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उत्तर प्रदेश

बाँदा की सबसे कीमती नदी ‘केन’- सरकार, प्रशासन, माफिया, पत्रकार सब मिलकर इसकी हत्या कर रहे हैं!

जो नदी बांदा को ज़िंदगी देती है, वही आज सबकी मिलीभगत से मौत के घाट उतारी जा रही है। कवि केदारनाथ अग्रवाल की प्रिय केन नदी—बांदा की लाइफलाइन—आज खनन माफिया के बुलडोज़रों, प्रशासन की चुप्पी, सत्ता की सरपरस्ती और मीडिया की बेरुख़ी के बीच कराह रही है। सरकार से लेकर पुलिस और पत्रकारों तक, कोई भी पाक-साफ़ नहीं दिखता। दुर्लभ शजर पत्थरों के नाम पर केन को इस कदर रौंदा जा रहा है कि नदी का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है। यह सिर्फ़ पर्यावरण का सवाल नहीं, बल्कि एक नदी की सामूहिक हत्या की कहानी है—जिसे देख कर भी अनदेखा किया जा रहा है।


मनुष्य बहुत मूर्ख जीव है। जो चीजें उसे ज़िन्दगी देती हैं, उसे ही वो ख़त्म करने पर आमादा है। बांदा पत्रकारों के एक प्रोग्राम में गया था। दिल्ली से हम कई पत्रकार पहुंचे थे। केन नदी देखने चले गए। कवि केदारनाथ अग्रवाल की प्रिय केन नदी। ये केन बांदा की लाइफलाइन है। लेकिन इसे बुरी तरह रौंदा जा रहा है। सरकार, मंत्री, नेता, प्रशासन, पुलिस, पत्रकार सब मिलकर नोंच रहे हैं। एक नदी की हत्या सब मिलकर कर रहे हैं। दिल्ली से साथ गए समीरात्मज भाई से रहा नहीं गया। एक वीडियो बना दिया। – यशवंत सिंह


यूपी के बांदा ज़िले से बहने वाली केन नदी अपने दुर्लभ शज़र पत्थरों के लिए जानी जाती है लेकिन खनन माफिया की वजह से नदी का ही जीवन संकट में है। क्या है शज़र पत्थर और नदी संकट में है क्यों है? देखिए बाँदा से ग्राउंड रिपोर्ट…

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