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हाईकोर्ट ने Dainik Bhaskar की अपील खारिज की, पत्रकार राजेश कपिल को बकाया वेतन देने का आदेश कायम

(राजेश कपिल)

चंडीगढ़, 30 जनवरी 2025: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दैनिक भास्कर प्रबंधन की अपील खारिज करते हुए ट्रिब्यूनल के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें पत्रकार राजेश कपिल को सेवा समाप्ति के बाद पूरा बकाया वेतन (बैक वेज) देने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने प्रबंधन के दावों को “निराधार” बताते हुए फैसला सुनाया कि कर्मचारी के खिलाफ दर्ज FIR में टर्मिनेशन वापसी का कोई उल्लेख नहीं है, जो प्रबंधन के तर्कों को कमजोर करता है।

इस बार दैनिक भास्कर की याचिका डबल बेंच ने ख़ारिज की। इससे पहले सिंगल बेंच ने डिसमिस्स की थी भास्कर प्रबंधन की याचिका।

मामले की पृष्ठभूमि:

  • पत्रकार राजेश कपिल को 30 जून 2010 को सेवा से हटा दिया गया था।
  • औद्योगिक ट्रिब्यूनल, जालंधर ने 18 जनवरी 2019 के अपने फैसले में कर्मचारी को 30 जून 2010 से 4 मई 2012 तक पूरा बैक वेज देने का आदेश दिया।
  • Dainik Bhaskar प्रबंधन ने हाईकोर्ट में यह दावा करते हुए अपील दायर की कि उन्होंने टर्मिनेशन ऑर्डर 20 जुलाई 2010 को वापस ले लिया था, लेकिन कर्मचारी ने काम पर वापसी नहीं की।

कोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

  1. FIR में अंतर्विरोध: कोर्ट ने पाया कि प्रबंधन द्वारा 28 फरवरी 2011 को दर्ज FIR (संख्या 42) में 20 जुलाई 2010 को टर्मिनेशन वापसी का कोई जिक्र नहीं था, जबकि यह घटना FIR दर्ज करने से पहले की है। इससे प्रबंधन के दावे पर सवाल उठे।
  2. कानूनी प्रावधानों का नया दावा खारिज: प्रबंधन ने पहली बार हाईकोर्ट में “वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट, 1955 की धारा 17” का हवाला देते हुए कहा कि कर्मचारी का दावा अमान्य है। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह तर्क ट्रिब्यूनल या सिंगल जज के समक्ष पहले नहीं रखा गया था।
  3. ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराया: कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने साक्ष्यों का सही विश्लेषण किया है और प्रबंधन का रुख “गढ़ा हुआ” (कॉन्कॉक्टेड) लगता है।

न्यायाधीशों की टिप्पणी:

  • जस्टिस सुधीर सिंह ने कहा, “यदि टर्मिनेशन वास्तव में वापस लिया गया होता, तो FIR में इसका उल्लेख जरूर होता। प्रबंधन का यह दावा विश्वसनीय नहीं है।”
  • जस्टिस सुखविंदर कौर ने जोर देकर कहा कि नए कानूनी तर्कों को अपील में नहीं उठाया जा सकता, खासकर जब निचली अदालतों में इन्हें पेश न किया गया हो।

निष्कर्ष:

हाईकोर्ट के इस फैसले से मीडिया कर्मियों के अधिकारों को मजबूती मिली है। यह स्पष्ट हुआ कि नियोक्ताओं द्वारा कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग करने की कोशिश की जाती है, तो अदालतें सख्त रुख अपनाएंगी। अब Dainik Bhaskar प्रबंधन को राजेश कपिल को बकाया वेतन का भुगतान करना होगा।

समाचार को रिपोर्ट करने वाला: यह फैसला बोलने योग्य (Speaking) और रिपोर्टेबल (Reportable) घोषित किया गया है।

देखें ऑर्डर की कॉपी-

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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