
उर्मिलेश-
आज सुबह चाय पीते हुए अखबार पढ़ रहा था. जुकाम से गला खराब है इसलिए चाय तुलसी-आजवाइन वाली थी..अच्छी लग रही थी. तभी श्रीमती जी ने अपना फोन मुझे दिखाया और कहा: ‘सत्यहिंदी पर आशुतोष का ये प्रोग्राम देखो!’ वह जानती हैं कि पत्रकार-यूट्यूबर होने के बावजूद मैं आज भी अखबार और वेबसाइट ज्यादा देखता हूं. यूट्यूब पर कुछ प्रोग्राम देख लेता हूं पर टीवी चैनल यदा-कदा!
मैंने उनके फोन की स्क्रीन पर सत्यहिंदी के एक शो में Ashutosh Ashu को RJD की दो चर्चित प्रवक्ताओं और JNU की मेधावी शोधकर्ताओं: Kanchana Yadav और Priyanka Bharti से बातचीत करते देखा.
अभी कल ही मैं इन दोनों युवा एक्टिविस्ट और शोधकर्ताओं से अपने अपेक्षाकृत नये यूट्यूब चैनल पर बातचीत करने को सोच रहा था. उनसे संपर्क कर रिकॉर्डिग का शेड्यूल तय करता. पर तेज जुकाम और गले की खराबी के चलते कल एक प्रोग्राम रिकॉर्ड करने के बाद कुछ और करने की हिम्मत नहीं हुई. संयोग देखिये वह प्रोग्राम समसामयिक राजनीतिक मसलों पर आशुतोष से बातचीत का था, जो देर शाम कल ही पब्लिश/प्रसारित हुआ!
आमतौर पर घर में हम दोनों की रुचियां बिल्कुल अलग-अलग हैं और हम लोग एक-दूसरे को किसी कार्यक्रम को देखने जैसी सिफारिश नहीं करते. पर आज श्रीमती ने सिफारिश की और मैंने तत्काल देखना शुरू किया!
मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि दो कारणों से यह हिंदी में किसी विजुअल प्लेटफॉर्म (यूट्यूब) का एक अद्भुत कार्यक्रम है. जिस निश्छलता, निर्भीकता, ईमानदारी और मस्ती से डॉक्टर कंचना यादव और प्रियंका भारती ने अपनी बात कही है, उससे बिल्कुल मिलते-जुलते अंदाज में प्रोग्राम के एंकर आशुतोष ने उनसे पूरा संवाद किया है!
हंसी, मस्ती और ज्वाय के बीच दर्ज हुए इस संवाद में अद्भुत लय तो है ही; जटिल राजनीतिक मुद्दों पर बहुत गंभीर और ईमानदार ऑब्जर्वेशन भी हैं. ‘लेफ्ट’और ‘राइट’ की राजनीति(खासतौर पर JNU Campus में) के कुछ पहलुओं पर इन दोनों युवा एक्टिविस्टों को सुनना मेरे लिए बहुत खास रहा. इन दोनों को सुनते हुए मैं स्वयं भी अपने छात्र-जीवन; खासतौर पर जेएनयू में बिताए दिनों (1978-1983) की बहुत सारी खट्टी-मीठी और कुछ बहुत कड़वी यादों के गलियारे में भटकने लगा!
मैं यूं ही किसी की बढ़ाकर बड़ाई या बुराई करने से बचने वाला व्यक्ति हूं. इन दोनों प्रखर और बहादुर एक्टिविस्ट-लड़कियों को बहुत नजदीक से जानता भी नहीं. टीवी पर इन्हें कभी ठीक से सुना नहीं क्योंकि मैं टीवी यदा-कदा सुनता हूं. हां, टीवी चैनलों के इनके कुछ कार्यक्रमों के अंश हमने उक्त चैनलों के यूट्यूब पर जरूर सुने थे. पर इतने विस्तार से कभी नहीं. पहली बार किसी कार्यक्रम में इन्हें शुरू से आखिर तक सुना. निश्चय ही इनकी साफगोई, ईमानदारी और वैचारिक तरफदारी की तारीफ किये बिना नहीं रह सकता!
मुझे आज तक यकीन नहीं था कि राजद के छात्र संगठन के साथ जे एन यू में इतनी प्रतिभावान और समर्थ छात्राएं जुड़ी हुई हैं. आज भी कैंपस में प्रतिभावान छात्रों का बडा हिस्सा वाम संगठनों के साथ है. JNU जैसे कैंपस में राजद के साथ ऐसी छात्राओं का जुडना निश्चय ही उस पार्टी के लिए उल्लेखनीय घटना है.
भारतीय वामपंथी राजनीति की कतिपय संकीर्णताओं और जटिलताओं पर इन प्रियंका और कंचना की टिप्पणियां बहुत महत्वपूर्ण हैं. वर्ण और जाति के सवाल पर वामपंथी राजनीति के दिग्गजों(इनमें कुछ शीर्ष वामपंथी महिला नेता भी शामिल हैं) को इन जैसी युवा एक्टिविस्टों के ऑब्जर्वेशंस सुनने का धैर्य जरूर रखना चाहिए! महिला आरक्षण में ‘कोटा के अंदर कोटा’ क्यों जरूरी है; यह बात वाम से दक्षिण की हर पार्टी; खासतौर पर उनकी बड़ी महिला नेताओं को ईमानदारी से समझने की जरूरत है.
इस जीवंत चर्चा के लिए आशुतोष को बधाई और प्रियंका व कंचना को प्यार-दुलार-शुभकामना!
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