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संपादक का तुगलकी फरमान, खबरदार जो कुर्ता-पायजामा पहन कर कार्यालय आया

हिन्दुस्तान मेरठ अपने तुगलकी फरमानों के कारण फिर चर्चा में है। इस बार वरिष्ठ स्थानीय संपादक अनिल भास्कर ने पत्रकारों को कुर्ता-पायजामा और चप्पल-सैंडल पहनकर कार्यालय नहीं आने का फरमान सुना दिया है। इसके लिए बाकायदा सभी को ईमेल भेजकर सूचित किया गया है कि आफिस में केवल जूते पहनकर ही आए। ऐसा नहीं करने पर आफिस में नहीं घुसने दिया जाएगा। 

हिन्दुस्तान मेरठ अपने तुगलकी फरमानों के कारण फिर चर्चा में है। इस बार वरिष्ठ स्थानीय संपादक अनिल भास्कर ने पत्रकारों को कुर्ता-पायजामा और चप्पल-सैंडल पहनकर कार्यालय नहीं आने का फरमान सुना दिया है। इसके लिए बाकायदा सभी को ईमेल भेजकर सूचित किया गया है कि आफिस में केवल जूते पहनकर ही आए। ऐसा नहीं करने पर आफिस में नहीं घुसने दिया जाएगा। 

संपादक के इस तुगलकी फरमान का विरोध भी शुरू हो गया है। कई पत्रकारों ने संपादक के इस फरमान का खुलेआम विरोध किया है और बाकायदा रिटर्न ईमेल भेजकर संपादक से विरोध दर्ज कराया है। इसकी शिकायत हिन्दुस्तान के प्रबंधन और समूह संपादक शशि शेखर से भी की गई है। 

पत्रकारों का कहना है कि हिन्दुस्तान मेरठ में आए दिन नए-नए फरमान जारी किए जा रहे हैं। इससे पहले हिन्दुस्तान के इवेंट मस्ती मार्ग पर सभी पत्रकारों को अपने परिवार के साथ आने का फरमान जारी हुआ था। इसका पालन भी केवल एक डीएनई भूपेश उपाध्याय को छोड़कर किसी ने नहीं किया था। पिछले साल इन्क्रीमेंट नहीं होने से खफा वरिष्ठ संवाददाता राजेश शर्मा ने जहर खाकर जान देने की कोशिश की थी। इसके बाद पत्रकारों ने संपादकों के व्यवहार के प्रति खुला आक्रोश प्रकट किया था।

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1 Comment

1 Comment

  1. ARUN

    June 7, 2015 at 6:21 pm

    अनिल भास्कर कितने नियमो मे रहते है, वाराणसी यूनिट जाकर लोगो से पूछो.

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