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उत्तर प्रदेश

रिश्वत की रकम दारोगा ने जेब में नहीं, फाइल में दबाकर दराज में रख ली थी, इसलिए जमानत मिल गई!

भई वाह… ऐसी रिश्वतखोरी, जेल और जमानत पर भला कौन न फिदा हो जाए!

लखनऊ- उप्र की राजधानी लखनऊ के महानगर स्थित पेपरमिल चौकी इंचार्ज धनंजय सिंह को दो लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ धरा गया था। यही कोई 30 अक्टूबर 2025 के आसपास का मामला है। गिरफ्तारी के बाद दारोगा को जेल भेज दिया गया था। लेकिन अब कोर्ट ने दारोगा धनंजय को जमानत दे दी है। पता है क्यों, क्योंकि रिश्वत की रकम दारोगा ने लेकर जेब में नहीं रखी थी, बल्कि उसे फाइल में दबाकर दराज में रख ली थी। बस यही ग्राउंड बना उसकी जमानत का। है न गजब का कानून… अदालत में हुआ क्या वह पढ़िए..उसके बाद कुछ टिप्पणियां….


आशुतोष त्रिपाठी-

शरीर से नहीं, फाइल से मिला…इसलिए बेदाग! कानून के नए अध्याय में आपका स्वागत है। अब रिश्वत लेना अपराध नहीं, बस गलत जगह से बरामद होना अपराध है। अगर पैसे जेब में मिले…गुनाह। हाथ में मिले…सवाल। लेकिन फाइल में मिले तो? अरे साहब, ये तो सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा ठहरा!

लखनऊ के दारोगा धनंजय सिंह का मामला बताता है कि कानून अब लोकेशन-बेस्ड हो चुका है। शरीर से दूरी बनाए रखिए, फाइल से दोस्ती निभाइए। 500 की चार गड्डियां अगर काग़ज़ों के बीच हों तो वो रिश्वत नहीं, दस्तावेज़ी सहयोग हो जाता है। हाईकोर्ट ने जमानत दी,क्योंकि पैसा इंसान से नहीं, सिस्टम से चिपका मिला।

अब हर रिश्वतखोर के लिए क्रैश कोर्स तैयार है…
हाथ से मत लो, फाइल में रखो।
जेब से बचो, बैग अपनाओ।
अटैची न मिले तो प्लास्टिक की पन्नी भी चलेगी…बस शरीर से दूरी ज़रूरी है।

विडियो वायरल हो, रंगेहाथ पकड़े जाओ तो घबराइए मत। दलील तैयार है…माई लॉर्ड, पैसे ने मुझे नहीं छुआ। कानून भी मुस्कुराएगा, जमानत भी।

आख़िरकार, नैतिकता नहीं…पैसे की पार्किंग मायने रखती है। देश बदल रहा है, नियम भी। अब सवाल ये नहीं कि रिश्वत ली या नहीं…सवाल ये है कि कहाँ रखी?


मो. अतहर रजा-

ये दारोगा धनंजय सिंह हैं, अक्टूबर में इन्हें दो लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था, एक फाइल में 500 की चार गड्डियां लेते हुए वीडियो खूब वायरल हुई थी!

अब हाईकोर्ट ने जमानत दे दी हैं, तर्क ये दिया गया हैं कि पैसे इनके शरीर या जेब से बरामद नहीं हुआ था!

अब हर रिश्वतखोर को हाथ से पैसे लेने की बजाय फाइल, बैग, झोला नहीं तो पालिस्टिक की पन्नी का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि जज साहब ऐसी दलील पर जमानत दे देते हैं!

धनंजय सिंह की दो लाख रुपए लेते हुए वीडियो आज भज हर प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, फिर भी कोर्ट ने बचकानी दलील पर जमानत दे दिया हैं, उम्मीद हैं कि बहुत जल्द ड्यूटी में भी लौट लाएंगे और फिर से वहीं काम करेंगे, होनहार जो हैं!

सरकार ऐसे लोगों को नौकरी से बाहर क्यों नहीं करती हैं, हमारे देश में युवाओं की कमी थोड़े हैं नौकरी करने के लिए! ऐसे बेईमान देश और समाज का हमेशा नुकसान ही करेंगे!


दिनेश डांगी-

ये दारोगा धनंजय सिंह हैं , अक्टूबर में इन्हें दो लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था ,

एक फाइल में 500 की चार गड्डियां लेते हुए वीडियो खूब वायरल हुई थी !

अब हाईकोर्ट ने जमानत दे दी हैं , तर्क ये दिया गया हैं कि पैसे इनके शरीर या जेब से बरामद नहीं हुआ था !

अब हर रिश्वतखोर को हाथ से पैसे लेने की बजाय फाइल , बैग , झोला नहीं तो पालिस्टिक की पन्नी का इस्तेमाल करना चाहिए , क्योंकि जज साहब ऐसी दलील पर जमानत दे देते हैं !

धनंजय सिंह की दो लाख रुपए लेते हुए वीडियो आज भज हर प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं , फिर भी कोर्ट ने बचकानी दलील पर जमानत दे दिया हैं ,

उम्मीद हैं कि बहुत जल्द ड्यूटी में भी लौट लाएंगे और फिर से वहीं काम करेंगे , होनहार जो हैं !

सरकार ऐसे लोगों को नौकरी से बाहर क्यों नहीं करती हैं , हमारे देश में युवाओं की कमी थोड़े हैं नौकरी करने के लिए !

ऐसे बेईमान देश और समाज का हमेशा नुकसान ही करेंगे !

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