Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

दिल्ली

दिल्ली विधानसभा चुनाव : त्रिकोणीय संघर्ष में परिवर्तन की राह पर सत्ता!

कैलाश सिंह-

लखनऊ/दिल्ली | दिल्ली विधान सभा का चुनावी समीकरण इस बार तेजी से बदल रहा है। एक दशक पूर्व अन्ना हज़ारे के आंदोलन से निकले अरविंद केजरीवाल ‘कट्टर ईमानदार’ बनकर आये और कांग्रेस को हटाकर दिल्ली की सत्ता पर काबिज हो गए। शराब समेत विभिन्न घोटालों के आरोप में जेल से जमानत पर बाहर आये तो ‘जन सहानुभूति’ और ‘कट्टर ईमानदार’ वाली उनकी छवि धूमिल हो चुकी थी। दोनों पूंजी गंवाने के बाद वह चुनावी परीक्षा के फाइनल में उतरे हैं।

इनके गिरते जनाधार पर सवार होकर भाजपा ढाई दशक बाद सत्ता की तरफ़ बढ़ती नज़र आ रही है। भाजपा से कांग्रेस ने सत्ता छीनी थी और कांग्रेस को आम आदमी पार्टी ने हटाया था। राष्ट्रीय पैमाने पर भाजपा से लड़ने में सक्षम पाकर मुस्लिम मतदाता कांग्रेस के साथ आकर उसके आत्मविश्वास को ऊँचाई देने लगे हैं। इस तरह तीनों दलों के आने से चुनावी संग्राम त्रिकोणीय हो गया है।

दरअसल, जून 2024 के लोकसभा चुनाव परिणाम ने संकेत दे दिया कि मुस्लिम मतदाता प्रांतीय पार्टियों की बजाय कांग्रेस की ओर रुख कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि देश की आजादी के बाद 1952 में पहले चुनाव से कांग्रेस के साथ रहने वाला मुस्लिम वोटर 1990 के दशक में भाजपा के खिलाफ़ जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश करते हुए क्षेत्रीय दलों में शिफ्ट हो गया था, लेकिन बीते लोकसभा चुनाव से पूर्व राहुल गाँधी की पद यात्रा और विपक्षी गठबंधन में चुनाव के दौरान मुस्लिम मतदाता को यह समझ आ गया कि राष्ट्रीय पैमाने पर भाजपा से केवल कांग्रेस ही लड़ सकती है। क्षेत्रीय दलों के छोटे- छोटे तुष्टिकरण बड़े पैमाने पर विलीन हो जाते हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर के करीबी रहे समाजवादी चिंतक वशिष्ठ नारायण सिंह का मानना है कि अरसे बाद राहुल गाँधी के रूप में कोई युवा नेता रष्ट्रीय स्तर पर पदयात्रा पर निकला और जन सामान्य से मिलकर उनके सुख- दुःख का हिस्सेदार बना। इतना ही नहीं, उन्हें देश के भूगोल के साथ आमजन के राजनीतिक सरोकार और उनकी मंशा का भी पता चला। यह सच है की मुस्लिम मतदाता के साथ अन्य वर्गों का वोटर भी बीते लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस की तरफ़ रुख कर दिया। विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस के साथ होने से क्षेत्रीय पार्टियों को भी लाभ मिला। यही कारण है की दिल्ली विधान सभा चुनाव में सीलमपुर सीट से सभा करके राहुल गाँधी ने अपनी पार्टी के प्रचार अभियान की शुरुआत कर दी है। यहां लगभग 50 फीसदी मुस्लिम मतदाता बताए जाते हैं।

आम आदमी पार्टी और उसके संयोजक अरविंद केजरीवाल के लिए दिल्ली का यह चुनाव उस प्रतियोगी परीक्षा के फ़ाइनल की तरह है जिसके लिए अभ्यर्थी जिस प्रकार जान लगा देता है कि उसे फ़िर मौका नहीं मिलेगा, ठीक वही हाल केजरीवाल और उनकी पार्टी का है।

एक वक़्त था जब अरविंद केजरीवाल के झूठ को भी पब्लिक सच मानती थी, अब घोटालों के आरोप में जमानत पर जेल से लौटने के बाद लोग उनके सच को भी झूठ या नौटंकी मान रहे हैं। इस तरह उनकी कुल जमा पूंजी ‘कट्टर ईमानदार’ वाली ध्वस्त हो गई। रहा सवाल जन सहानुभूति का तो यह कोरोना के दौरान ही खत्म हो गई। उत्तर प्रदेश और बिहार के नौकरी पेशा व श्रमिकों के लिए केजरीवाल के पास महामारी से लड़ने को इंतजाम नहीं था।

जबकि यही वोटर आम आदमी पार्टी को 12 साल से दिल्ली की सत्ता पर बैठाने में मील का पत्थर साबित हुआ लेकिन उन्हीं वोटरों को उन्होंने यूपी की सीमा पर छोड़ दिया था, तब उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बग़ैर स्वार्थ के बिहार के बाशिंदों को भी उनके घरों तक अपनी बसों से पहुंचाया।

भाजपा की केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना रूपी आपदा में पूरे देश के लिए खुद को समर्पित कर दिया। उन्होंने आपदा में राजनीतिक अवसर को नहीं तलाश किया। यही कारण है कि उनके एक आह्वान पर देश ने एक साथ घंटी और ताली बजाई।

दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में केजरीवाल उसी आपदा में अपने सरकारी आवास को कथित शीश महल का रूप दे रहे थे और पब्लिक आक्सीजन तक के लिए भटक रही थी। मुस्लिम वोटरों ने कांग्रेस का रुख करके भाजपा की सत्ता वाली राह को आसान कर दिया। बाकी वर्गों का मतदाता का रुख भाजपा की तरफ़ होने से दिल्ली विधान सभा का चुनाव त्रिकोणीय होता जा रहा है। तीनों प्रमुख दलों आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा के लिए यह चुनाव अस्तित्व के लिए संघर्ष का हो गया है।

लेखक तहलका न्यूज नेटवर्क के राजनीतिक संपादक हैं।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
1 Comment

1 Comment

  1. राजा

    January 15, 2025 at 4:34 pm

    मोदी ने कोरोना में खुद को देश के लिए समर्पित कर दिया। हा हा हा, मतलब कुछ भी। दुनिया के इकलौते राष्ट्रध्यक्ष जिनकी फोटो वैक्सीन सर्टिफिकेट पे थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन