राजीव तिवारी ‘बाबा’-
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों का उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी महत्वपूर्ण असर पड़ेगा। खासकर 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में। बिहार चुनाव को एक प्रकार से यूपी चुनाव का सेमीफाइनल माना जाता है क्योंकि यूपी और बिहार की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि लगभग एक जैसी मानी जाती है।
बढ़ेगा एनडीए का मनोबल
बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को मिली जीत से उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और एनडीए का मनोबल बढ़ेगा। यह जीत साबित करती है कि केंद्र और राज्य सरकार यानि कि डबल इंजन के प्रदर्शन की लोकप्रियता अभी भी महत्वपूर्ण चुनावी कारक हैं।
पीडीए पर लगा प्रश्नचिन्ह
बीते लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा की पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानि कि ‘पीडीए’ की रणनीति पर बिहार में महागठबंधन की विफलता से प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं। बिहार के महागठबंधन के परिप्रेक्ष्य में
राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस शामिल थे। विश्लेषकों का मानना है कि यदि जातीय जनगणना जैसे मुद्दों का लाभ क्षेत्रीय दलों को नहीं मिलता है, तो उन्हें भाजपा विरोधी राजनीति के लिए नई सामाजिक-राजनीतिक थ्योरी लानी पड़ेगी। हालांकि पीडीए के मुख्य पैरोकार सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बिहार चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर छल से चुनाव जीतने का आरोप लगाया है और दावा किया है कि “जो खेल बिहार में खेला गया है, वह उत्तर प्रदेश में नहीं हो पाएगा”।
यह दर्शाता है कि सपा इन नतीजों को लेकर सतर्क है लेकिन आगामी यूपी चुनाव को लेकर अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर सकती है।बिहार के नतीजों से यह संकेत मिलता है कि केवल जातीय गोलबंदी भाजपा की मजबूत संगठनात्मक संरचना और राष्ट्रवाद के एजेंडे का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती है।
हालांकि बिहार में महागठबंधन की बुरी तरह हार के पीछे रणनीतिक गलतियाँ मसलन पारिवारिक कलह और समन्वय की कमी जैसे कारक भी माने जा रहे हैं। यूपी में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच भविष्य के किसी भी गठबंधन के लिए ये बिंदु चिंता का विषय हो सकते हैं। बिहार से सटे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल इलाके में इन नतीजों का सीधा असर पड़ेगा, जहाँ कई स्थानीय मुद्दे और जातीय समीकरण बिहार के लगभग समान हैं।
छोटे दलों को संदेश
बिहार के चुनावी नतीजे यूपी की राजनीति में भाजपा की स्थिति को मजबूत करते हैं। साथ ही एनडीए के साथ खड़े छोटे दलों को भी ये संदेश है कि आगामी विधानसभा चुनाव में फिलहाल एनडीए खेमे में रहने में ही उनकी भलाई है। और खासकर ओमप्रकाश राजभर जैसे नेताओं के लिए एक मैसेज जिन्होंने बिहार चुनाव प्रचार से लौटकर ये कहकर चौंका दिया था कि बिहार में महागठबंधन की सरकार बन रही है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, को अपनी चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव करने के लिए मजबूर कर सकते हैं।



