नोएडा के ‘गैंगस्टरबाज अफसरों’ ने हाईकोर्ट में कराई योगी सरकार की किरकिरी!

जेपी सिंह

गौतम बुद्ध नगर के डीएम-एसएसपी की जुगलबंदी, चार्जशीट दाखिल नहीं पर गैंग्स्टर की कार्रवाई, पत्रकार भी जद में, इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुई सरकार की किरकिरी

गौतम बुद्ध नगर के ग्रेटर नोएडा में भू-माफियाओं पर शिकंजा कसने की कार्यवाही के नाम पर डीएम बीएन सिंह और एसएसपी वैभव कृष्ण की जुगलबंदी से गैंग्स्टर लगाने की कार्रवाई लगातार की जा रही है, लेकिन गैंग्स्टर एक्ट के प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। प्रावधानों के अनुसार गैंग्स्टर लगाने की कार्रवाई तब होती है जब सम्बन्धित मामले में चार्जशीट दाखिल हो जाती है। लेकिन ऐसा न करने के कारण जब मामला इलाहबाद हाईकोर्ट में पहुंचता है और डीएम-एसएसपी की व्यक्तिगत पेशी होती है तो वे इसका जवाब नहीं दे पाते और न्यायालय के सामने योगी सरकार की किरकिरी कराते हैं। ऐसे ही एक मामले में 5 भू-माफियाओं पर गैंगस्टर लगाया गया है। इन पर आरोप है कि ये अवैध रूप से यमुना तट पर प्लाट काटकर गरीब लोगों को गैर कानूनी तरीके से बेच रहे थे।

इसमें से एक प्रतोष कुमार भाटी (पुत्र शिवनारायण भाटी निवासी दानपुर थाना डिवाई बुलंदशहर हाल ओमीकोन प्रथम 244 काली बिल्डिंग थाना कासना सम्बन्धित मु0अ0सं0 131/2019 धारा 2/3 गैंगस्टर अधिनियम, थाना नॉलेज पार्क) को गिरफ्तार किया गया और गैंग्स्टर लगाने की कार्रवाई की गयी पर जब मामला हाईकोर्ट के सामने आया तो जस्टिस राजेन्द्र कुमार की एकल पीठ यह देखकर हैरान रह गयी कि बिना चार्जशीट दाखिल किये एसएसपी वैभव कृष्ण ने गैंग्स्टर लगाने की अनुशंसा की और डीएम बीएन सिंह ने इसका अनुमोदन कर दिया। एकल पीठ ने डीएम और एसएसपी को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में तलब कर लिया और हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

एकल पीठ आदेश के अनुपालन में डीएम और एसएसपी व्यक्तिगत रूप से न्यायालय के सामने पेश हुए और अपना व्यक्तिगत हलफनामा दायर किया। आरोपी के अधिवक्ता ने कहा कि आवेदक को उत्पीड़न के उद्देश्य से इस मामले में झूठा फंसाया गया है। आवेदक ने कोई अपराध नहीं किया। पुलिस द्वारा एक झूठी और मनगढ़ंत कहानी स्थापित की गई है। यदि आवेदक जमानत पर छूटता है, तो वह जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा। सरकारी वकील ने जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध किया लेकिन आवेदक के वकील द्वारा किए गए तथ्यात्मक प्रस्तुतिकरण पर कोई प्रतिवाद नहीं किया और केवल यह कहा कि आवेदक एक गिरोह का सदस्य है, जिसके खिलाफ एक मामला चल रहा है, जैसा कि गिरोह चार्ट में दिखाया गया है। एकल पीठ ने प्रतोष कुमार भाटी की जमानत आवेदन को मंजूर कर लिया।

पत्रकारों पर भी बिना चार्जशीट के गैंग्स्टर की कार्रवाई

नोएडा में पिछले दिनों चार पत्रकारों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इनमें से एक लखनऊ का पत्रकार है। पुलिस का कहना है कि इन्हें एक्सटॉर्शन के मामले में धरा गया है। इनकी गिरफ्तारी गाज़ियाबाद, लखनऊ और ग्रेटर नोएडा से की गई।नोएडा पुलिस ने बीटा 2 कोतवाली में इन पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। चार गिरफ्तार पत्रकारों के नाम हैं- चंदन रॉय, नीतीश पांडेय, सुशील पंडित और उदित गोयल। पांचवां पत्रकार रमन ठाकुर फरार हो गए और बाद में गिरफ्तारी से स्टे ले आए।

इन सभी गिरफ्तार पत्रकारों पर डीएम बीएन सिंह और एसएसपी वैभव कृष्ण की जुगलबंदी से गैंगस्टर लगाया गया है। नियमानुसार बिना चार्जशीट दाखिल किये गैंगस्टर नहीं लगाया जा सकता लेकिन डीएम और एसएसपी सभी कानून से उपर अपने को मानते हैं इसलिए गैंगस्टर एक्ट के प्रावधानों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। यह भी गौरतलब है कि पत्रकार चंदन राय पर पहले से कोई भी मुकदमा नहीं है, बावजूद इसके इन पर भी गैंगस्टर लगाया गया है। मीडिया जगत में पत्रकारों पर गैंगस्टर लगाने जैसी कार्रवाई करने पर हलचल मची गई है। पर सत्ताधारी नेताओं-अफसरों के तलवे चाटने वाली मुख्यधारा की बिकाऊ मीडिया ने अफसरों के इस अवैधानिक कुकृत्य के खिलाफ एक लाइन न लिखा न दिखाया। सबके सब डीएम और एसएसपी की जुबान से जो निकले, वही छापते-दिखाते रहे।

इन गिरफ्तार पत्रकारों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अलग अलग प्रार्थनापत्र दाखिल करके जमानत की याचना की है जिस पर सोमवार को सुनवाई होने की संभावना है। संभावना है कि नोएडा के डीएम एसएसपी की एक बार फिर कोर्ट में क्लास लग सकती है।

आरोप है कि पत्रकारों को गिरफ्तार इसलिए किया गया क्योंकि वे लगातार नोएडा पुलिस और नोएडा के कप्तान के खिलाफ खबरें छाप रहे थे। सवाल यही है कि क्या पुलिस के खिलाफ खबरें छापने के कारण पत्रकारों की गिरफ्तारी होगी और उन पर गैंगस्टर लगा दिया जाएगा? सोमवार को शायद यही सवाल नोएडा के गैंगस्टरबाज अफसरों से हाईकोर्ट पूछे! फिर क्या जवाब देंगे कलक्टर साब और कप्तान साब?

इलाहाबाद के वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार जेपी सिंह की रिपोर्ट.

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