देवरिया। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के मामले में कोतवाली पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गिरफ्तारी के दौरान बरामद नकदी और सामान वापस न करने को लेकर पुलिस पर रुपये हड़पने का आरोप लगा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने देवरिया कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक से आख्या (रिपोर्ट) तलब की है।
अमिताभ ठाकुर की ओर से दायर प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि गिरफ्तारी के समय उनके पास 42 हजार रुपये नकद, दो मोबाइल फोन और एक टॉर्च थी। बाद में कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने सामान लौटाने की कार्रवाई की, लेकिन आरोप है कि पूरी रकम वापस नहीं की गई। पुलिस द्वारा केवल 7208 रुपये लौटाए गए, जबकि शेष नकदी और टॉर्च नहीं दी गई। इसके अलावा दोनों मोबाइल फोन के लॉक भी टूटे होने की बात कही गई है।
इस संबंध में अमिताभ ठाकुर के पैरोकार द्वारा अदालत में वाद दाखिल किया गया, जिसमें पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि बरामद सामान जानबूझकर पूरा नहीं लौटाया जा रहा है। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए देवरिया कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक से 23 जनवरी तक विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
उधर, पुलिस का कहना है कि अमिताभ ठाकुर के पास से जो सामान बरामद हुआ था, वही नियमानुसार वापस किया गया है और किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है। हालांकि, कोर्ट के निर्देश के बाद अब पुलिस को पूरे मामले पर लिखित जवाब देना होगा।
इस प्रकरण को लेकर पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आजाद अधिकार सेना ने घोषणा की है कि इस मामले को लेकर पूर्व आईपीएस की सुरक्षा और पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ बुधवार को देवरिया कलेक्ट्रेट परिसर में सांकेतिक धरना दिया जाएगा, जिसके बाद ज्ञापन सौंपा जाएगा।

यह मामला न सिर्फ पुलिस की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि गिरफ्तारी के दौरान बरामद सामान की सुरक्षा और वापसी को लेकर सिस्टम में कितनी गंभीर खामियां मौजूद हैं।



