संजय कुमार सिंह
सरकार का प्रचार करने वाले अखबारों में एक, अमर उजाला में आज पहले पन्ने पर जीडीपी बढ़ने और दुनिया की तीसरी बड़ी ताकत होने के दावे जैसी खबरें हैं। सरकार के प्रचार की आज की खबरों में पुतिन का भारत दौरा भी है। दूसरी ओर, टाइम्स ऑफ इंडिया और हिन्दुस्तान टाइम्स में अन्य खबरों के साथ यह भी खबर है कि पान मसला व्यवसायी की बहू की आत्महत्या के मामले में एफआईआर हो गई है। लेकिन मेरे किसी अखबार में बीएलओ की मौत के मामले में एफआईआर की खबर पहले पन्ने पर नहीं है। वैसे तो एसआईआर और एफआईआर के दबाव के कारण बीएलओ की मौत, आत्महत्या, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के दबाव आदि की भी खबरें हैं। लेकिन ढूंढ़नी पड़ रही है। यही नहीं, तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने की खबर भी ज्यादातर अखबारों में नहीं है। द हिन्दू में पहले पन्ने की खबर असल में पूरी खबर अंदर होने की सूचना है। इन खबरों की चर्चा से पहले मैंने तीन जाने-माने एआई से पूछा तो पता चला कि अखबारों ने अभी तक हुई बीएलओ की मौत की सही या कुल संख्या भी नहीं बताई है। केरल के एक मामले को छोड़कर किसी मामले में एफआईआर की खबर नहीं है। भिन्न अखबारों में यह अलग है।
दूसरी ओर, पान मसाला व्यवसायी की बहू की आत्महत्या की खबर पहले पन्ने पर छपी थी। दिल्ली पुलिस ने कल इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली और आज हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम की खबर का शीर्षक है, “महिला की आत्महत्या : पान मसाला व्यवसायी के बेटे, पत्नी के खिलाफ उकसाने या मजबूर करने का मामला दर्ज”। टाइम्स ऑफ इंडिया में भी खबर सिंगल कॉलम में है और शीर्षक है, “व्यवसायी की बहू की आत्महत्या के मामले में उकसाने या मजबूर करने का मामला दर्ज”। कहने की जरूरत नहीं है कि एक व्यवसायी की बहू की घर में आत्महत्या के मुकाबले सरकारी नौकरी कर रहे बीएलओ की, काम के दबाव में आत्महत्या या निधन की खबर ज्यादा गंभीर है। देश भर (के 12 राज्यों) में जबरन, पहली बार, जल्दबाजी में एक साथ किए जा रहे एसआईआर के कारण 50 के करीब बीएलओ की मौत और आत्महत्या की चर्चा है। इस और दूसरे कारणों से एसआईआर रोकने की मांग सुप्रीम कोर्ट में भी है। वहां अगली तारीख पड़ गई है। इसलिए भी बीएलओ की मौत का मामला ज्यादा गंभीर है। सरकारी नौकरी में काम के दबाव के घोषित या ज्ञात मामलों के अलावा भी आत्महत्या या मौत के मामलों में एफआईआर जरूरी है पर होने या नहीं होने की खबर नहीं है।
तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से चुनाव आयोग की मुलाकात की खबर देशबन्धु में लीड है। फ्लैग शीर्षक है, चुनाव आयोग से मिला तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल, डेरेक बोले – चुनाव आयोग के हाथ खून से सने हैं (मुख्य शीर्षक)। उपशीर्षक है, पार्टी ने एसआईआर प्रक्रिया को ‘बिना योजना के किया जा रहा खतरनाक काम’ बताया। यह खबर टाइम्स ऑफ इंडिया और द टेलीग्राफ में भी है। एसआईआर की खबर भी टेलीग्राफ में पहले पन्ने पर है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, एसआईआर पर तृणमूल और चुनाव आयोग में भिड़ंत। दो कॉलम के इस शीर्षक के तहत सिंगल कॉलम की दो खबरें हैं। एक का शीर्षक है, “अभी तक 40 मौतें, चुनाव आयोग के हाथ खून से सने हैं : टीएमसी”। दूसरी खबर का शीर्षक है, “चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल पुलिस से कहा, बीएलओ को बेलगाम पार्टी वालों से बचाएं”। हिन्दुस्तान टाइम्स में सिंगल कॉलम की खबर है, पश्चिम बंगाल में एसआईआर पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग ने विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त किया। दि एशियन एज में अंदर खबर होने की सूचना है, बीएलओ को न धमकाएं, चुनाव आयोग ने टीएमसी के दावों से इनकार किया। एआई की सूचनाओं में पश्चिम बंगाल में बीएलओ से जबरदस्ती करने के कई मामले हैं। हालांकि भाजपा नेता को गिरफ्तार करने की खबर भी है। उदाहरण के लिए जागरण डॉट कॉम की एक पुरानी खबर है, झारखंड के घाटशिला में भाजपा नेता हराधन सिंह को मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। तारापद महतो नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि बूथ में वोट कम आने पर हराधन सिंह और अन्य लोगों ने उनके साथ मारपीट की। पुलिस ने मामला दर्ज कर हराधन सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
अमर उजाला की 18 नवंबर की खबर के अनुसार, सहायक बीएलओ का कार्य कर रहे भाजपा नेता से गाली गलौज। कहने की जरूरत नहीं है कि भाजपा नेता का बीएलओ होना ही गलत है। पर वह अलग मामला है और मध्य प्रदेश में भी हाल में ऐसा मामला चर्चा में था। खबरों के अनुसार, दतिया में मतदाता सूची के लिए चल रहे एसआईआर के दौरान बूथ-लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के असिस्टेंट के रूप में कथित तौर पर भाजपा और आरएसएस से जुड़े कुछ लोगों की नियुक्ति कर दी गई थी। विवाद बढ़ने पर जिला प्रशासन ने इसे अनजाने में हुई गलती बताते हुए कहा कि संबंधित लोगों के नाम सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जाहिर है कि शिकायत भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी है। लेकिन विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त होने की खबर सिर्फ बंगाल से है। मैं नहीं कह रहा कि यही सही है या मैं ही सही हूं। मैं यह कहना चाह रहा हूं कि खबरों में भी पक्षपात है। नवोदय टाइम्स की आज की लीड का शीर्षक है, वायु प्रदूषण पर संसद में चर्चा हो राहुल। इंट्रो है – सवाल किया, कोई तत्परता या जवाबदेही क्यों नहीं दिखा रही है मोदी सरकार। यह खबर आज द हिन्दू में पेज दो पर होने की सूचना पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम की संक्षिप्त खबरों में है। इसका असर एआई की जानकारी में भी है। आइए देखें एसआईआर और बीएलओ की मौत से संबंधित खबरों के बारे में एआई की जानकारी में खास क्या है। (जारी)
अगले हिस्से में पढ़िए – आरएसएस से जुड़े संगठन ने बीएलओ की मौत के लिए एक करोड़ का मुआवजा मांगा, बीएलओ की मौत और एफआईआर से संबंधित खबरों का हाल, एआई की मदद से।
लेखक संजय कुमार सिंह से [email protected] के जरिए संपर्क किया जा सकता है।


