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छत्तीसगढ़

क्या चैतन्य बघेल को भूपेश बघेल का बेटा होने की सजा मिली है?

राजकुमार सोनी-

क्या चैतन्य को भूपेश बघेल का बेटा होने की सज़ा मिली है? जब फिल्म अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन ख़ान को अंतर्राष्ट्रीय ड्रग्स रैकेट में फंसाया गया था तब देश की एक बड़ी आबादी ने यहीं माना था कि आर्यन को शाहरुख का बेटा होने की सज़ा मिली है.शाहरुख एक समुदाय विशेष से हैं तो जाहिर सी बात है कि शाहरुख़ को समुदाय विशेष से होने की वजह से ही नफ़रती चिन्टुओं की नफ़रत का सामना करना पड़ता है. नफ़रतियों की टुच्ची हरकतों के बावजूद शाहरुख़ हिन्दुस्तान और यहां की आवाम से बेशुमार मोहब्बत करने वाले शानदार अभिनेता हैं.

जब आर्यन पर झूठा केस बना तब उनकी फिल्मों का बहिष्कार करने वालों ने सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म पर उत्पात मचाकर रख दिया था, लेकिन वर्ष 2022 में जैसे ही आर्यन ख़ान को तमाम आरोपों से बरी किया गया तब नारंगियों की हालत पतली हो गई थीं. बॉयकॉट गैंग इधर-उधर बंगले झांकने को मजबूर हो गया था.

इधर 18 जुलाई को जब छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को ईडी ने गिरफ्तार किया तब भी लोगों की पहली प्रतिक्रिया इसी रुप में सामने आई कि बिट्टू यानी चैतन्य को केवल और केवल भूपेश बघेल का बेटा होने की सज़ा मिली है.

कोई यह मानने को तैयार ही नहीं हो रहा है कि खेत-खार को संभालने वाला एक संकोची लड़का चैतन्य किसी तरह के आर्थिक अपराध में लिप्त हो सकता है ? चैतन्य को जानने-समझने वाले नजदीकी कहते हैं कि अगर उस लड़के के भीतर किसी तरह की कोई महत्वाकांक्षा होती तो जब उसके पिता मुख्यमंत्री थे तब ही वह किसी इलाके का विधायक बन गया होता.

दरअसल जिन लोगों ने चैतन्य बघेल को निशाने पर लिया है उनका काम ही यहीं हैं. जब ये लोग एक बाप से लड़ नहीं पाते तो औरतों और बच्चों को ही निशाने पर लेते हैं. हमला करते हैं. कमर के नीचे वार करते हैं. छत्तीसगढ़ में जब पन्द्रह सालों तक डॉ. रमन सिंह की सरकार थीं तब भी यहीं सब प्रवृत्ति देखने-समझने को मिलती थीं.

इस बात को सब जानते हैं कि डॉ. रमन सिंह के शासनकाल में ही भूपेश बघेल की बुजुर्ग मां को थाने में बिठा दिया गया था.

दरअसल कच्छाधारी गैंग के लोग कभी भी अपने काम को बड़ा नहीं करते…बल्कि उसका यहीं काम रहता है दूसरों की लकीर को छोटा कैसे किया जाय.अपने पांच साल के शासनकाल में भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ की अस्मिता को जो पहचान दी थीं… दरअसल उनकी यहीं पहचान नारंगियों के लिए परेशानी का सबब है और यह परेशानी आगे भी बनी रहने वाली ही दिखती है.

छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार को फिर से बने हुए लगभग दो साल हो गए हैं, लेकिन इस बीच एक भी काम ऐसा नहीं हुआ है जिसका स्वस्फूर्त मूल्यांकन हुआ हो. [ विज्ञापन के जरिए चेहरे पर क्रीम-पाउडर चुपड़कर बदसूरत से बदसूरत चेहरे को चमकाने के खेल में माहिर गोदी मीडिया की बात छोड़ दीजिए. गोदी मीडिया को भांडगिरी के एवज़ में पैसा मिलता है तो उसका मूल्यांकन प्रतिदिन जारी रहता है. हालांकि गोदी मीडिया में जब कभी भी सरकारी विज्ञापनों की भरमार देखता हूं तो नामचीन लेखक सआदत हसन मंटो का लिखा हुआ यह वाक्य याद आता है- “कोठे की एक तवायफ और एक बिका हुआ पत्रकार एक ही श्रेणी में आते हैं, लेकिन इनमें तवायफ की इज्जत ज्यादा होती है.]

बहरहाल इधर खुद भाजपा के विधायक राज्य में चल रही लूट-खसोट को लेकर विधानसभा में सवाल उठा रहे हैं. अडानी जंगल पर जंगल काट रहा है, लेकिन अगर कोई सवाल उठाएगा उसे तो जेल भेज दिया जाता है.

अडानी द्वारा छत्तीसगढ़ में ताबड़तोड़ ढंग से की जा रही पेड़ों की कटाई को लेकर भूपेश बघेल बघेल बेहद मुखर रहे हैं तो उन पर और उनके परिवार पर यह आफ़त आनी ही थीं.

अब बात थोड़ी ईडी की कर लेते हैं. ईडी ने देश भर में जितनी भी कार्यवाहियां की है उसके चलते उसकी स्थिति हास्यास्पद ही बनती रही है. ईडी ने अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह से खो दी हैं. इसी 18 मार्च 2025 को राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया है कि प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने गत दस सालों में वर्तमान, पूर्व सांसदों और विधायकों सहित कुल 193 राजनेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया, लेकिन केवल दो के खिलाफ ही मामला सिद्ध हो पाया है. मंत्री के इस जवाब से यह तो साबित होता ही है ईडी अब तक बेकसूर और बेगुनाह लोगों को ही फंसाती रही है. अब यह बताने की जरूरत नहीं है कि ईडी के पीछे किसका प्रेशर काम करता है. विपक्षी नेताओं के वक्तव्य में इन सब बातों का खुलासा होते ही रहता है.

अब इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो भूपेश बघेल ही बता सकते हैं, लेकिन इधर पिछले कुछ समय से यह चर्चा भी कायम है कि बघेल को भाजपा में शामिल होने का न्योता दिया गया था. बताते हैं कि भूपेश बघेल ने यह कहते हुए इंकार कर दिया था कि उन्हें और लोगों की तरह भाजपा की वाशिंग मशीन में इंट्री लेने का शौक नहीं है क्योंकि वे ग़लत नहीं है.

छत्तीसगढ़िया जनता सोशल मीडिया में यह भी लिख रही है कि नारंगियों ने बेटे को हाथ लगाने से पहले बाप से बात नहीं की है… लेकिन जिस दिन बाप लौटा और बाप ने बात की तब क्या होगा?

तब क्या होगा? यह सवाल राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में तो तैर ही रहा है. आवाम के बीच भी इस सवाल की गूंज बनी हुई है.

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