1628 पदों पर गड़बड़ी का आरोप, विभागीय प्रमुख की भूमिका पर उठे सवाल
रायपुर : छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु विभाग में फॉरेस्ट गार्ड और ड्राइवरों की भर्ती में बड़ा घोटाला सामने आया है। कुल 1628 पदों की इस भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली की बात उजागर हुई है। बताया जा रहा है कि विभागीय प्रमुख, 1990 बैच के आईएफएस अधिकारी श्रीनिवास राव, इस घोटाले के मुख्य सूत्रधार हैं। डिजिटल प्रणाली के जरिए पारदर्शी भर्ती का दावा करने वाली सरकार की मंशा पर इस घटनाक्रम ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डिजिटल प्रणाली को आखिरी समय में किया ऑफलाइन
राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल माप-जोख और शारीरिक दक्षता परीक्षण की गाइडलाइन जारी की थी। इसके लिए हैदराबाद की कंपनी ‘टाइमिंग टेक्नोलॉजीज इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ को करोड़ों का ठेका दिया गया था। लेकिन भर्ती के दौरान डिजिटल उपकरण समय पर नहीं लगाए गए। परिणामस्वरूप, अधिकारियों ने पुराने तरीकों से माप-जोख और शारीरिक दक्षता परीक्षण कर खानापूर्ति कर दी।
साठगांठ और गड़बड़ी के आरोप
सूत्रों के अनुसार, विभागीय प्रमुख श्रीनिवास राव और ठेका कंपनी के बीच गहरी साठगांठ थी। नियमों के विपरीत, इस कंपनी को ऊंची दरों पर ठेका दिया गया, जबकि कंपनी की कार्यप्रणाली पहले से सवालों के घेरे में थी। भर्ती के दौरान अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं हुआ और हजारों उम्मीदवारों के सपनों पर पानी फिर गया।
पीड़ित उम्मीदवारों का आक्रोश
उम्मीदवारों का आरोप है कि गाइडलाइन का पालन न करने से अयोग्य और ऊंची पहुंच वाले व्यक्तियों को फायदा पहुंचाया गया। शिकायतकर्ताओं ने यह भी कहा कि विभागीय मंत्री को घोटाले की जानकारी देने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया।
भर्ती अधिकारियों की चेतावनी को किया गया अनदेखा
भर्ती केंद्रों से कई डीएफओ (जिला वन अधिकारी) और अधिकारियों ने घोटाले की शिकायतें विभागीय प्रमुख तक पहुंचाई थीं। बावजूद इसके, कोई कदम नहीं उठाया गया। यहां तक कि भर्ती प्रक्रिया को ऑफलाइन करने का निर्णय एक विभागीय समिति बनाकर लिया गया, जिससे धांधली को अंजाम दिया जा सके।

सरकार की साख पर सवाल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के लिए यह घोटाला बड़ी चुनौती बन गया है। बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने का दावा करने वाली सरकार की साख इस घोटाले से प्रभावित हुई है। भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण योग्य उम्मीदवार अपनी दक्षता साबित नहीं कर पाए, जिससे सरकार के पारदर्शिता के दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले की निष्पक्ष जांच की मांग
इस घोटाले से नाराज उम्मीदवारों और स्थानीय नेताओं ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल, यह मामला सरकार और विभागीय प्रमुख की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।

बाएं श्रीनिवास राव हैं। दायें पूर्व वनमंत्री अकबर। इस अधिकारी श्रीनिवास राव की क़ाबलियत ये है कि अपने से 9 सीनियर अधिकारियों को बाईपास करके इनको CCF बनाया गया है। पिछले कांग्रेस सरकार में ये वन मंत्री अकबर और भूपेश बघेल का खासम-खास था। इस सरकार में भी इसने अपनी गोटी सेट कर ली है। यहां तक कि सरकार इसकी उँगली पकड़ के वन विभाग चला रही है। पूर्व कांग्रेस सरकार में बीजेपी के कार्यकर्ताओं का ये तक आरोप था कि चुनाव में कांग्रेस और अकबर के लिए फंडिंग ये अधिकारी मैनेज करवा रहा पर इस सरकार में भी लगता है बीजेपी को यही भरोसे लायक़ मिला है।




omnarayan verma
June 10, 2025 at 10:58 am
सर बिलासपुर में वन विभाग भारी वाहन चालक के भर्ती पर भरी फेर बदल किया गया है इसका शिकायत कहा दर्ज कराना पड़ेगा थोड़ा मार्ग दर्शन कीजिए