्यायालय के आदेश पर लंका थाने में चिकित्सा अधीक्षक डॉ के के गुप्ता सहित अन्य चार लोगों के खिलाफ धारा 319 (2), 318(4) व 61(2) के तहत पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर 7 साल की सजा हो सकती है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इसी मामले में डॉ के के गुप्ता के उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने खुद पर दर्ज एफआईआर निरस्त करने की बात कही थी।

हृदय रोग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ ओमशंकर कहते हैं- “सर सुंदरलाल जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थान में इंसाफ और नैतिकता के लिए कोई जगह नहीं बची है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ के के गुप्ता पर दर्जनों गंभीर आरोप साबित हो चुके है लेकिन उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई..? एमआरआई टेंडर घोटाले के जांच में मंत्रालय और सीवीसी को भी प्रथम दृष्टया गड़बड़ी महसूस हुई जिसकी जांच के लिए बीएचयू के वर्तमान कार्यवाहक कुलपति को आदेशित किया गया। कुलपति द्वारा गठित जांच समिति ने भी के के गुप्ता को एमआरआई टेंडर में हेरफेर का दोषी पाया। कमेटी ने टेंडर को तो निरस्त कर दिया लेकिन डॉ के के गुप्ता पर कोई कार्रवाई नहीं की।”

जानकारी के अनुसार सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक में एमआरआई की मशीन लगाने के लिए टेंडर जारी किया गया था। लेकिन डॉ के.के. गुप्ता ने मनमानी तरीके से अपने चहेते मनोज शाह की फर्म को टर्न ओवर नियमों में गलत तरीके से छूट देने और नकली जीएसटी नंबर पर टेंडर आवंटित किया।

डॉ के.के.गुप्ता का नाम पहले भी ब्लड बैंक घोटाला, कोविड राहत फंड का दुरुप्रयोग, सीसीआई लैब जैसे लाभकारी यूनिट का निजीकरण यानी एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी को सीसीआई लैब को सौंपने, कार्डियोलॉजी विभाग को आवंटित 49 बेड छीनने से जुड़ा है। बावजूद वो अपने पद पर बने हुए हैं। डॉ ओमशंकर कहते हैं क्या किसी संरक्षण के बिना ये संभव है। सीधे तौर पर उन्हें वो लोग बचा रहे हैं जिन्हें लूट के खेत में फायदा है।

डॉ ओमशंकर ने बीएचयू की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले भ्रष्टाचारी चिकित्सा अधीक्षक की गिरफ्तारी के साथ ही इनको संरक्षण देने वाले भ्रष्टाचार में शामिल सभी उच्च अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की है।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन